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तुगलकी फरमानः लोगों के लिए नई मुसीबत, चंडीगढ़ के थानों में मोबाइल ले जाने पर लगा बैन
Mon, 18 Feb 2019 04:38 PM IST
खुशबू गोयल
अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 18 Feb 2019 04:38 PM IST
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चंडीगढ़ पुलिस ने एक तुगलकी फरमान जारी किया है, जो लोगों के लिए मुसीबत है। दरअसल, थानों के अंदर मोबाइल ले जाने पर बैन लगा दिया गया है। हाल ही में पुलिस स्टेशनों में सीबीआई छापेमारी के बाद से पुलिस ने ऐसा सिस्टम लागू किया है। पुलिस खुद को सुरक्षित रखने के लिए आम लोगों को थानों के अंदर मोबाइल ले जाने से पूरी तरह रोक लगा दी है। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल यह फैसला अभी मौखिक रूप से लिया गया है। इसमें कागजी तौर पर अभी कोई कोई आर्डर नहीं जारी किया गया है।
सिस्टम को सेक्टर-17, 26 मौलीजागरां समेत अन्य कई थानों में लागू किया गया है। पुलिस विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि इसे सिर्फ सिक्योरिटी के लिहाज से शुरू किया गया है। अब सवाल यह है कि आखिर पुलिस विभाग ने इसे सीबीआई की रेड के बाद से क्यों शुरू किया है। इससे पहले थानों के अंदर किसी से मिलने के लिए थानों के गेट पर तैनात पुलिसकर्मी रजिस्टर पर आपका नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर नोट करने के साथ-साथ हस्ताक्षर करवाकर विजिटर को अंदर भेज दिया करते थे। अब नया सिस्टम लागू होने से विजिटर को मोबाइल जमा होने पर अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। ऐसे में अगर कोई मोबाइल नहीं जमा करवाता तो उसे थानों के अंदर जाने से रोक दिया जा रहा है।
शहर में महिला स्टेशन समेत 17 थाने
शहर में अलग अलग सेक्टरों में महिला पुलिस स्टेशन समेत कुल 17 थाने हैं। इनमें ईस्ट डिविजन में 6, साउथ में 6 और सेंट्रल में 4 थाने लगते है।
शिकायतकर्ता ने कर ली थी रिकार्डिंग
हाल ही में सीबीआई ने मौलीजागरां थाना इंस्पेक्टर बलजीत और सेक्टर-31 थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर राजवीर सिंह समेत अन्य को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। इसमें शिकायतकर्ता ने ऑडियो वीडियो की रिकार्डिंग कर ली थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है इस वजह से सिस्टम लागू किया गया हो।
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ऐसा नहीं होना चाहिए
अगर इस तरीके से पब्लिक से व्यवहार किया जा है तो वह गलत है। आप किसी को थाने के अंदर मोबाइल ले जाने से नहीं रोक सकते। पुलिस स्टेशन लोग मदद के लिए आते हैं। हर किसी को कुछ न कुछ काम जरूरी होता है जिसके लिए वह अपना मोबाइल पास रखता है। अगर हम कोर्ट में जाते हैं तो मोबाइल को साइलेंट करवा दिया जाता है न कि उसे जमा करते हैं।
- जगबीर सिंह, पूर्व डीएसपी
कोर्ट मे मोबाइल जा सकता है तो थाने में क्यों नहीं?
