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Chandigarh News: आयुष्मान कार्ड बना, फिर भी दवा नहीं... चार दिन से अस्पताल और काउंटर के बीच भटक रहा परिवार

Mon, 29 Jun 2026 12:51 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 12:51 AM IST
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Ayushman card issued, yet no medicines... Family running between the hospital and the counter for four days.
चंडीगढ़। सरकार की आयुष्मान योजना का मकसद गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज देना है, लेकिन जीएमसीएच-32 में भर्ती लुधियाना के गुरदेव सिंह के परिवार का कहना है कि कार्ड बनने के बावजूद उन्हें मुफ्त दवाइयां नहीं मिल रहीं। पिछले चार दिनों से परिजन आयुष्मान काउंटर के चक्कर काट रहे हैं, जबकि मरीज के इलाज पर रोज हजारों रुपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं।
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लुधियाना निवासी गुरदेव सिंह को फेफड़ों में पानी भरने, निमोनिया और अन्य गंभीर बीमारियों के कारण 19 जून को जीएमसीएच-32 में भर्ती कराया गया था। उन्हें अस्पताल के ओवरफ्लो वार्ड में रखा गया है। परिजनों के अनुसार 22 जून को आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका कार्ड सक्रिय हुआ और एक बार दवाइयां भी दी गईं, लेकिन इसके बाद अस्पताल ने मुफ्त दवा देने से इनकार कर दिया। गुरदेव सिंह के बेटे हरमंदीप ने बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें कहा कि आयुष्मान कार्ड की वैधता समाप्त हो गई है। अब दोबारा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही योजना के तहत दवाइयां मिल सकेंगी। तब तक जांच तो निशुल्क होगी, लेकिन दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ेंगी।
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परिवार परेशान, योजना बेकार

परिजनों का कहना है कि वे लगातार आयुष्मान काउंटर पर जाकर समस्या बताने और प्रक्रिया दोबारा शुरू कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कई घंटे इंतजार और बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद कोई समाधान नहीं हो पाया। इस कारण रोजाना हजारों रुपये की दवाइयां निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। हरमंदीप का कहना है कि जब कार्ड बनने के बाद भी मुफ्त इलाज और दवा नहीं मिल रही तो योजना का लाभ मिलने का दावा उनके लिए बेअसर साबित हो रहा है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से तत्काल समस्या दूर करने की मांग की है।
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जल्द समाधान का निर्देश

वहीं जीएमसीएच-32 की निदेशक-प्राचार्य डॉ. रवनीत कौर बेदी ने कहा कि मामले की जांच करवाई जाएगी और संबंधित डॉक्टर से बात कर मरीज की समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत मेडिसिन के मरीजों में प्रारंभिक स्वीकृति के बाद कई मामलों में आगे की मंजूरी के लिए जांच रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। यदि इसी प्रक्रिया के कारण कोई तकनीकी अड़चन आई है तो उसे दूर कर योजना का लाभ दोबारा शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मरीज और उसके परिजनों को परेशानी न हो।
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