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Hindi News ›   Chandigarh ›   Know About Sant Rampal and Karontha Kand Issue

संत रामपाल कौन और क्या है करौंथा विवाद?

Sun, 16 Nov 2014 10:57 AM IST
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 16 Nov 2014 10:57 AM IST
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Know About Sant Rampal and Karontha Kand Issue

रोहतक स्थित गांव करौंथा स्थित सतलोक आश्रम पर कब्जे को लेकर आर्य समाज व रामपाल समर्थकों के बीच 2006 से विवाद चल रहा है। 18 फरवरी 2013 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद 7 अप्रैल को जिला प्रशासन ने सतलोक आश्रम बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट को सौंप दिया।

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इसके विरोध में 9 अप्रैल को सैकड़ों लोग आश्रम के बाहर एकत्रित हो गए। इस संबंध में सदर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने, रोड जाम व पथराव करने का केस दर्ज किया गया। इसके बाद 5 मई को पानीपत जिले के गांव अटावला निवासी अनिल ने शिकायत दी कि वह झज्जर गुरुकुल का छात्र है।
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पानीपत से झज्जर जाते समय रोहतक रेलवे स्टेशन पर संत रामपाल के अनुयायियों ने पकड़ लिया और बंधक बनाकर सतलोक आश्रम में ले गए। वहां पर उसके साथ मारपीट की। इस संबंध में भी सदर थाने में केस दर्ज है।

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आश्रम को लेकर हुई थी ‌हिंसा

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10 मई को हरियाणा गौशाला के मंत्री सर्व मित्र आर्य ने सिटी थाने में केस दर्ज कराया कि उसे अज्ञात नंबरों से धमकियां मिल रही हैं कि अगर सतलोक आश्रम खाली करने का प्रयास किया तो जान से मार देंगे। इस संबंध में सिटी थाने में केस दर्ज है। इसके बाद 12 मई को आश्रम को लेकर हुई हिंसा हुई।

इसमें गोली लगने से तीन लोगों की मौत हुई और तहसीलदार प्रमोद चहल, एसआई नरेंद्र सिंह सहित 113 से ज्यादा लोग घायल हुए। इस संबंध में सदर थाने में हत्या के प्रयास, आगजनी व तोडफ़ोड़ का केस दर्ज किया था। इसमें एक दर्जन आर्य समाजी नामजद हैं, लेकिन आचार्य बलदेव का नाम नहीं है।

क्या है करौंथा विवाद!

वर्ष 1999 में करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की गई थी। बाबा रामपाल इस आश्रम के प्रमुख हैं। पहली जून, 1999 से 7 जून, 1999 तक लगातार सप्ताह भर सत्संग हुआ। कुछ वर्ष तक सब सामान्य रहा, लेकिन फिर करौंथा और साथ लगते गांवों के लोगों खासकर आर्यसमाजियों ने रामपाल के प्रवचनों पर आपत्ति जताना शुरू कर दिया।

तब से चल रहे हैं तनावपूर्ण हालात

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इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। 12 जुलाई, 2006 को रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों में हुए खूनी टकराव में एक युवक की मौत हो गई थी। उस हिंसा के बाद संत रामपाल और उनके अनेक अनुयायियों को जेल जाना पड़ा था। तब प्रशासन की ओर से इस आश्रम को सील कर दिया गया था।

इस मुद्दे को लेकर 12 मई 2013 को फिर रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों में टकराव हो गया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। रोडवेज की दो बसों व एक एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया। शराब का ठेका फूंक डाला। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद दोनों और से फायरिंग हुई।

हिंसा में कुल 114 लोग घायल हुए, इन घायलों में 61 पुलिसकर्मी और 53 प्रदर्शनकारी थे। गंभीर रूप से घायल में से पानीपत जिले के गांव शाहपुर निवासी संदीप नाम के अध्यापक और गांव करौंथा निवासी महिला प्रमिला देवी की मौत हो गई।

संत रामपाल पर हत्या का केस

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सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल पर वर्ष 2006 में हत्या का एक मुकद्मा दर्ज है। इस सिलसिले में वे करीब डेढ़ साल तक रोहतक जेल में भी रहे थे। बाद में उन्हें जमानत मिली।

रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों के बीच करौंथा आश्रम को लेकर विवाद हो गया था। इस विवाद में सोनू नामक एक युवक की मौत हो गई थी जिसके बाद रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस दौरान रोहतक प्रशासन ने करौंथा आश्रम का कब्जा अपने हाथ में ले लिया।

बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रामपाल को आश्रम का कब्जा मिला लेकिन एक बार फिर रामपाल समर्थकों और आर्यसमाजियों में विवाद हो गया। फिलहाल रामपाल अपनी सारी गतिविधियां हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम से संचालित कर रहे हैं।

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