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बेटा इंस्पेक्टर, बेटी स्कॉलर, पिता 11 सालों से गोलियां चलाकर लोगों को लूट रहा

Tue, 17 Oct 2017 09:08 AM IST
सुशील गंभीर/अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
सुशील गंभीर/अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा) Updated Tue, 17 Oct 2017 09:08 AM IST
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Jain gang chief Satpal's son, Panchkula Police, Food Inspector in Punjab
फाय‌र‌िंग - फोटो : Demo Photo
2006 से पंचकूला पुलिस के लिए सिरदर्द बना जैन गैंग के मुखिया सतपाल का बेटा पंजाब में फूड इंस्पेक्टर है और बेटी पीएचडी स्कॉलर। फिर भी गोलियां चलाकर लूट करने का ऐसा शौक लगा हुआ था। इतना ही नहीं, असल में यह जैन गैंग तीन भाइयों की थी, जिसमें से सतपाल पकड़ा गया, इकबाल की करीब 10 माह पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई थी और हरजीत ने डेढ़ साल पहले आत्महत्या कर ली थी, क्योंकि उसका बेटा ड्रग्स की लत का शिकार था।
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अब सतपाल के साथ सिर्फ उसका एक  साथी सुखजीत बचा था, जो पकड़ा गया। दोनों कुछ दिन पहले फिर से पंचकूला में वारदात करने आए थे। लेकिन क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गए। सेक्टर-26 क्राइम ब्रांच इंचार्ज इंस्पेक्टर सूरज ने बताया कि रिमांड पर चल रहे दोनों आरोपी अब तक 12 वारदात करने की बात कबूल कर चुके हैं। जांच जारी है। जेन कार के साथ पिस्टल व अन्य हथियार भी बरामद हो चुके हैं।
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सेक्टर-26 क्राइम ब्रांच की अब तक की जांच में पता चला है कि सुखजीत सूट-बूट पहनकर बैंक में जाता था। कंधे पर एक बैग और कान में मोबाइल लगाकर रखता था, लेकिन मोबाइल बंद होता था। बैंक में देखता था कि कौन ज्यादा कैश लेकर निकल रहा है। जैसे ही टारगेट बाहर निकलता, उसकेपीछे गाड़ी लगा लेते और मौका पाकर पिस्टल के दम पर लूट लेता था। कई वारदात में टारगेट पर गोली चलाकर उसे घायल भी किया और एक वारदात में तो पीड़ित की मौत भी हो गई थी।
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Jain gang chief Satpal's son, Panchkula Police, Food Inspector in Punjab
Firing
गैंग के पास एक जेन गाड़ी थी, जिस पर हर वारदात से पहले जाली नंबर प्लेट लगाई जाती थी। जोकि हाउसिंग बोर्ड से 300 रुपये में बगैर आरसी दिखाए बनवाई जाती थी। नंबर सड़क पर चलती किसी भी गाड़ी का ध्यान में रखकर बनवा लेते थे। जांच के दौरान कई बार तो नंबर स्कूटर और ट्रक केभी निकले। सतपाल और उसकेभाई दाढ़ी को रुमाल से बांधकर टोपी पहनकर आते थे।

कांसल में घर पर है कब्जा
सतपाल केभाई तो अमृतसर में रहते थे, लेकिन वह खुद चंडीगढ़ कांसल में रह रहा था, जहां उसने एक मकान पर कब्जा किया हुआ है। वारदात से पहले गैंग के जमा होने का ठिकाना मनीमाजरा का सरकारी अस्पताल था। वारदात के बाद भी गैंग इसी जगह पर वापस आता था और पैसे बांटने के बाद सुखजीत, ईकबाल और हरजीत अमृतसर चले जाते थे, जबकि सतपाल यहीं रहता था। आम दिनों में सतपाल अपना टैक्सी का बिजनेस संभालता था।

ऐसे आए पकड़ में
हर बार वारदात उसकेसाथ हुई, जो बैंक से पैसे लेकर निकला या जमा कराने जा रहा था। वहीं तीन साल से एक संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज पुलिस केपास थी। तब से मुख्य बैंकों केबार अलग-अलग टीमें तैनात रहने लगी। काफी समय से ऐसा चल रहा था, लेकिन सफलता अब जाकर मिली, जब सुखजीत को क्राइम ब्रांच से एएसआई सुरेंद्र, एचसी संजीव और प्रदीप ने दबोच लिया। वह सेक्टर-10 स्थित एक बैंक में अपने पुराने अंदाज में कान को बंद फोन लगाए और कंधे पर खाली बैग लिए घुम रहा था। फुटेज के मुताबिक हुलिया मेल खाता था। सुखजीत केपकड़े जाने केबाद सतपाल भी पकड़ा गया।

अभी तक सुलझी वारदात

Jain gang chief Satpal's son, Panchkula Police, Food Inspector in Punjab
अभी तक सुलझी वारदात
- अप्रैल 2006 में सेक्टर-12 की मार्केट से पिस्टल केदम पर एक व्यक्ति से आठ लाख लूटे
- नवंबर 2007 में एक कार शोरूम के कैशियर पर गोली चलाकर चार लाख 84 हजार लूटे।
- जनवरी 2008 में फिर से एक कार शोरूम के मैनेजर से पांच लाख लूटे, वह बैंक में पैसे जमा कराने जा रहा था।
- मार्च 2008 में सेक्टर-5 में हैफेड केपीछे बाइक सवार से 40 हजार की लूट।
- मई 2008 में सेक्टर-4 में पेट्रोल पंप केपीछे कैशियर से सात लाख की लूट
- अगस्त 2009 में सेक्टर-5 के पेट्रोल पंप से सवा दो लाख रुपये लूटे।
- अक्तूबर 2012 में सेक्टर-5 स्थित विशाल मेगा मार्ट केपास एक कैश लोडिंग कंपनी की गाड़ी से 16 लाख रुपये लूटे।
- इसी साल एक ट्रांसपोर्ट कंपनी केकारिंदे से साढ़े तीन लाख रुपये लूटे।
- मई 2012 में एक स्टील कंपनी केकर्मचारी को गोली मारकर साढ़े चार लाख रुपये लूट लिए थे। वह पैसे बैंक से निकलवाकर लाया था।
- अभी दो महीनें पहले एक इलेक्ट्रोनिक्स कंपनी केकर्मचारी से ढाई लाख रुपये लूटे, वी भी बैंक से पैसे लेकर आया था।
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