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Chandigarh News: रक्षा क्षेत्र मेें भारतीय तकनीक को बढ़ावा देने पर मंथन
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चंडीगढ़। रक्षा क्षेत्र में भारतीय तकनीक और एमएसएमई के लिए अवसरों को बढ़ावा देने को सीआईआई चंडीगढ़ में मंथन किया गया। डीआरडीओ, टीबीआरएल, बेस रिपेयर डिपो- वायु सेना और मुख्यालय उत्तरी कमान के सहयोग से प्रतिनिधियों ने चर्चा की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र मेें भारतीय तकनीक को अधिक से अधिक महत्व देना और विदेशों पर निर्भरता को कम करना था। इस दौरान प्रदर्शनी में भारतीय सेना ने छह तरह के उपकरण लगाए, जिसमें 18 पार्ट प्रदर्शित किए गए थे। ये सभी विदेशी उपकरण थे। जो अलग-अलग देशों की ओर से बनाए गए थे। उपकरण में टैंक, मिसाइलें, रिकवरी व्हीकल शामिल थे। ये सामान्य उपकरण थे, जो विदेशों से मंगाए जाते हैं। इन उपकरणों को भारत में भी बनाया जा सकता है। इस मकसद से सेना की ओर से सैन्य उपकरणों को प्रदर्शित किया गया था।
इसरो के पूर्व वैैज्ञानिक एचएस जटाना ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में उत्पादन के लिए भारत काफी काम कर सकता है। पुराने हथियारों को दोबारा बनाया जा सकता है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल नव के खंडूरी ने कहा कि राष्ट्र के भीतर क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रतिकूलता और क्षमताएं हमारे बीच मौजूद अंतराल हैं। उत्तरी सीमाओं पर जिस तरह का विकास हो रहा है, उसे देखते हुए उत्तर में एक रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
एमएसएमई समिति सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के अध्यक्ष विक्रम सहगल ने कहा कि भारत को रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए रक्षा क्षेत्र में साहसिक पहल की गई है। रक्षा में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहलों पर विचार करने की जरूरत है। सरकार आवश्यक ढांचा प्रदान कर रही है और यह एमएसएमई के लिए आवश्यक रक्षा उपकरणों की आवश्यकता को समझने के लिए है।
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सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने कहा कि कौशल आधार, शिक्षा और कई सफलता की कहानियों के मामले में पंजाब में पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं, जिन्हें रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। मेजर जनरल पीके सैनी ने कहा कि स्वदेशीकरण को बढ़ाने के लिए हम एक डिजाइन बनाने पर काम कर रहे हैं।
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इसरो के पूर्व वैैज्ञानिक एचएस जटाना ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में उत्पादन के लिए भारत काफी काम कर सकता है। पुराने हथियारों को दोबारा बनाया जा सकता है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल नव के खंडूरी ने कहा कि राष्ट्र के भीतर क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रतिकूलता और क्षमताएं हमारे बीच मौजूद अंतराल हैं। उत्तरी सीमाओं पर जिस तरह का विकास हो रहा है, उसे देखते हुए उत्तर में एक रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
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एमएसएमई समिति सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के अध्यक्ष विक्रम सहगल ने कहा कि भारत को रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए रक्षा क्षेत्र में साहसिक पहल की गई है। रक्षा में निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहलों पर विचार करने की जरूरत है। सरकार आवश्यक ढांचा प्रदान कर रही है और यह एमएसएमई के लिए आवश्यक रक्षा उपकरणों की आवश्यकता को समझने के लिए है।
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सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह ने कहा कि कौशल आधार, शिक्षा और कई सफलता की कहानियों के मामले में पंजाब में पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं, जिन्हें रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। मेजर जनरल पीके सैनी ने कहा कि स्वदेशीकरण को बढ़ाने के लिए हम एक डिजाइन बनाने पर काम कर रहे हैं।