मंथली क्यों देते हैं लोग? पढ़ें चौंकाने वाला खुलासा
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दो दिन के रिमांड के बाद आज सीबीआई ने मंथली लेने के आरोप में पकड़े गए तीनों कर्मियों को अदालत में पेश किया। जहां से उन्हें 14 दिन के ज्यूडिशियल रिमांड पर भेज दिया गया।
सीबीआई ने राजेश शुक्ला,हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज के वायस सैंपल जांच के लिए ले लिए है। पार्किंग ठेकेदार से मंथली लेने के आरोप में दो पुलिस कर्मियों के साथ पकड़े गए सेक्टर-34 थाने के पूर्व प्रभारी राजेश शुक्ला के आठ अलग-अलग बैंक खातों में 34 लाख रुपये जमा हैं।
सीबीआई ने शुक्रवार को इन सभी खातों को सील करवा दिया। नगद बरामद किए हैं। सीबीआई के एसपी तरुण गाबा ने बताया की सीबीआई की टीमों ने शुक्रवार को अलग-अलग बैंकों में स्थित शुक्ला के सभी खातों की जानकारी ली और इन्हें सील करवा दिया।
इस मामले में बुधवार को शुक्ला के अलावा हेडकांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज को सीबीआई ने ट्रैप लगाकर गिरफ्तार किया था।
बिना मंथली लिए ठेकेदारों का काम नहीं चलता
पार्किंग ठेकेदार से मंथली लेने के आरोप में पकड़े गए पुलिसवालों ने पूछताछ में काफी चौंकाने वाले खुलासे किए। सूत्रों का कहना है कि बिना मंथली दिए पार्किंग ठेकेदारों का काम नहीं चल सकता। मंथली के बदले में पुलिस उन्हें कई मामलों में फेवर देती है। अतिरिक्त वसूली को लेकर कई बार पार्किंग में वाहन चालक और कारिंद उलझ जाते हैं।
ऐसे में पुलिस ही फेवर कर मामला निपटाती है। इतना ही नहीं पार्किंग से गाड़ी चोरी होने पर या गाड़ी में तोड़फोड़ और सामान चोरी होने पर भी मदद की जाती है। इन मामलों में नियम है कि मामला पार्किंग ठेकेदार पर दर्ज हो।
पांच हजार है रेट
सूत्रों के अनुसार शहर के सभी इलाकों में पार्किंग ठेकेदारों से पांच हजार रुपये का मंथली रेट तय हैं। ज्यादातर को यह देना ही पड़ता है। इतना ही नहीं कई शराब ठेकेदार भी मंथली देते हैं।
अब दे रहे है दूर रहने की सलाह
सभी थाना प्रभारियों में खलबली मची हुई है। आला अधिकारियों को सभी थाना, चौकी प्रभारी और उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को रिश्वत की राशि से दूर रहने के लिए कहा जा रहा है। कई थाना प्रभारियों ने तो अपने अधीन कर्मचारियों के साथ इस संबंध में बैठक भी की है।
एक इंस्पेक्टर ने कहा वह नहीं रहना चाहता था थाना प्रभारी
राजेश शुक्ला के सीबीआई द्वारा पकड़े जाने के बाद एक थाना प्रभारी ने पुलिस विभाग के अपने आला अधिकारियों को कहा है कि उसका तबादला कर दिया जाए। इस इंस्पेक्टर ने कहा है कि अब वह थाना प्रभारी नहीं रहना चाहता है उसे पद से हटा दिया जाए।
सीनियोरिटी लिस्ट में दूसरे नाम पर
निलंबित इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला का नाम सीनियोरिटी लिस्ट में दूसरे नाम पर है। शुक्ला का अब डीएसपी बनना मुश्किल है क्योंकि शुक्ला का रिटायरमेट होने का कार्यकाल ही दो साल का बचा है और तब तक केस के समाप्त होने की संभावना कम ही है।
नहीं हुई जांच पूरी
जुलाई माह में डीएसपी पर लग चुका है आरोप
जुलाई माह में इंस्पेक्टर यशपाल डीएसपी अंजिता चेपियाल पर रिश्वतखोरी का आरोप लगा चुके है। इंस्पेक्टर यशपाल ने औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाना प्रभारी रहते हुए आईजी को वाटसएप्प पर इसकी शिकायत की थी जिसकी आईजी एसपी परमिंदर सिंह को जांच सौंपी थी लेकिन अभी तक इसकी जांच पूरी नहीं हुई है।
जबकि 17 जुलाई ट्रैफिक हेड कांस्टेबल दलबीर सिंह को पीजीआई चौक पर 1500 रुपये की रिश्वत लेते दबोचा गया था। इस मामले में जिला अदालत में दलबीर सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। मालूम हो कि पिछले 5 माह में सीबीआई भष्ट्राचार के 10 मामले दर्ज कर चुकी है।