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आशा वर्कर और शिशु की मौत, परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा
Updated Sat, 29 Sep 2018 02:04 AM IST
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गर्भवती महिला की बच्चे संग मौत, परिजनों ने किया जाम
पंचकूला के सेक्टर-6 अस्पताल में भर्ती थी महिला, हालात बिगड़ने के बाद पीजीआई को किया था रेफर
पीएमओ बोलीं-मामला गंभीर, जांच के आदेश जारी
- प्लेसेंटा फटने से जच्चा-बच्चा की हुई मौत
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। एक आशा वर्कर और उसके अजन्में शिशु की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए सेक्टर-17/18 के चौक में शव रखकर जाम लगा दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस फोर्स पहुंची, और लोगों को समझा-बुझाकर चौक से हटाया। इसके बाद परिजनों और आशा वर्करों ने सेक्टर-6 अस्पताल के इमरजेंसी गेट के सामने शव रखकर बवाल काटा। हालांकि पुलिस और अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह अस्पताल स्टाफ पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। मृतक आशा वर्कर की पहचान राजीव कालोनी निवासी शीला (34) के रूप में हुई है। मृतका के पहले से दो बच्चियां हैं। परिजनों ने बताया कि महिला डिलीवरी के लिए सेक्टर-6 अस्पताल में वीरवार को भर्ती करवाया गया था। डॉक्टरों ने पूरा दिन और रात तक महिला को अस्पताल में भर्ती रखा और सुबह साढ़े 3 बजे उसकी हालत बिगड़ने लगी। अस्पताल स्टाफ ने देखा कि महिला की ब्लीडिंग शुरू हो गई। इसके बाद वह आनन-फानन में शीला को ऑपरेशन थियेटर में ले गए। स्थिति काबू से बाहर होने पर डॉक्टरों ने उसे पीजीआई रेफर कर दिया। शीला को सुबह 4 बजे उसका जेठ राजेश और जेठानी ज्योति पीजीआई लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने शीला का इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने बताया कि शीला के गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो चुकी है। उन्होंने ऑपरेशन के लिए सामान मंगवाया, लेकिन कुछ देर बाद महिला ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया। जिसके बाद वह शव को राजीव कालोनी ले आए। शुक्रवार दोपहर साढ़े 12 बजे परिजन शव लेकर अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने राजीव कालोनी से लेकर नागरिक अस्पताल तक पैदल मार्च निकालते हुए रोष जताया। करीब 2 घंटे हंगामा करने के बाद आश्वासन मिलने पर परिजनों का गुस्सा शांत हुआ।
डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
परिजनों का आरोप है कि सेक्टर-6 अस्पताल के डॉक्टरों ने सही ढंग से ट्रीटमेंट नहीं किया और बिना वजह ऊपर नीचे घुमाते रहे, जिससे सही समय पर इलाज न मिलने के कारण शीला और गर्भ में पल रहे उसके बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर जानबूझ कर डिलीवरी में देरी करने का आरोप लगाया है। परिजनों का आक्रोश देखते हुए अस्पताल में पुलिस तैनात करनी पड़ी। सभी थाना प्रभारी अस्पताल में पहुंच गए। इस संबंध में परिजनों की शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक जांच कमेटी गाइनोकॉलजिस्ट की अगुवाई में बना दी गई है।
शीला को वीरवार रात 9 बजे करवाया था भर्ती: राकेश
मृतक महिला के पति राकेश ने बताया कि वीरवार रात 9 बजे शीला को अस्पताल में लेकर आया था। इसके बाद डॉक्टरों ने टेस्ट करते हुए सुबह के 4 बजा दिए। महिला के पति का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ उसे कभी नीचे तो कभी ऊपर दौड़ाता रहा। राकेश का आरोप है कि डॉक्टरों ने सही ढंग से उसकी पत्नी का ट्रीटमेंट नहीं किया और जब डॉक्टरों के हाथ में कुछ न रहा तो उन्होंने शीला को पीजीआई रेफर कर दिया।
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बच्चियों को नहीं मालूम मां मर गई है
शीला की पहले ही दो बेटियां हैं, जिन्हें नहीं मालूम है कि उनकी मां के साथ क्या हुआ है। उनकी आंखें तो अभी भी मां को ही तलाश रही हैं। उन्हें क्या मालूम की वह अपनी मां को कभी नहीं देख पाएंगे।
जांच के लिए टीम गठित : पीएमओ
पीएमओ डॉ मनकिरत कौर ने बताया कि गाइनी विभाग की प्रमुख गाइनोकॉलजिस्ट की अगुवाई में कमेटी बना दी गई है, जिसमें चार अधिकारी शामिल हैं। जो सभी पक्षों की सुनवाई के बाद अपनी रिपोर्ट देंगे। उन्होंने बताया कि महिला की रात को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसे रेफर किया गया था, लेकिन पीजीआई में गर्भ में पल रहे बच्चे एवं महिला की मौत हो गई। रिपोर्ट के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
