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लूटपाट के बाद दुकान मालिक को मार दी थी गोली, दो दोषी करार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 16 Apr 2016 06:30 PM IST
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चंडीगढ़ के सेक्टर 22 में तीन युवकों ने लूटपाट करने के बाद दुकान मालिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले में दो युवकों को दोषी करार दिया गया, वहीं एक आरोपी जुवेनाइल घोषित किया गया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके जैन की कोर्ट दोनों दोषियों को 19 अप्रैल को सजा सुनाएगी। हत्या लूट के इरादे से की गई थी। मामले में कुल तीन आरोपी थे, तीसरे आरोपी को बाद में जुवेनाइल घोषित कर दिया गया था। वहीं दोषी ठहराये गए दोनों युवकों में संचित वर्मा और नाज्जर खान हैं।
तीनों के खिलाफ सेक्टर-17 थाना पुलिस ने हत्या, आर्म्स एक्ट और लूट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। वारदात 26 जुलाई 2012 की है। रात करीब 11 बजे सेक्टर-22ए में रहने वाले मदन लाल भाई कैलाश चंद की सेक्टर-22 स्थित राज प्रोविजनल डिपार्टमेंटल स्टोर पर पहुंचे। उस समय दुकान में कैलाश चंद, मदन लाल और उनका नौकर तिलक राज मौजूद था। कैलाश भाई मदन लाल के साथ दुकान पर कैश गिन रहे थे।
इसी दौरान दो युवक दुकान में घुसे, जबकि तीसरा दुकान के बाहर पहरा देने लगा। दोनों युवकों में से एक ने दुकान में घुसते ही दोनों भाइयों पर पिस्टल तान दी। इसके बाद एक ने कैलाश के गले से उसकी सोने की चेन और वहां रखा कैश लूट लिया। इसका मदन और तिलक ने विरोध किया तो उनमें से एक युवक ने देसी रिवाल्वर से उन पर फायर कर दिया। इससे कैलाश चंद के पेट और छाती पर गोलियां लग गईं। वहीं मदन की भी पीठ पर गोली लग गई।
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तिलक हिम्मत दिखाते हुए हमलावरों से भिड़ गया। इससे रिवाल्वर वहीं गिर गई। इस पर उनमें से एक युवक ने चाकू निकाल तिलक को जख्मी कर दिया। इसी दौरान शोर सुनकर आसपास के दुकानदार और लोग वहां पहुंच गए। उन्होंने हमलावरों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह भागने में सफल रहे। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने कैलाश, मदन और तिलक को जीएमएसएच-16 ले गई। वहां मदन और कैलाश की हालत खराब होते देख उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया।
वहां उपचार के दौरान कैलाश चंद की मौत हो गई थी। वारदात के बाद सेक्टर-17 पुलिस थाने ने तीनों के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने वारदात के अगले रोज 27 जुलाई को ही संचित वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। उसकी निशानदेही पर ही नाज्जर सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से लूटे गए पैसे, सोने की चेन और चांदी का कड़ा बरामद हुआ था। वहीं तीसरे जुवेनाइल को पुलिस ने 1 अगस्त को पकड़ा था।
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तीनों के खिलाफ सेक्टर-17 थाना पुलिस ने हत्या, आर्म्स एक्ट और लूट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। वारदात 26 जुलाई 2012 की है। रात करीब 11 बजे सेक्टर-22ए में रहने वाले मदन लाल भाई कैलाश चंद की सेक्टर-22 स्थित राज प्रोविजनल डिपार्टमेंटल स्टोर पर पहुंचे। उस समय दुकान में कैलाश चंद, मदन लाल और उनका नौकर तिलक राज मौजूद था। कैलाश भाई मदन लाल के साथ दुकान पर कैश गिन रहे थे।
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इसी दौरान दो युवक दुकान में घुसे, जबकि तीसरा दुकान के बाहर पहरा देने लगा। दोनों युवकों में से एक ने दुकान में घुसते ही दोनों भाइयों पर पिस्टल तान दी। इसके बाद एक ने कैलाश के गले से उसकी सोने की चेन और वहां रखा कैश लूट लिया। इसका मदन और तिलक ने विरोध किया तो उनमें से एक युवक ने देसी रिवाल्वर से उन पर फायर कर दिया। इससे कैलाश चंद के पेट और छाती पर गोलियां लग गईं। वहीं मदन की भी पीठ पर गोली लग गई।
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तिलक हिम्मत दिखाते हुए हमलावरों से भिड़ गया। इससे रिवाल्वर वहीं गिर गई। इस पर उनमें से एक युवक ने चाकू निकाल तिलक को जख्मी कर दिया। इसी दौरान शोर सुनकर आसपास के दुकानदार और लोग वहां पहुंच गए। उन्होंने हमलावरों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह भागने में सफल रहे। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने कैलाश, मदन और तिलक को जीएमएसएच-16 ले गई। वहां मदन और कैलाश की हालत खराब होते देख उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया।
वहां उपचार के दौरान कैलाश चंद की मौत हो गई थी। वारदात के बाद सेक्टर-17 पुलिस थाने ने तीनों के खिलाफ हत्या, आर्म्स एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। जांच के दौरान पुलिस ने वारदात के अगले रोज 27 जुलाई को ही संचित वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। उसकी निशानदेही पर ही नाज्जर सिंह को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से लूटे गए पैसे, सोने की चेन और चांदी का कड़ा बरामद हुआ था। वहीं तीसरे जुवेनाइल को पुलिस ने 1 अगस्त को पकड़ा था।