पुलिस स्टेशन में पब्लिक डीलिंग होती है। कोर्ट में मोबाइल लेकर जाया जा सकता है तो थानों में ले जाने से क्यों रोका जा रहा है। हाल ही में सीबीआई ने इंस्पेक्टर को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। ऐसे में अब क्या समझा जाए कि पुलिस थानों में मोबाइल लेे जाने से रोक लगा रही है।
- गगन अग्रवाल, एडवोकेट, जनरल सेक्रेटरी, लायर्स फॉर ह्यूमन राइट
इतनी पाबंदी ठीक नहीं
पुलिस थानों में इतनी पाबंदी ठीक नहीं है। अगर थाने में किसी तरह दिक्कत आ रही है तो पुलिसकर्मियों को चाहिए कि विजिटर का मोबाइल साइलेंट करवा दे जिससे किसी को परेशानी भी न हो। मेरे ख्याल से ऐसा नहीं होना चाहिए। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
- सुभाष चावला, पूर्व मेयर, चंडीगढ़।
विभाग ने अभी ऐसा कोई आर्डर नहीं जारी किया है कि कोई विजिटर थाने के अंदर जाने से पहले मोबाइल को जमा कराए। हाल में शहर में आतंकी होने की सूचना पर थाने लेवल पर सुरक्षा के लिहाज से विजिटरों का मोबाइल जमा किया जाता है।
- रश्मि यादव, डीएसपी, पीआरओ
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सिस्टम को सेक्टर-17, 26 मौलीजागरां समेत अन्य कई थानों में लागू किया गया है। पुलिस विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि इसे सिर्फ सिक्योरिटी के लिहाज से शुरू किया गया है। अब सवाल यह है कि आखिर पुलिस विभाग ने इसे सीबीआई की रेड के बाद से क्यों शुरू किया है। इससे पहले थानों के अंदर किसी से मिलने के लिए थानों के गेट पर तैनात पुलिसकर्मी रजिस्टर पर आपका नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर नोट करने के साथ-साथ हस्ताक्षर करवाकर विजिटर को अंदर भेज दिया करते थे। अब नया सिस्टम लागू होने से विजिटर को मोबाइल जमा होने पर अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। ऐसे में अगर कोई मोबाइल नहीं जमा करवाता तो उसे थानों के अंदर जाने से रोक दिया जा रहा है।
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शहर में महिला स्टेशन समेत 17 थाने
शहर में अलग अलग सेक्टरों में महिला पुलिस स्टेशन समेत कुल 17 थाने हैं। इनमें ईस्ट डिविजन में 6, साउथ में 6 और सेंट्रल में 4 थाने लगते है।
शिकायतकर्ता ने कर ली थी रिकार्डिंग
हाल ही में सीबीआई ने मौलीजागरां थाना इंस्पेक्टर बलजीत और सेक्टर-31 थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर राजवीर सिंह समेत अन्य को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। इसमें शिकायतकर्ता ने ऑडियो वीडियो की रिकार्डिंग कर ली थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है इस वजह से सिस्टम लागू किया गया हो।
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ऐसा नहीं होना चाहिए
अगर इस तरीके से पब्लिक से व्यवहार किया जा है तो वह गलत है। आप किसी को थाने के अंदर मोबाइल ले जाने से नहीं रोक सकते। पुलिस स्टेशन लोग मदद के लिए आते हैं। हर किसी को कुछ न कुछ काम जरूरी होता है जिसके लिए वह अपना मोबाइल पास रखता है। अगर हम कोर्ट में जाते हैं तो मोबाइल को साइलेंट करवा दिया जाता है न कि उसे जमा करते हैं।
- जगबीर सिंह, पूर्व डीएसपी
कोर्ट मे मोबाइल जा सकता है तो थाने में क्यों नहीं?
पुलिस स्टेशन में पब्लिक डीलिंग होती है। कोर्ट में मोबाइल लेकर जाया जा सकता है तो थानों में ले जाने से क्यों रोका जा रहा है। हाल ही में सीबीआई ने इंस्पेक्टर को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। ऐसे में अब क्या समझा जाए कि पुलिस थानों में मोबाइल लेे जाने से रोक लगा रही है।
- गगन अग्रवाल, एडवोकेट, जनरल सेक्रेटरी, लायर्स फॉर ह्यूमन राइट
इतनी पाबंदी ठीक नहीं
पुलिस थानों में इतनी पाबंदी ठीक नहीं है। अगर थाने में किसी तरह दिक्कत आ रही है तो पुलिसकर्मियों को चाहिए कि विजिटर का मोबाइल साइलेंट करवा दे जिससे किसी को परेशानी भी न हो। मेरे ख्याल से ऐसा नहीं होना चाहिए। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
- सुभाष चावला, पूर्व मेयर, चंडीगढ़।
विभाग ने अभी ऐसा कोई आर्डर नहीं जारी किया है कि कोई विजिटर थाने के अंदर जाने से पहले मोबाइल को जमा कराए। हाल में शहर में आतंकी होने की सूचना पर थाने लेवल पर सुरक्षा के लिहाज से विजिटरों का मोबाइल जमा किया जाता है।
- रश्मि यादव, डीएसपी, पीआरओ