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कोरोना वायरसः चंडीगढ़ में कर्फ्यू, आज से दिन में सिर्फ चार घंटे ही लोग कर सकेंगे खरीददारी
Mon, 30 Mar 2020 11:23 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2020 11:23 AM IST
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सोशल डिस्टेंसिंग
- फोटो : अमर उजाला
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कर्फ्यू के दौरान दी गई ढील के समय में यूटी प्रशासन ने अब कटौती कर दी है। शहरवासी सोमवार से दिन में सिर्फ चार घंटे ही खरीदारी के लिए बाहर निकल सकेंगे। एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि अब रोजाना सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच लोग पास के बाजार में जाकर अपने जरूरत का सामान खरीद सकेंगे।
खरीददारी के लिए एक परिवार से एक ही व्यक्ति को ही इजाजत दी गई है और वह भी पैदल ही पास के बाजार में जा सकेगा। आदेशों के अनुसार, अगर कोई भी व्यक्ति बाइक या कार लेकर गया तो वाहन को जब्त कर लिया जाएगा। प्रशासन की तरफ से जारी आदेशों के अनुसार, आवश्यक वस्तुओं जिनमें अनाज, किराने का सामान, फल, सब्जियां, दूध, मांस और मछली आदि की खरीद के लिए ही दुकानों तक जा सकेंगे।
इसके अलावा अन्य सभी नियम पहले की तरह ही होंगे। व्यक्तियों के बीच सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए सेक्टर रिस्पांस टीम्स, चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहेंगे। इसके अलावा सोमवार से शहर के सभी बैंकों की ब्रांच खुलेंगी। इसके अलावा एटीएम भी खुल जाएंगे। यह निर्णय रविवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया है।
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जोमैटो करेगा राशन की डिलीवरी
राशन की डोर टू डोर सप्लाई के लिए यूटी प्रशासन जोमैटो का सहारा लेगा। प्रशासक के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया गया कि लोगों को घर-घर राशन पहुंचाने के लिए जोमैटो के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा। लोग जोमैटो के मोबाइल ऐप पर राशन ऑनलाइन ऑर्डर कर सकेंगे और उसकी पेमेंट भी ऑनलाइन ही होगी। इससे लोगों को राशन की घर तक डिलीवरी मिलेगी।
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खरीददारी के लिए एक परिवार से एक ही व्यक्ति को ही इजाजत दी गई है और वह भी पैदल ही पास के बाजार में जा सकेगा। आदेशों के अनुसार, अगर कोई भी व्यक्ति बाइक या कार लेकर गया तो वाहन को जब्त कर लिया जाएगा। प्रशासन की तरफ से जारी आदेशों के अनुसार, आवश्यक वस्तुओं जिनमें अनाज, किराने का सामान, फल, सब्जियां, दूध, मांस और मछली आदि की खरीद के लिए ही दुकानों तक जा सकेंगे।
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इसके अलावा अन्य सभी नियम पहले की तरह ही होंगे। व्यक्तियों के बीच सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए सेक्टर रिस्पांस टीम्स, चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहेंगे। इसके अलावा सोमवार से शहर के सभी बैंकों की ब्रांच खुलेंगी। इसके अलावा एटीएम भी खुल जाएंगे। यह निर्णय रविवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया है।
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जोमैटो करेगा राशन की डिलीवरी
राशन की डोर टू डोर सप्लाई के लिए यूटी प्रशासन जोमैटो का सहारा लेगा। प्रशासक के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया गया कि लोगों को घर-घर राशन पहुंचाने के लिए जोमैटो के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा। लोग जोमैटो के मोबाइल ऐप पर राशन ऑनलाइन ऑर्डर कर सकेंगे और उसकी पेमेंट भी ऑनलाइन ही होगी। इससे लोगों को राशन की घर तक डिलीवरी मिलेगी।
कर्फ्यू में ढील के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई मोहर, कहा- सोशल डिस्टेंसिंग रहे बरकार
