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जीएमसीएच-32 में रविवार को नहीं होता डायलिसिस, ‘लामा’ होकर बचानी पड़ती है जान
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चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में भर्ती किडनी के मरीजों को जान बचाने के लिए रविवार को निजी अस्पतालों में जाकर डायलिसिस कराना पड़ रहा है। वजह है, रविवार के दिन अस्पताल में डायलिसिस यूनिट का बंद होना। इतना ही नहीं यहां भर्ती किडनी के मरीजों को निजी अस्पताल में डायलिसिस के लिए खुद को लामा (अस्पताल प्रशासन को लिखित में देना कि मरीज अपनी मर्जी से अस्पताल से जा रहा है) कराना पड़ता है। निजी अस्पताल में डायलिसिस कराकर मरीज को फिर से जीएमसीएच-32 में भर्ती पड़ता है। इसके बाद सोमवार से उसका इलाज दोबारा शुरू होता है। किडनी के गंभीर मरीजों को इस पूरी प्रक्रिया में बेहद जोखिम उठाना पड़ता है लेकिन अस्पताल प्रशासन मरीजों का दर्द कम करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर रहा।
सरकारी दर पर इलाज की व्यवस्था होने के बावजूद मरीजों को रविवार के दिन हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों के साथ उनके परिजनों की भी फजीहत हो रही है लेकिन डर के चलते वह अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कुछ भी कहने से डर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में 12 बेड की डायलिसिस यूनिट संचालित की जा रही है। इसके लिए अनुबंध पर टेक्नीशियन व अन्य कर्मचारी तैनात किए गए हैं। उनमें से एक टेक्नीशियन ने नौकरी छोड़ दी है और दूसरा अवकाश पर है। ऐसे में महज दो टेक्नीशियनों के भरोसे यूनिट के लगातार संचालन में परेशानी हो रही है।
केस-1
जीएमसीएच-32 के ही एक्स-रे विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी की किडनी खराब हो गई तो डॉक्टर ने डायलिसिस कराने के लिए कहा लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्हें रविवार रात एक बजे सेक्टर-14 स्थित एक निजी सेंटर में जाकर डायलिसिस कराना पड़ा क्योंकि रविवार को अस्पताल में डायलिसिस यूनिट बंद रहती है। बाद में स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने पीजीआई में इलाज शुरू कराया लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। करीब डेढ़ माह पहले मरीज की मौत हो चुकी है। इस घटना पर जीएमसीएच-32 के कर्मचारियों का कहना है कि जब अस्पताल प्रशासन ने रविवार को अपने ही कर्मचारी का डायलिसिस नहीं किया तो बाकी मरीजों की स्थिति क्या होगी।
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केस-2
जीरकपुर निवासी अमित कुमार (बदला हुआ नाम) मधुमेह के मरीज हैं। कुछ दिन पहले अचानक रविवार के दिन उनकी तबीयत बिगड़ी तो जीएमसीएच-32 में भर्ती कराया गया। जांच में उनका क्रिएटिनिन काफी बढ़ा हुआ आया। डॉक्टर ने तत्काल डायलिसिस कराने की सलाह दी लेकिन रविवार का दिन होने के कारण उन्हें जीएमसीएच-32 में डायलिसिस की सुविधा नहीं मिल सकी। परिजन आनन-फानन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए जहां डायलिसिस करवाने के बाद शाम को उन्हें फिर से जीएमसीएच 32 में भर्ती किया गया।
कोट-
पीजीआई में हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे डायलिसिस की सुविधा है। सामान्य दिनों की तुलना में रविवार को मरीजों का अनुपात 40 और 60 का होता है। यह ऐसी यूनिट है, जिसे एक घंटे के लिए भी बंद नहीं किया जा सकता।
-डॉ. एचएस कोहली, प्रमुख, पीजीआई नेफ्रोलॉजी विभाग
कोट-
रविवार को सामान्य दिनों की तरह डायलिसिस नहीं होती। सिर्फ इमरजेंसी और आईसीयू के मरीजों का ही जरूरत के अनुसार डायलिसिस किया जाता है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32
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सरकारी दर पर इलाज की व्यवस्था होने के बावजूद मरीजों को रविवार के दिन हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाना पड़ रहा है। इससे मरीजों के साथ उनके परिजनों की भी फजीहत हो रही है लेकिन डर के चलते वह अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कुछ भी कहने से डर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में 12 बेड की डायलिसिस यूनिट संचालित की जा रही है। इसके लिए अनुबंध पर टेक्नीशियन व अन्य कर्मचारी तैनात किए गए हैं। उनमें से एक टेक्नीशियन ने नौकरी छोड़ दी है और दूसरा अवकाश पर है। ऐसे में महज दो टेक्नीशियनों के भरोसे यूनिट के लगातार संचालन में परेशानी हो रही है।
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केस-1
जीएमसीएच-32 के ही एक्स-रे विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी की किडनी खराब हो गई तो डॉक्टर ने डायलिसिस कराने के लिए कहा लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्हें रविवार रात एक बजे सेक्टर-14 स्थित एक निजी सेंटर में जाकर डायलिसिस कराना पड़ा क्योंकि रविवार को अस्पताल में डायलिसिस यूनिट बंद रहती है। बाद में स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने पीजीआई में इलाज शुरू कराया लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। करीब डेढ़ माह पहले मरीज की मौत हो चुकी है। इस घटना पर जीएमसीएच-32 के कर्मचारियों का कहना है कि जब अस्पताल प्रशासन ने रविवार को अपने ही कर्मचारी का डायलिसिस नहीं किया तो बाकी मरीजों की स्थिति क्या होगी।
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केस-2
जीरकपुर निवासी अमित कुमार (बदला हुआ नाम) मधुमेह के मरीज हैं। कुछ दिन पहले अचानक रविवार के दिन उनकी तबीयत बिगड़ी तो जीएमसीएच-32 में भर्ती कराया गया। जांच में उनका क्रिएटिनिन काफी बढ़ा हुआ आया। डॉक्टर ने तत्काल डायलिसिस कराने की सलाह दी लेकिन रविवार का दिन होने के कारण उन्हें जीएमसीएच-32 में डायलिसिस की सुविधा नहीं मिल सकी। परिजन आनन-फानन उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए जहां डायलिसिस करवाने के बाद शाम को उन्हें फिर से जीएमसीएच 32 में भर्ती किया गया।
कोट-
पीजीआई में हफ्ते के सातों दिन 24 घंटे डायलिसिस की सुविधा है। सामान्य दिनों की तुलना में रविवार को मरीजों का अनुपात 40 और 60 का होता है। यह ऐसी यूनिट है, जिसे एक घंटे के लिए भी बंद नहीं किया जा सकता।
-डॉ. एचएस कोहली, प्रमुख, पीजीआई नेफ्रोलॉजी विभाग
कोट-
रविवार को सामान्य दिनों की तरह डायलिसिस नहीं होती। सिर्फ इमरजेंसी और आईसीयू के मरीजों का ही जरूरत के अनुसार डायलिसिस किया जाता है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32