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Chandigarh News: कुत्तों के काटने पर पहली बार चंडीगढ़ ने दिया मुआवजा, हादसे में मृत्यु पर जारी किए पांच लाख
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चंडीगढ़। लावारिस कुत्तों और जंगली जानवरों के काटने या उनकी वजह से होने वाले हादसों पर चंडीगढ़ में मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहली बार लावारिस जानवर की वजह से हुई मृत्यु के मामले में मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये और की कुत्ते के तीन बार काटने पर पीड़ित को 30 हजार रुपये का मुआवजा जारी किया गया है। यह चंडीगढ़ के इतिहास में पहली बार हुआ है। आने वाले दिनों में अन्य कई पीड़ितों को भी मुआवजा जारी किया जाएगा।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर गाय, बैल, गधे, कुत्ते, नीलगाय, भैंस व अन्य जंगली जानवरों के काटने पर मुआवजा देने के लिए डीसी विनय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कमेटी बनी है। कमेटी में नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग समेत कई अन्य विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं। अब तक कमेटी तीन बार बैठक कर चुकी है। कई आवेदन भी आए हुए हैं। आवेदनों की समीक्षा कर अब उन्हें मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
डीसी विनय प्रताप सिंह ने बताया कि दो मामलों में मुआवजा जारी किया गया है। एक व्यक्ति की मौत जंगली जानवर की वजह से हादसे में हुई थी। इस केस में हाईकोर्ट की ओर से तय की गई राशि के अनुसार ही पांच लाख रुपये का मुआवजा जारी किया गया है। दूसरे केस में एक ही व्यक्ति को तीन बार कुत्ते ने काटा था। प्रति दांत के अनुसार कुल 30 हजार रुपये का मुआवजा जारी किया गया है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार कुत्ते के काटने पर प्रत्येक दांत के निशान के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे मामलों में जहां त्वचा से 0.2 सेमी तक मांस बाहर निकल जाता है, प्रति घटना 10,000 रुपये दिए जाएंगे।
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कुत्तों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो निगम का काफी बजट मुआवजा देने में जाएगा
डीसी विनय प्रताप सिंह ने वीरवार को हुई सदन की बैठक में भी इस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लावारिस कुत्तों का मामला काफी गंभीर है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। हर महीने 100 के करीब आवेदन आएंगे। ऐसे में अगर कुत्तों की समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो नगर निगम का काफी बजट मुआवजा देने में चला जाएगा। बता दें कि नगर निगम ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने बजट में 20 लाख रुपये का प्रावधान किया है, जो कुत्तों के काटने या जंगली जानवरों से हुए हादसों में मुआवजा देने के लिए जारी किया जा रहा है।
शहर में करीब 9400 कुत्ते, 90 फीसदी का हो चुका है स्टरलाइजेशन
केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2018 में की गई जनसंख्या के अनुसार चंडीगढ़ में 12900 कुत्ते थे। वर्ष 2022 में नगर निगम ने अपने स्तर पर एक सर्वे कराया। पाया कि करीब 9400 कुत्ते हैं। उन्होंने बताया कि 90 फीसदी कुत्तों का स्टरलाइजेशन हो चुका है। कई पार्षदों ने सवाल उठाया कि लोग पार्क में कुत्तों को टहलाते हैं और फिर जब कुत्ता गंदगी करता है तो उसे साफ भी नहीं करते हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। निगम के अधिकारियों ने बताया गया कि इसलिए ही नए बायलॉज बनाए गए हैं। सदन ने पास कर दिया है लेकिन प्रशासन ने अधिसूचना नहीं जारी की है। पहले सिर्फ 200 रुपये के चालान का प्रावधान था। अब इसमें 2000 से 12000 रुपये तक के चालान का प्रावधान है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर गाय, बैल, गधे, कुत्ते, नीलगाय, भैंस व अन्य जंगली जानवरों के काटने पर मुआवजा देने के लिए डीसी विनय प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कमेटी बनी है। कमेटी में नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग समेत कई अन्य विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं। अब तक कमेटी तीन बार बैठक कर चुकी है। कई आवेदन भी आए हुए हैं। आवेदनों की समीक्षा कर अब उन्हें मुआवजा जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
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डीसी विनय प्रताप सिंह ने बताया कि दो मामलों में मुआवजा जारी किया गया है। एक व्यक्ति की मौत जंगली जानवर की वजह से हादसे में हुई थी। इस केस में हाईकोर्ट की ओर से तय की गई राशि के अनुसार ही पांच लाख रुपये का मुआवजा जारी किया गया है। दूसरे केस में एक ही व्यक्ति को तीन बार कुत्ते ने काटा था। प्रति दांत के अनुसार कुल 30 हजार रुपये का मुआवजा जारी किया गया है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार कुत्ते के काटने पर प्रत्येक दांत के निशान के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे मामलों में जहां त्वचा से 0.2 सेमी तक मांस बाहर निकल जाता है, प्रति घटना 10,000 रुपये दिए जाएंगे।
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कुत्तों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो निगम का काफी बजट मुआवजा देने में जाएगा
डीसी विनय प्रताप सिंह ने वीरवार को हुई सदन की बैठक में भी इस पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लावारिस कुत्तों का मामला काफी गंभीर है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार मुआवजा दिया जा रहा है। हर महीने 100 के करीब आवेदन आएंगे। ऐसे में अगर कुत्तों की समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो नगर निगम का काफी बजट मुआवजा देने में चला जाएगा। बता दें कि नगर निगम ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने बजट में 20 लाख रुपये का प्रावधान किया है, जो कुत्तों के काटने या जंगली जानवरों से हुए हादसों में मुआवजा देने के लिए जारी किया जा रहा है।
शहर में करीब 9400 कुत्ते, 90 फीसदी का हो चुका है स्टरलाइजेशन
केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2018 में की गई जनसंख्या के अनुसार चंडीगढ़ में 12900 कुत्ते थे। वर्ष 2022 में नगर निगम ने अपने स्तर पर एक सर्वे कराया। पाया कि करीब 9400 कुत्ते हैं। उन्होंने बताया कि 90 फीसदी कुत्तों का स्टरलाइजेशन हो चुका है। कई पार्षदों ने सवाल उठाया कि लोग पार्क में कुत्तों को टहलाते हैं और फिर जब कुत्ता गंदगी करता है तो उसे साफ भी नहीं करते हैं। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। निगम के अधिकारियों ने बताया गया कि इसलिए ही नए बायलॉज बनाए गए हैं। सदन ने पास कर दिया है लेकिन प्रशासन ने अधिसूचना नहीं जारी की है। पहले सिर्फ 200 रुपये के चालान का प्रावधान था। अब इसमें 2000 से 12000 रुपये तक के चालान का प्रावधान है।