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए चंडीगढ़ में लगाए गए कर्फ्यू में लोगों को परेशानी न हो, इसलिए सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ढील देने के यूटी प्रशासन के निर्णय पर अब हाईकोर्ट ने भी अपनी मोहर लगा दी है। साथ ही प्रशासन को ढील के दौरान हर हाल में सोशल डिस्टेंसिंग को बरकरार रखने और शहर के लोगों को जरूरी वस्तुओं की कमी न हो यह भी सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस राजीव शर्मा एवं जस्टिस आरके जैन की खंडपीठ ने यह आदेश कर्फ्यू में ढील के चंडीगढ़ प्रशासन के आदेश के खिलाफ दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिए हैं।
याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रशासन का नीतिगत निर्णय है, ऐसे में हाईकोर्ट को इस निर्णय में दखल देने की जरुरत नहीं है। प्रशासन ने हेल्थ एक्सपर्ट्स से सलाह कर अन्य सभी पक्षों पर गौर करने के बाद ही कर्फ्यू में कितनी ढील जाए इसका निर्णय किया होगा जो सही है। लेकिन हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को सख्त हिदायत भी दी है कि इस कर्फ्यू के दौरान और कर्फ्यू में दी गई ढील के दौरान जो कोई भी नियमों का उल्लंघन करता है, उसके खिलाफ कड़ी करवाई की जाए।
चंडीगढ़ के आदित्यजीत सिंह चड्डा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया था कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च तीन सप्ताह तक पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर देश के सभी नागरिकों को घरों में रहने का आग्रह किया था। जबकि चंडीगढ़ प्रशासन उसी दिन सुबह ही शहर भर में कर्फ्यू लगाए जाने के आदेश दे चुका था, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन ने 27 मार्च को 28 मार्च से सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कर्फ्यू में ढील के आदेश दिए।
दुकानों को इस दौरान खुली रखने की छूट दे दी, ताकि लोग आवश्यक वस्तुओं की खरीद में परेशानी न हो। याचिकाकर्ता के अनुसार, अब कर्फ्यू में ढील दिए जाने से कर्फ्यू और लॉकडाउन का पूरा उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा, बाजारों में भीड़ बढ़ जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग, जो अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाय है, वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। ऐसे में कर्फ्यू में ढील दिए जाने के 27 मार्च के आदेशों को रद्द किए जाने की हाईकोर्ट से मांग की गई थी।
जस्टिस राजीव शर्मा एवं जस्टिस आरके जैन की खंडपीठ ने यह आदेश कर्फ्यू में ढील के चंडीगढ़ प्रशासन के आदेश के खिलाफ दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिए हैं।
याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह प्रशासन का नीतिगत निर्णय है, ऐसे में हाईकोर्ट को इस निर्णय में दखल देने की जरुरत नहीं है। प्रशासन ने हेल्थ एक्सपर्ट्स से सलाह कर अन्य सभी पक्षों पर गौर करने के बाद ही कर्फ्यू में कितनी ढील जाए इसका निर्णय किया होगा जो सही है। लेकिन हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को सख्त हिदायत भी दी है कि इस कर्फ्यू के दौरान और कर्फ्यू में दी गई ढील के दौरान जो कोई भी नियमों का उल्लंघन करता है, उसके खिलाफ कड़ी करवाई की जाए।
चंडीगढ़ के आदित्यजीत सिंह चड्डा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया था कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च तीन सप्ताह तक पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर देश के सभी नागरिकों को घरों में रहने का आग्रह किया था। जबकि चंडीगढ़ प्रशासन उसी दिन सुबह ही शहर भर में कर्फ्यू लगाए जाने के आदेश दे चुका था, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन ने 27 मार्च को 28 मार्च से सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कर्फ्यू में ढील के आदेश दिए।
दुकानों को इस दौरान खुली रखने की छूट दे दी, ताकि लोग आवश्यक वस्तुओं की खरीद में परेशानी न हो। याचिकाकर्ता के अनुसार, अब कर्फ्यू में ढील दिए जाने से कर्फ्यू और लॉकडाउन का पूरा उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा, बाजारों में भीड़ बढ़ जाएगी और सोशल डिस्टेंसिंग, जो अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव का एकमात्र उपाय है, वह पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। ऐसे में कर्फ्यू में ढील दिए जाने के 27 मार्च के आदेशों को रद्द किए जाने की हाईकोर्ट से मांग की गई थी।