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विश्व हृदय दिवस: सीने में दर्द हो पर ईसीजी आए नॉर्मल तो न करें नजरअंदाज, सीरम मायोग्लोबिन टेस्ट करवाएं
Fri, 29 Sep 2023 12:09 PM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 29 Sep 2023 12:09 PM IST
सार
सीने में दर्द की शिकायत के बाद ओपीडी में आने वाले ज्यादातर मरीजों की ईसीजी रिपोर्ट नॉर्मल आ रही थी। लेकिन वह मरीज लगातार सीने में दर्द की शिकायत कर रहे थे। ऐसे में उनकी वास्तविक स्थिति ज्ञात करने के लिए पीजीआई ने उन मरीजों का सिरम मायोग्लोबिन टेस्ट करना शुरू किया। इसके बाद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए।
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विश्व हृदय दिवस
- फोटो : istock
विस्तार
सीने में दर्द होने के बावजूद ईसीजी रिपोर्ट में गड़बड़ी न आए तो भी इसे अनदेखा न करें, क्योंकि सीने का दर्द गंभीर हृदय रोग का संकेत हो सकता है। ऐसे में सीरम मायोग्लोबिन टेस्ट करवाएं, क्योंकि हृदय संबंधी मर्ज की पुष्टि इस टेस्ट के द्वारा आसानी से हो सकती है। पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर के विशेषज्ञों ने सीने में दर्द की शिकायत होने पर ईसीजी रिपोर्ट नॉर्मल आने वाले मरीजों पर किए गए शोध से यह पुष्टि की है।
यह भी पढ़ें: Sukhpal Khaira: सुखपाल खैरा से मिलने थाने पहुंचे पंजाब कांग्रेस के नेता, पुलिस वालों ने दरवाजा ही नहीं खोला
एडवांस कार्डियक सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर यशपाल शर्मा ने बताया कि युवाओं में हृदय संबंधी मर्ज तेजी से बढ़ रहा है। अनियमित खानपान और अव्यवस्थित दिनचर्या के कारण उनका हृदय बीमार हो रहा है। ऐसे में बचाव के लिए जरूरी है कि खानपान को संतुलित करने के साथ ही शारीरिक क्रियाशीलता पर ध्यान दें। राष्ट्रीय सर्वेक्षण से पता चला है कि 12 प्रतिशत महिलाओं और 7.1 प्रतिशत पुरुषों (15 साल वर्ष से अधिक) में ब्लड शुगर का स्तर बहुत अधिक है। ये सभी हृदय रोग के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि सीने में दर्द की शिकायत के बाद ओपीडी में आने वाले ज्यादातर मरीजों की ईसीजी रिपोर्ट नॉर्मल आ रही थी। लेकिन वह मरीज लगातार सीने में दर्द की शिकायत कर रहे थे। ऐसे में उनकी वास्तविक स्थिति ज्ञात करने के लिए पीजीआई ने उन मरीजों का सिरम मायोग्लोबिन टेस्ट करना शुरू किया। इसके बाद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। इस पर किए गए शोध में शामिल मरीजों में से 80% में किसी न किसी प्रकार की हृदय संबंधी गंभीर समस्या सामने आई।
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एडवांस कार्डियक सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर यशपाल शर्मा ने बताया कि युवाओं में हृदय संबंधी मर्ज तेजी से बढ़ रहा है। अनियमित खानपान और अव्यवस्थित दिनचर्या के कारण उनका हृदय बीमार हो रहा है। ऐसे में बचाव के लिए जरूरी है कि खानपान को संतुलित करने के साथ ही शारीरिक क्रियाशीलता पर ध्यान दें। राष्ट्रीय सर्वेक्षण से पता चला है कि 12 प्रतिशत महिलाओं और 7.1 प्रतिशत पुरुषों (15 साल वर्ष से अधिक) में ब्लड शुगर का स्तर बहुत अधिक है। ये सभी हृदय रोग के प्रमुख कारणों में गिने जाते हैं।
