पंजाब से पश्चिम बंगाल तक बिछाई जाएगी नई रेलवे लाइन
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भारतीय रेलवे के महत्वाकांक्षी ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर प्रोजेक्ट को रफ्तार मिली है। मालगाड़ियों के लिए अलग से रेलवे लाइन बनाने के लिए अंबाला रेल मंडल ने अपने हिस्से के सेक्शन के लिए करीबन 440 हेक्टेयर जमीन एक्वायर कर ली है।
सेक्शन के अंतर्गत साहनेवाल (लुधियाना) से तलहेड़ी बुजुर्ग (सहारनपुर) तक पैरलल रेलवे लाइन बिछाई जाएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्तमान रेलवे ट्रैक के साथ-साथ सिंगल रेलवे लाइन बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
खास बात यह कि इस परियोजना के अंतर्गत साहनेवाल से तलहेड़ी बुजुर्ग तक सोलह स्टेशन बनाए जाएंगे, जहां केवल मालगाड़ियां ही रुकेंगीं और सामान को पूरे देश में जल्दी भेजा जा सकेगा। वहीं दूसरी ओर मौजूदा रेलवे ट्रैक पर ट्रैफिक कम होने से यात्री गाड़ियों का आवागमन भी तेज होगा।
परियोजना एक नजर में
दरअसल, इंडियन रेलवे द्वारा वेस्ट बंगाल के सोननगर से पंजाब के साहनेवाल रेलवे स्टेशन तक ईस्टर्न डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर का निर्माण किया जाना है। ये परियोजना 2019 तक पूरी होगी। इसी परियोजना के तहत अंबाला डिविजन को साहनेवाल सेक्शन से तलहेड़ी बुजुर्ग सेक्शन तक पैरलल रेलवे लाइन तैयार करनी है।
इनकी दूरी 206.7 किलोमीटर है और परियोजना के लिए 3630 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है। वेस्ट बंगाल से लुधियाना तक 1279 किलोमीटर लंबे डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर के लिए 11588.79 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है।
अंबाला डिविजन में परियोजना के सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर राजेश नवल के अनुसार अंबाला डिविजन ने भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा कर लिया है और अब पैरलल लाइन बिछाने के लिए टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी।
परियोजना से यात्रियों और व्यापारियों दोनों को फायदा
सोलह स्टेशन बनेंगे: फ्रेट कोरिडोर परियोजना के तहत सहारनपुर से लुधियाना सेक्शन में सोलह रेलवे स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें न्यू टपरी, न्यू सहारनपुर, न्यू पिलखनी, न्यू कलानौर, न्यू जगाधरी वर्कशाप, न्यू दराजपुर, न्यू बराड़ा, न्यू केसरी, न्यू दुखेड़ी, न्यू अंबाला सिटी, न्यू शंभू, न्यू मंडी गोबिंदगढ़, न्यू खन्ना व न्यू चावांपहल स्टेशन शामिल है। इस रूट में अंबाला कैंट जंक्शन के पास कोई स्टेशन नहीं बनेगा।
यात्रियों और कारोबारियों को होगा फायदा: परियोजना से यात्रियों और व्यापारियों दोनों को काफी फायदा होगा। अभी तक सवारियों को दिक्कत यह आ रही है कि मालगाड़ी को गुजारने के लिए सवारी गाड़ी को रोका जाता। कई बार रेलवे को मालगाड़ियों को किसी स्टेशन के आउटर पर खड़ा करके सवारी गाड़ियों को निकाला जाता है।
इसी वजह से सवारी और माल दोनों गाड़ियां लेट होती हैं। इस कारण कारोबारी भी अपने माल को गंतव्यों तक पहुंचाने को लेकर परेशान रहते हैं। परियोजना पूरी होने पर मालगाड़ियों को पैरलल लाइन पर चलाया जाएगा। वहीं सवारी गाड़ियां पुराने ट्रैक पर ही चलेंगी।