फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Attention Loud sound of firecrackers can kill birds, awareness campaign launched at Labor Chowk

Chandigarh News: सावधान! पटाखों की तेज आवाज पक्षियों की ले सकता है जान, लेबर चौक पर चलाया जागरूकता अभियान

Fri, 10 Nov 2023 02:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Nov 2023 02:14 AM IST
विज्ञापन
Attention Loud sound of firecrackers can kill birds, awareness campaign launched at Labor Chowk
चंडीगढ़। दिवाली पर पटाखों का तेज शोर पक्षियों की जान तक ले सकता है। वहीं, दिवाली पर होने वाले वायु प्रदूषण से 25-30 फीसदी पक्षियों का श्वसन तंत्र भी प्रभावित हो जाता है। पालतू और आवारा जानवरों पर भी पटाखों के शोर और वायु प्रदूषण का बुरा प्रभाव पड़ता है। ट्राइसिटी में लोगों को तेज धमाकों और प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों से परहेज रखना चाहिए। इससे पर्यावरण और पशु-पक्षियों को बचाया जा सकता है। यह संदेश देते हुए चंडीगढ़ पेट लवर्स एसोसिएशन ने वीरवार शाम सेक्टर-20 लेबर चौक पर अनोखा जागरूकता अभियान चलाया। शाम को लगभग एक घंटा चले इस जागरूकता अभियान को चौक से गुजरते कई लोगों ने देखा और इसकी सराहना की। सेक्टर-20 की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के साथ मिलकर चलाए इस अभियान में स्कूली बच्चों ने भी भाग लिया। बच्चों और बड़ों ने हाथों में ‘धूम न धमाका, इस बार नो पटाखा’ पोस्टर पकड़ पटाखों से दूर रहने का संदेश दिया
विज्ञापन


90 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक
एसोसिएशन के प्रधान सेक्टर-20 निवासी विनोद कुमार उर्फ सोनू ने बताया कि जिन पटाखों की आवाज सुनकर इंसानों के बच्चे तालियां बजाते हैं वह आवाज पक्षियों के बच्चों की जान तक ले लेती है।यही नहीं एक शोध से पता चला है कि 90 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि पक्षियों के लिए बेहद खतरनाक होती है। दिवाली की रात तेज आवाज वाले पटाखे चलाए जाते हैं। यह आवाज कई नन्हें पक्षी सहन नहीं कर पाते और दहशत से उनकी मौत तक हो जाती है। पिछले वर्षों में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। व्यस्क पक्षी भी पटाखों की तेज आवाज से सहमे रहते हैं।
विज्ञापन


पटाखों की आवाज से पशुओं को होती है बेचैनी, फेफड़ो पर पड़ता है दुष्प्रभाव
सोनू ने बताया कि तेज आवाज के साथ ही वायु प्रदूषण का पक्षियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। दिवाली के बाद 25-30 प्रतिशत पक्षियों के श्वसन तंत्र पर प्रभाव देखा जा सकता है। कुत्ते, गाय-भैंस आदि पशुओं में दिवाली की रात बेचैनी होती है। उनके फेफड़ों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। सर्द ऋतु के प्रारंभ में ही अधिकतर पक्षियों का प्रजनन काल पूरा हो जाता है। इस समय पक्षियों के घोंसलों में छोटे-छोटे बच्चे रहते हैं। गौरैया, मैना, कौआ, तोता, पाइड बुशचैट आदि पक्षी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में आबादी के आसपास ही घोंसला बनाते हैं। तेज धमाकों और प्रदूषण से उनके बच्चों की मौत हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed