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हरियाणाः भीड़ बनी आफत और अब बैंकर्स को सताने लगा है संक्रमण का खतरा, विशेष निर्देश जारी
Tue, 14 Apr 2020 11:15 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 14 Apr 2020 11:15 AM IST
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फाइल फोटो
अपनी पेंशन, सरकारी मदद राशि चेक करने, निकलवाने और अन्य कामों के लिए बैंकों के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी है, जिससे बैंकर्स को संक्रमण फैलने का खतरा सताने लगा है। क्योंकि बैंक परिसर और बाहर सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल को मेंटेन करना मुश्किल बना हुआ। ऐसे में बैंकर्स को जहां खुद के संक्रमित होने का खतरा सता रहा है। भीड़ भी आफत बनी हुई है। इसी को लेकर कहीं जगह स्थानीय पुलिस प्रशासन भी संबंधित बैंकर्स पर भी दबाव बना रहा है।
उधर, मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी इस बात का अहसास है कि लॉकडाउन में अपने कामों को लेकर बैंक में भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए उन्होंने भी बैंक को दिशानिर्देश जारी किए हैं। उनके अनुसार प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत हर लाभार्थी महिलाओं के खाते में 500-500 रुपये तथा प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के 2000 रुपये की किस्त भी लाभार्थी किसानों के खाते में डाल दी गई है। अब लोग बैंकों में राशि निकालने के लिए आएंगे।
इसलिए बैंकर्स से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसी व्यवस्था करें कि उपभोक्ताओं को एसएमएस तथा उनके टोकन की जानकारी बैंक में आने से पूर्व दी जाए ताकि वे बैंकों में कम से कम समय रहें और सोशल डिस्टेसिंग भी बनी रहे तथा अपना काम भी कर जाएं।
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बैंकों को तीन चरण की योजना बनाने के निर्देश
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने बताया कि बैंकों में अधिक भीड़ न हो, इससे बचने के लिए, बैंकों को तीन चरण की योजना बनाने के लिए कहा गया है, जिसमें एक तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। जिसके तहत एक स्वयंसेवक या एक बैंक प्रतिनिधि बैंक के बाहर तैनात किया जाएगा। यह कूपन आधे-आधे घंटे के स्लॉट में होंगे। ताकि लोग अपने समय के अनुसार बैंक में आए।
उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों को एक तंत्र विकसित करने के लिए भी कहा गया है, जिसके द्वारा लोगों को एसएमएस के जरिये बैंकों में आने की अपॉइंटमेंट तय की जाए। ताकि जिन लोगों को अपांइटमेंट मिलेगी, वे ही बैंक में आएंगे। इसके साथ ही, बैंकों में आए लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाना सुनिश्चित किया जाए।
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उधर, मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी इस बात का अहसास है कि लॉकडाउन में अपने कामों को लेकर बैंक में भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए उन्होंने भी बैंक को दिशानिर्देश जारी किए हैं। उनके अनुसार प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत हर लाभार्थी महिलाओं के खाते में 500-500 रुपये तथा प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के 2000 रुपये की किस्त भी लाभार्थी किसानों के खाते में डाल दी गई है। अब लोग बैंकों में राशि निकालने के लिए आएंगे।
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इसलिए बैंकर्स से अनुरोध किया गया है कि वे ऐसी व्यवस्था करें कि उपभोक्ताओं को एसएमएस तथा उनके टोकन की जानकारी बैंक में आने से पूर्व दी जाए ताकि वे बैंकों में कम से कम समय रहें और सोशल डिस्टेसिंग भी बनी रहे तथा अपना काम भी कर जाएं।
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बैंकों को तीन चरण की योजना बनाने के निर्देश
वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने बताया कि बैंकों में अधिक भीड़ न हो, इससे बचने के लिए, बैंकों को तीन चरण की योजना बनाने के लिए कहा गया है, जिसमें एक तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। जिसके तहत एक स्वयंसेवक या एक बैंक प्रतिनिधि बैंक के बाहर तैनात किया जाएगा। यह कूपन आधे-आधे घंटे के स्लॉट में होंगे। ताकि लोग अपने समय के अनुसार बैंक में आए।
उन्होंने बताया कि बैंक अधिकारियों को एक तंत्र विकसित करने के लिए भी कहा गया है, जिसके द्वारा लोगों को एसएमएस के जरिये बैंकों में आने की अपॉइंटमेंट तय की जाए। ताकि जिन लोगों को अपांइटमेंट मिलेगी, वे ही बैंक में आएंगे। इसके साथ ही, बैंकों में आए लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाना सुनिश्चित किया जाए।
बैंकों में इसलिए भी बढ़ रही भीड़
- अधिकतर बैंकों ने लेनदेन की सूचना देने संबंधी अपना एसएमएस सिस्टम बंद कर दिया है। लोगों को पता नहीं चल पाता उनके खाते में पेंशन व सरकारी मदद पहुंच गई है या नहीं।
- बैंक ग्राहकों के लिए समय का अब कम कर 10 से 2 बजे तक कर दिया गया है। इसलिए भी भीड़ जुटती है।
- बड़ी संख्या में राज्य सरकार के पेंशन लाभार्थी ऐसे भी हैं। जिन्हें बैंकों ने एटीएम कार्ड सुविधा ही नहीं दी है। इसलिए वे अपनी पेंशन एटीएम से निकलवाने की बजाय बैंकों में आते हैं।
- बैंकों ने पासबुक अपडेशन बंद कर रखी है, इसलिए भी बैंक उपभोक्ता परेशान भटक रहे हैं।
बैंकर्स नहीं चाहते पुलिस का अनावश्यक दबाव
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव जीएस ओबरॉय ने बताया कि इस वक्त बैंकर्स भी कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को भी पत्र भेजकर बैंकर्स की समस्या से अवगत करवाया है। उनके अनुसार बैंकर्स भी भली प्रकार जानते हैं कि लोगों को मदद राशि और पेंशन की सख्त जरूरत है। बैंकर्स भी संकट की घड़ी में एक वित्तीय सैनिक के रूप में ड्यूटी से कभी पीछे नहीं हटे।
बैंकों में जुटने वाली भीड़ के लिए पुलिस अथॉरिटी की मदद की सख्त जरूरत है। ओबरॉय के अनुसार कई जगह पुलिस बैंक प्रबंधन पर बैंक परिसर के बाहर भी सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल मेंटेन करने का अनावश्यक दबाव बना रही है। जबकि बैंकर्स अपने स्तर पर हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। इसके अलावा बैंक कर्मचारी और अफसर अपने निजी वाहनों से बैंक ड्यूटी के लिए बैंकों तक जाते हैं। पुलिस कई जगह उन्हें रोककर अनावश्यक तंग करती है।
विभिन्न राज्य में तो बैंक प्रबंधन के खिलाफ केस भी दर्ज किए गए हैं। बैंकों के बाहर तो कम से कम सोशल डिस्टेंसिंग की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को उठानी चाहिए। ओबरॉय के अनुसार सरकार को चाहिए कि सभी बैंक कर्मचारियों और अफसरों को सुरक्षा किट भी प्रदान करें। ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। हर बैंक शाखा को दिन में कम से कम दो बार सैनिटाइज किया जाए।
- बैंक ग्राहकों के लिए समय का अब कम कर 10 से 2 बजे तक कर दिया गया है। इसलिए भी भीड़ जुटती है।
- बड़ी संख्या में राज्य सरकार के पेंशन लाभार्थी ऐसे भी हैं। जिन्हें बैंकों ने एटीएम कार्ड सुविधा ही नहीं दी है। इसलिए वे अपनी पेंशन एटीएम से निकलवाने की बजाय बैंकों में आते हैं।
- बैंकों ने पासबुक अपडेशन बंद कर रखी है, इसलिए भी बैंक उपभोक्ता परेशान भटक रहे हैं।
बैंकर्स नहीं चाहते पुलिस का अनावश्यक दबाव
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव जीएस ओबरॉय ने बताया कि इस वक्त बैंकर्स भी कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को भी पत्र भेजकर बैंकर्स की समस्या से अवगत करवाया है। उनके अनुसार बैंकर्स भी भली प्रकार जानते हैं कि लोगों को मदद राशि और पेंशन की सख्त जरूरत है। बैंकर्स भी संकट की घड़ी में एक वित्तीय सैनिक के रूप में ड्यूटी से कभी पीछे नहीं हटे।
बैंकों में जुटने वाली भीड़ के लिए पुलिस अथॉरिटी की मदद की सख्त जरूरत है। ओबरॉय के अनुसार कई जगह पुलिस बैंक प्रबंधन पर बैंक परिसर के बाहर भी सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल मेंटेन करने का अनावश्यक दबाव बना रही है। जबकि बैंकर्स अपने स्तर पर हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। इसके अलावा बैंक कर्मचारी और अफसर अपने निजी वाहनों से बैंक ड्यूटी के लिए बैंकों तक जाते हैं। पुलिस कई जगह उन्हें रोककर अनावश्यक तंग करती है।
विभिन्न राज्य में तो बैंक प्रबंधन के खिलाफ केस भी दर्ज किए गए हैं। बैंकों के बाहर तो कम से कम सोशल डिस्टेंसिंग की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को उठानी चाहिए। ओबरॉय के अनुसार सरकार को चाहिए कि सभी बैंक कर्मचारियों और अफसरों को सुरक्षा किट भी प्रदान करें। ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। हर बैंक शाखा को दिन में कम से कम दो बार सैनिटाइज किया जाए।