चार डॉक्टरों का पैनल करेगा पोस्टमार्टम
मृतक महिला के शव के पोस्टमार्टम के लिए चार डॉक्टरों का एक पैनल बनाया गया है। इसके अलावा पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी भी करवाई जाएगी। वीडियो और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी पुलिस अधिकारियों को भी सौंपी जाएगा।
प्लेसेंटा के फटने से शीला की हुई मौत: पीएमओ
सेक्टर-6 स्थित सामान्य अस्पताल की पीएमओ डॉक्टर मनकिरत कौर ने बताया कि शीला की मौत प्लेसेंटा के फटने से हुई है। क्योंकि प्लेसेंटा के फटने से खून ज्यादा बहता है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों को खतरा होता है।
क्या है प्लेसेंटा प्रोविया
प्लेसेंटा महिला के गर्भाश्य में स्थित वह स्थिति है, जिसे भ्रूण की पोषक थैली (प्लेसेंटा या खेड़ी) कहते हैं, जिसका एक सिरा गर्भनली से जुड़ा होता है और दूसरा बच्चे की नाभि से जुड़ा होता है। मां जो भी आहार ग्रहण करती है वह पाचक और पोषक रसों के रूप में इसी प्लेसेंटा में एकत्र होता है। कुल मिलाकर प्लेसेंटा एक ऐसी जीवनदायिनी थैली होती है, जो प्रत्येक प्रकार से शिशु की रक्षा करती है उसे पोषण प्रदान करती है। सामान्य परिस्थितियों में प्लेसेंटा गर्भाश्य की दीवार पर चिपकी होती है।
शिशु की हरकत से आ जाती है ऊपर
कभी-कभी बच्चे की हरकतों से खेड़ी खिसक कर ऊपर भी आ सकती है किंतु तीसरी स्थिति में बच्चे के बढ़ते वजन के साथ गर्भवती स्त्री को रक्त स्त्राव हो सकता है।
बेड रेस्ट की डॉक्टर देते हैं सलाह
इसके बचाव के लिए गर्भवती स्त्री को बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। इसका पता आमतौर पर छठे माह में चलता है। क्योंकि शिशु का वजन और हरकत बढ़ने लगती है। प्लेसेंटा प्रोविया की कमी के मुख्य कारण महिला की उम्र 35 वर्ष से अधिक होने पर होती है।
प्लेसेंटा प्रिविया में क्या न करें
मां को पूरी तरह से आराम करने की आवश्यकता होती है। सीढ़ी चढ़ना, वजन उठाना, लंबा सफर करना, झुक कर कार्य करना, व्यायाम, तैराकी करना एकदम मना होता है। अधिक आयरन युक्त भोजन की जरूरत होती है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सिजेरियन किया जा सके।
पंचकूला के सेक्टर-6 अस्पताल में भर्ती थी महिला, हालात बिगड़ने के बाद पीजीआई को किया था रेफर
पीएमओ बोलीं-मामला गंभीर, जांच के आदेश जारी
- प्लेसेंटा फटने से जच्चा-बच्चा की हुई मौत
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। एक आशा वर्कर और उसके अजन्में शिशु की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए सेक्टर-17/18 के चौक में शव रखकर जाम लगा दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर भारी पुलिस फोर्स पहुंची, और लोगों को समझा-बुझाकर चौक से हटाया। इसके बाद परिजनों और आशा वर्करों ने सेक्टर-6 अस्पताल के इमरजेंसी गेट के सामने शव रखकर बवाल काटा। हालांकि पुलिस और अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह अस्पताल स्टाफ पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। मृतक आशा वर्कर की पहचान राजीव कालोनी निवासी शीला (34) के रूप में हुई है। मृतका के पहले से दो बच्चियां हैं। परिजनों ने बताया कि महिला डिलीवरी के लिए सेक्टर-6 अस्पताल में वीरवार को भर्ती करवाया गया था। डॉक्टरों ने पूरा दिन और रात तक महिला को अस्पताल में भर्ती रखा और सुबह साढ़े 3 बजे उसकी हालत बिगड़ने लगी। अस्पताल स्टाफ ने देखा कि महिला की ब्लीडिंग शुरू हो गई। इसके बाद वह आनन-फानन में शीला को ऑपरेशन थियेटर में ले गए। स्थिति काबू से बाहर होने पर डॉक्टरों ने उसे पीजीआई रेफर कर दिया। शीला को सुबह 4 बजे उसका जेठ राजेश और जेठानी ज्योति पीजीआई लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने शीला का इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने बताया कि शीला के गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो चुकी है। उन्होंने ऑपरेशन के लिए सामान मंगवाया, लेकिन कुछ देर बाद महिला ने भी दम तोड़ दिया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया। जिसके बाद वह शव को राजीव कालोनी ले आए। शुक्रवार दोपहर साढ़े 12 बजे परिजन शव लेकर अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने राजीव कालोनी से लेकर नागरिक अस्पताल तक पैदल मार्च निकालते हुए रोष जताया। करीब 2 घंटे हंगामा करने के बाद आश्वासन मिलने पर परिजनों का गुस्सा शांत हुआ।
डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप
परिजनों का आरोप है कि सेक्टर-6 अस्पताल के डॉक्टरों ने सही ढंग से ट्रीटमेंट नहीं किया और बिना वजह ऊपर नीचे घुमाते रहे, जिससे सही समय पर इलाज न मिलने के कारण शीला और गर्भ में पल रहे उसके बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर जानबूझ कर डिलीवरी में देरी करने का आरोप लगाया है। परिजनों का आक्रोश देखते हुए अस्पताल में पुलिस तैनात करनी पड़ी। सभी थाना प्रभारी अस्पताल में पहुंच गए। इस संबंध में परिजनों की शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक जांच कमेटी गाइनोकॉलजिस्ट की अगुवाई में बना दी गई है।
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शीला को वीरवार रात 9 बजे करवाया था भर्ती: राकेश
मृतक महिला के पति राकेश ने बताया कि वीरवार रात 9 बजे शीला को अस्पताल में लेकर आया था। इसके बाद डॉक्टरों ने टेस्ट करते हुए सुबह के 4 बजा दिए। महिला के पति का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ उसे कभी नीचे तो कभी ऊपर दौड़ाता रहा। राकेश का आरोप है कि डॉक्टरों ने सही ढंग से उसकी पत्नी का ट्रीटमेंट नहीं किया और जब डॉक्टरों के हाथ में कुछ न रहा तो उन्होंने शीला को पीजीआई रेफर कर दिया।
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बच्चियों को नहीं मालूम मां मर गई है
शीला की पहले ही दो बेटियां हैं, जिन्हें नहीं मालूम है कि उनकी मां के साथ क्या हुआ है। उनकी आंखें तो अभी भी मां को ही तलाश रही हैं। उन्हें क्या मालूम की वह अपनी मां को कभी नहीं देख पाएंगे।
जांच के लिए टीम गठित : पीएमओ
पीएमओ डॉ मनकिरत कौर ने बताया कि गाइनी विभाग की प्रमुख गाइनोकॉलजिस्ट की अगुवाई में कमेटी बना दी गई है, जिसमें चार अधिकारी शामिल हैं। जो सभी पक्षों की सुनवाई के बाद अपनी रिपोर्ट देंगे। उन्होंने बताया कि महिला की रात को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसे रेफर किया गया था, लेकिन पीजीआई में गर्भ में पल रहे बच्चे एवं महिला की मौत हो गई। रिपोर्ट के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
चार डॉक्टरों का पैनल करेगा पोस्टमार्टम
मृतक महिला के शव के पोस्टमार्टम के लिए चार डॉक्टरों का एक पैनल बनाया गया है। इसके अलावा पोस्टमार्टम के दौरान वीडियोग्राफी भी करवाई जाएगी। वीडियो और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी पुलिस अधिकारियों को भी सौंपी जाएगा।
प्लेसेंटा के फटने से शीला की हुई मौत: पीएमओ
सेक्टर-6 स्थित सामान्य अस्पताल की पीएमओ डॉक्टर मनकिरत कौर ने बताया कि शीला की मौत प्लेसेंटा के फटने से हुई है। क्योंकि प्लेसेंटा के फटने से खून ज्यादा बहता है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों को खतरा होता है।
क्या है प्लेसेंटा प्रोविया
प्लेसेंटा महिला के गर्भाश्य में स्थित वह स्थिति है, जिसे भ्रूण की पोषक थैली (प्लेसेंटा या खेड़ी) कहते हैं, जिसका एक सिरा गर्भनली से जुड़ा होता है और दूसरा बच्चे की नाभि से जुड़ा होता है। मां जो भी आहार ग्रहण करती है वह पाचक और पोषक रसों के रूप में इसी प्लेसेंटा में एकत्र होता है। कुल मिलाकर प्लेसेंटा एक ऐसी जीवनदायिनी थैली होती है, जो प्रत्येक प्रकार से शिशु की रक्षा करती है उसे पोषण प्रदान करती है। सामान्य परिस्थितियों में प्लेसेंटा गर्भाश्य की दीवार पर चिपकी होती है।
शिशु की हरकत से आ जाती है ऊपर
कभी-कभी बच्चे की हरकतों से खेड़ी खिसक कर ऊपर भी आ सकती है किंतु तीसरी स्थिति में बच्चे के बढ़ते वजन के साथ गर्भवती स्त्री को रक्त स्त्राव हो सकता है।
बेड रेस्ट की डॉक्टर देते हैं सलाह
इसके बचाव के लिए गर्भवती स्त्री को बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। इसका पता आमतौर पर छठे माह में चलता है। क्योंकि शिशु का वजन और हरकत बढ़ने लगती है। प्लेसेंटा प्रोविया की कमी के मुख्य कारण महिला की उम्र 35 वर्ष से अधिक होने पर होती है।
प्लेसेंटा प्रिविया में क्या न करें
मां को पूरी तरह से आराम करने की आवश्यकता होती है। सीढ़ी चढ़ना, वजन उठाना, लंबा सफर करना, झुक कर कार्य करना, व्यायाम, तैराकी करना एकदम मना होता है। अधिक आयरन युक्त भोजन की जरूरत होती है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सिजेरियन किया जा सके।