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अनुशासन, शिक्षकों पर विश्वास और कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी

Tue, 06 Oct 2020 01:15 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2020 01:15 AM IST
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Discipline, trust in teachers and hard work is the key to success
चंडीगढ़। जेईई एडवांस्ड के रिजल्ट में ट्राइसिटी के विद्यार्थी चमके हैं। सभी ने जीत का एक ही मंत्र बताते हुए कहा, ‘जीवन में यदि सफलता पानी है तो उसके लिए अनुशासन बेहद जरूरी है। इसके अलावा शिक्षकों पर विश्वास और कड़ी मेहनत चाहिए। विद्यार्थी सोच में अधिक पड़ जाते हैं जबकि तैयारी की तरफ ध्यान कम देते हैं। तनाव अधिक लेते हैं। इसलिए सोचें कम और पढ़ें अधिक।’ उन्होंने युवाओं को संदेश दिया है कि दो साल तक इसकी तैयारी की जाए तो सफलता अवश्य मिलेगी। हर दिन पढ़ाई के लिए घंटे तय करने होंगे। आइए जानते हैं क्या कहते हैं ट्राइसिटी टॉपर-
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पहला स्थान
आईआईटी बांबे में दाखिला लेने लक्ष्य : ध्वनित
फोटो-परिवार के साथ ::
पंचकूला के सेक्टर- 6 निवासी ध्वनित बेनीवाल ने ट्राइसिटी टॉप किया है। उनका सपना है कि वह आईआईटी बांबे में दाखिला लेकर इंजीनियर बनें। उसी के मुताबिक वह पढ़ाई कर रहे थे। अपनी रैंक से वह संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन वह सात से आठ घंटे पढ़ाई करते थे। जन स्वास्थ्य विभाग के चीफ इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हुए धर्मपाल सिंह बेनीवाल कहते हैं कि बेटे की सफलता ने खुश कर दिया। उनकी मां संगीता बेनीवाल शिक्षका हैं। अपने बेटे की उपलब्धि से काफी खुश हैं। ध्वनित का कहना है कि वह कोरोना के दौरान कुछ तनाव में आए थे, लेकिन पढ़ाई पर धीरे-धीरे फोकस किया और यहां तक पहुंच गए। ध्वनित के पास मोबाइल नहीं है और न ही किसी अन्य का प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि सफलता के लिए कड़ी मेहनत जरूरी है। ध्वनित को 396 में से 321 अंक मिले हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मार्गदर्शन और माता-पिता के आशीर्वाद से सफलता मिली है। श्री चैतन्य इंस्टीट्यूट के केंद्र निदेशक मृणाल सिंह भी छात्रों की सफलता पर खुश हैं। उन्होंने कहा कि सेंटर की ओर से छात्रों का पूरा साथ दिया गया।
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दूसरा स्थान
शिक्षकों की बात सुनकर हर हाल में अमल करें : गुरप्रीत
फोटो-
मूलरूप से लुधियाना के रहने वाले छात्र गुरप्रीत सिंह वाधवा ने अपनी सफलता का मंत्र बताते हुए कहा कि शिक्षकों की बात हर हाल में मानें। वह सही रास्ता दिखाते हैं। गुरप्रीत सिंह ने ट्राइसिटी में दूसरा स्थान पाया है। उन्हें 396 में से 310 अंक मिले हैं।
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गुरप्रीत व्यवसायी गुरमीत सिंह के बेटे हैं। उनके पिता और मां गुरवीन कौर उनकी सफलता से खुश हैं। गुरप्रीत सिंह ने बताया कि कोरोना के कारण पढ़ाई प्रभावित हो सकती थी, लेकिन श्री चैतन्य इंस्टीट्यूट ने पढ़ाई ऑनलाइन शुरू करवा दी। इसका लाभ मिला। परीक्षा के समय मैंने शिक्षकों की हर बात मानी और उस पर अमल किया। आईआईटी बांबे में दाखिला लेने का मन है और यहां हो भी जाएगा। उन्होंने बताया कि भवन विद्यालय पंचकूला से कक्षा 11 व 12 की पढ़ाई की है। जेईई मेन्स में रैंक ज्यादा अच्छी नहीं थी, लेकिन मेरा फोकस जेईई एडवांस्ड पर था और लक्ष्य का पीछा करते हुए यहां तक पहुंचे और सफलता मिली।
तीसरा स्थान
आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करूंगा : हेमांक
फोटो-
मोहाली के फेस- 10 निवासी हेमांक बजाज ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने 396 में से 288 अंक पाए हैं। उन्होंने कहा कि टॉप- 100 में आने से वह काफी खुश हैं। वह दिल्ली आईआईटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करेंगे।

व्यवसायी राजेश कुमार के बेटे हेमांक का कहना है कि जेईई मेन्स में 38 रैंक मिली थी और मेरा फोकस एडवांस्ड पर था। तैयारी पूरी की और सफलता हासिल हो गई। पांच से छह घंटे रोज पढ़ाई की थी। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई 10वीं के बाद शुरू कर देनी चाहिए। दो साल में पढ़ाई पूरी हो जाएगी। विद्यार्थी जब तैयारी करें तो कम सोचें और अधिक पढ़ें। इससे सफलता मिल जाएगी। मां बबीता गृहणी हैं। वह बेटे की सफलता पर खुश हैं। कहती हैं कि बेटे से जो उम्मीद थी वह पूरी की। उन्होंने बताया कि भवन विद्यालय पंचकूला से हेमांक ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की है। निरंतर पढ़ाई करने की वजह से उसे इसका फल मिला।
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