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Chandigarh News: नगर निगम को संजीवनी देंगे प्रशासक, 28 जनवरी को बुलाई बैठक, अतिरिक्त ग्रांट की होगी मांग
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चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया 28 जनवरी को नगर निगम की वित्तीय स्थिति को संजीवनी देने के लिए अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में नगर निगम के 200 करोड़ के घाटे को दूर करने और आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1704 करोड़ की बजटीय मांगों को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी। साथ ही, केंद्र सरकार से अतिरिक्त ग्रांट की मांग पर भी विचार किया जाएगा, ताकि निगम की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके।
नगर निगम की तरफ से 28 जनवरी को वित्तीय स्थिति पर प्रशासक को विस्तृत प्रेजेंटेशन दी जाएगी। आयुक्त अमित कुमार ने कहा कि 28 को होने वाली बैठक के दौरान निगम की वित्तीय स्थिति के बारे में प्रशासक को बताया जाएगा। उन्हें निगम की तरफ से किए गए प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। निगम में वित्तीय संकट के बीच कर्मचारियों की जनवरी माह की सैलरी भी प्रभावित हो सकती है। इस पर आयुक्त ने कहा कि वह कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार कर रहे हैं। दरअसल, प्रशासक कटारिया ने निगम अधिकारियों को खर्चों में कटौती करने और राजस्व सृजन पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया है, जिसपर निगम की तरफ से कई फैसले लिए जा रहे हैं। निगम ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 1,704 करोड़ की अनुदान सहायता की मांग की है, जिसमें चौथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशें और बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति शामिल है, जिसका भुगतान वर्तमान में यूटी प्रशासन की ओर से नहीं किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नगर निगम ने 1,651.7 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता मांगी थी, जिसमें से केंद्र सरकार ने केवल 560 करोड़ ही स्वीकृत किए हैं।
प्रशासन से अब सिर्फ 33 करोड़ रुपये ही मिलने बाकी
नगर निगम को यूटी से मिलने वाले 560 करोड़ के वार्षिक अनुदान में से 527 करोड़ पहले ही मिल चुके हैं, जिससे फरवरी और मार्च की अवधि के लिए केवल 33 करोड़ ही बचे हैं। ऐसे में निगम के लिए जनवरी और फरवरी महीने की सैलरी जारी करना सबसे चुनौतीपूर्ण है। प्रशासन से अब सिर्फ 33 करोड़ रुपये ही मिलने हैं, जो फरवरी के पहले हफ्ते में मिलेंगे लेकिन एक महीने का नियमित और आउटसोर्स कर्मियों का वेतन ही करीब 46.5 करोड़ है। इसके अलावा हर महीने करीब बिजली का बिल 11.5 करोड़ है। दिसंबर महीने में भी कर्मचारियों को सैलरी लेट मिली और अब जनवरी में ही लेट ही मिलेगी। बता दें कि निगम के सभी नियमित कर्मियों सैलरी हर महीने करीब 18.5 करोड़ रुपये (पेंशन सहित) है। आउटसोर्सिंग, कॉन्ट्रैक्ट व डेली वेज कर्मियों की सैलरी करीब 28 करोड़ है।
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नगर निगम की तरफ से 28 जनवरी को वित्तीय स्थिति पर प्रशासक को विस्तृत प्रेजेंटेशन दी जाएगी। आयुक्त अमित कुमार ने कहा कि 28 को होने वाली बैठक के दौरान निगम की वित्तीय स्थिति के बारे में प्रशासक को बताया जाएगा। उन्हें निगम की तरफ से किए गए प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। निगम में वित्तीय संकट के बीच कर्मचारियों की जनवरी माह की सैलरी भी प्रभावित हो सकती है। इस पर आयुक्त ने कहा कि वह कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए योजना तैयार कर रहे हैं। दरअसल, प्रशासक कटारिया ने निगम अधिकारियों को खर्चों में कटौती करने और राजस्व सृजन पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया है, जिसपर निगम की तरफ से कई फैसले लिए जा रहे हैं। निगम ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 1,704 करोड़ की अनुदान सहायता की मांग की है, जिसमें चौथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशें और बिजली शुल्क की प्रतिपूर्ति शामिल है, जिसका भुगतान वर्तमान में यूटी प्रशासन की ओर से नहीं किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नगर निगम ने 1,651.7 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता मांगी थी, जिसमें से केंद्र सरकार ने केवल 560 करोड़ ही स्वीकृत किए हैं।
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प्रशासन से अब सिर्फ 33 करोड़ रुपये ही मिलने बाकी
नगर निगम को यूटी से मिलने वाले 560 करोड़ के वार्षिक अनुदान में से 527 करोड़ पहले ही मिल चुके हैं, जिससे फरवरी और मार्च की अवधि के लिए केवल 33 करोड़ ही बचे हैं। ऐसे में निगम के लिए जनवरी और फरवरी महीने की सैलरी जारी करना सबसे चुनौतीपूर्ण है। प्रशासन से अब सिर्फ 33 करोड़ रुपये ही मिलने हैं, जो फरवरी के पहले हफ्ते में मिलेंगे लेकिन एक महीने का नियमित और आउटसोर्स कर्मियों का वेतन ही करीब 46.5 करोड़ है। इसके अलावा हर महीने करीब बिजली का बिल 11.5 करोड़ है। दिसंबर महीने में भी कर्मचारियों को सैलरी लेट मिली और अब जनवरी में ही लेट ही मिलेगी। बता दें कि निगम के सभी नियमित कर्मियों सैलरी हर महीने करीब 18.5 करोड़ रुपये (पेंशन सहित) है। आउटसोर्सिंग, कॉन्ट्रैक्ट व डेली वेज कर्मियों की सैलरी करीब 28 करोड़ है।
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