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उन्होंने बताया कि सीने में दर्द की शिकायत के बाद ओपीडी में आने वाले ज्यादातर मरीजों की ईसीजी रिपोर्ट नॉर्मल आ रही थी। लेकिन वह मरीज लगातार सीने में दर्द की शिकायत कर रहे थे। ऐसे में उनकी वास्तविक स्थिति ज्ञात करने के लिए पीजीआई ने उन मरीजों का सिरम मायोग्लोबिन टेस्ट करना शुरू किया। इसके बाद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। इस पर किए गए शोध में शामिल मरीजों में से 80% में किसी न किसी प्रकार की हृदय संबंधी गंभीर समस्या सामने आई।
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दर्द लगातार बना रहे तो सीरम मायोग्लोबिन टेस्ट अनिवार्य
प्रोफेसर यशपाल ने बताया कि हृदय संबंधी समस्या की शिकायत करने वाले मरीजों में डॉक्टर सामान्य तौर पर ईसीजी के रिपोर्ट के आधार पर इलाज का निर्णय लेते हैं। लेकिन इस शोध से साबित हो गया है कि ईसीजी में गड़बड़ी सामने न आने के बावजूद भी मरीज को गंभीर समस्या हो सकती है।
यह भी पढ़ें: हाईकोर्ट: जिस श्रेणी का नहीं था हकदार, उसमें बिताए 17 साल... अब प्रशासन को देना होगा पांच लाख का मुआवजा
ऐसे में अगर सीने में दर्द लगातार बना रहे और ईसीजी में कोई पुष्टि न हो तो सीरम मायोग्लोबिन टेस्ट अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। प्रो. यशपाल ने बताया कि देश में अभी किसी भी चिकित्सा संस्थान में हृदय संबंधी प्रारंभिक जांच में इसका उपयोग नहीं किया जाता। यह टेस्ट किट के माध्यम से होता है जिसमें मरीज का खून लेकर उसमें अलग-अलग मॉलीक्यूलर की जांच की जाती है।
शोध में यह परिणाम आया सामने
विशेषज्ञ ने ऐसे 40 मरीज को शोध में शामिल किया, जिसमें महिलाएं 40% व पुरुष 60% थे। उनमें से 50% में हृदय की एक धमनी में ब्लॉकेज पाई गई। 21% में तीन धमनियों में ब्लॉकेज मिली। 14% में बाई मुख्य धमनी में ब्लॉकेज पाई गई। इनमें से 60% मरीजों में स्टेंट डाला गया। महज 14 प्रतिशत की स्थिति सामान्य मिली।
इनका पालन करना जरूरी
ऐसा भोजन लें
दैनिक आहार में सब्जियों (200 ग्राम), फल (200 ग्राम), अनाज और फाइबर (20 ग्राम/डी) का सेवन बढ़ाएं। नमक का सेवन 5 ग्राम होना चाहिए। उच्च संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ लाल मांस, डेयरी उत्पाद, नारियल और ताड़ के तेल, उच्च ट्रांस-फैट सामग्री जैसे डीप-फ्राइड फास्ट फूड, बेकरी उत्पाद और पैकेज्ड स्नैक फूड से बचना चाहिए।
जान लें... ये लक्षण हैं खतरनाक
छाती में दर्द, सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, गर्दन, जबड़े, गले, पेट, पैर या बाजुओं में दर्द, दिल की धड़कन का अचानक धीमा या तेज होना, पैरों या भुजाओं में सुन्नपन, चक्कर आना या बेहोशी और थकान।
इनका रखें ख्याल
रक्तचाप : 120/80
कोलेस्ट्रोल : 200 एमजी/डीजी से कम
बैड कोलेस्ट्रोल : 100 एमजी/डीजी से कम
गुड कोलेस्ट्रोल : 50 एमजी/डीजी से कम
ग्लूकोज का स्तर खाली पेट : 100 एमजी/डीजी से कम
बीएमआई : 25 केजी/एम
पीजीआई में तेजी से बढ़ रही मरीजों की संख्या
ओपीडी 2022-23 2021-22 2020-21
कॉर्डियोलॉजी क्लीनिक 35736 22327 8983
पीडियाट्रिक कॉर्डियक क्लीनिक 3924 1934 625
कैथ लैब में इतनों की हुई सर्जरी
2022-23 2021-22 2020-21
11367 8308 4655
हृदय संबंधी मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा मुहैया कराने के उद्देश्य से पिछले एक वर्षों से रोबोटिक परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन तकनीक से इलाज किया जा रहा है। एक साल में 53 मरीजों को इससे लाभ मिल चुका है। वहीं, पिछले एक साल के दौरान टावर तकनीक से 63 मरीजों की सर्जरी हो चुकी है। - प्रो. यशपाल शर्मा, प्रमुख पीजीआई एडवांस कार्डियक सेंटर
प्रोफेसर यशपाल ने बताया कि हृदय संबंधी समस्या की शिकायत करने वाले मरीजों में डॉक्टर सामान्य तौर पर ईसीजी के रिपोर्ट के आधार पर इलाज का निर्णय लेते हैं। लेकिन इस शोध से साबित हो गया है कि ईसीजी में गड़बड़ी सामने न आने के बावजूद भी मरीज को गंभीर समस्या हो सकती है।
यह भी पढ़ें: हाईकोर्ट: जिस श्रेणी का नहीं था हकदार, उसमें बिताए 17 साल... अब प्रशासन को देना होगा पांच लाख का मुआवजा
ऐसे में अगर सीने में दर्द लगातार बना रहे और ईसीजी में कोई पुष्टि न हो तो सीरम मायोग्लोबिन टेस्ट अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। प्रो. यशपाल ने बताया कि देश में अभी किसी भी चिकित्सा संस्थान में हृदय संबंधी प्रारंभिक जांच में इसका उपयोग नहीं किया जाता। यह टेस्ट किट के माध्यम से होता है जिसमें मरीज का खून लेकर उसमें अलग-अलग मॉलीक्यूलर की जांच की जाती है।
शोध में यह परिणाम आया सामने
विशेषज्ञ ने ऐसे 40 मरीज को शोध में शामिल किया, जिसमें महिलाएं 40% व पुरुष 60% थे। उनमें से 50% में हृदय की एक धमनी में ब्लॉकेज पाई गई। 21% में तीन धमनियों में ब्लॉकेज मिली। 14% में बाई मुख्य धमनी में ब्लॉकेज पाई गई। इनमें से 60% मरीजों में स्टेंट डाला गया। महज 14 प्रतिशत की स्थिति सामान्य मिली।
इनका पालन करना जरूरी
- धूम्रपान से बचें, अधिक शराब का सेवन न करें। प्रतिदिन 30-45 मिनट नियमित व्यायाम करें। स्वस्थ भोजन शैली अपनाएं।
- हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और असामान्य कोलेस्ट्रॉल के मरीज नियमित दवाइयां लें।
- कोरोना से बचाव के प्रोटोकॉल का पालन करें। हाथ की स्वच्छता, फेस मास्क पहनना और सामाजिक दूरी बनाएं रखें।
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 किग्रा/एम2 रखें। आदर्श वजन की गणना सेमी 100 में ऊंचाई के आधार पर की जा सकती है।
ऐसा भोजन लें
दैनिक आहार में सब्जियों (200 ग्राम), फल (200 ग्राम), अनाज और फाइबर (20 ग्राम/डी) का सेवन बढ़ाएं। नमक का सेवन 5 ग्राम होना चाहिए। उच्च संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ लाल मांस, डेयरी उत्पाद, नारियल और ताड़ के तेल, उच्च ट्रांस-फैट सामग्री जैसे डीप-फ्राइड फास्ट फूड, बेकरी उत्पाद और पैकेज्ड स्नैक फूड से बचना चाहिए।
जान लें... ये लक्षण हैं खतरनाक
छाती में दर्द, सीने में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, गर्दन, जबड़े, गले, पेट, पैर या बाजुओं में दर्द, दिल की धड़कन का अचानक धीमा या तेज होना, पैरों या भुजाओं में सुन्नपन, चक्कर आना या बेहोशी और थकान।
इनका रखें ख्याल
रक्तचाप : 120/80
कोलेस्ट्रोल : 200 एमजी/डीजी से कम
बैड कोलेस्ट्रोल : 100 एमजी/डीजी से कम
गुड कोलेस्ट्रोल : 50 एमजी/डीजी से कम
ग्लूकोज का स्तर खाली पेट : 100 एमजी/डीजी से कम
बीएमआई : 25 केजी/एम
पीजीआई में तेजी से बढ़ रही मरीजों की संख्या
ओपीडी 2022-23 2021-22 2020-21
कॉर्डियोलॉजी क्लीनिक 35736 22327 8983
पीडियाट्रिक कॉर्डियक क्लीनिक 3924 1934 625
कैथ लैब में इतनों की हुई सर्जरी
2022-23 2021-22 2020-21
11367 8308 4655
हृदय संबंधी मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा मुहैया कराने के उद्देश्य से पिछले एक वर्षों से रोबोटिक परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन तकनीक से इलाज किया जा रहा है। एक साल में 53 मरीजों को इससे लाभ मिल चुका है। वहीं, पिछले एक साल के दौरान टावर तकनीक से 63 मरीजों की सर्जरी हो चुकी है। - प्रो. यशपाल शर्मा, प्रमुख पीजीआई एडवांस कार्डियक सेंटर