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Chandigarh News: प्रदेश के 4500 निजी स्कूल बंद होने के कगार पर, लामबंद हुए संचालक
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एक अप्रैल से गैर मान्यता प्राप्त स्कूल बंद करने की तैयारी
फैसले के खिलाफ संचालकों ने खोला मार्चा, कोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा
चंडीगढ़। प्रदेश के 4500 निजी स्कूलों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। हरियाणा सरकार ने एक अप्रैल से गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। अगर कोई स्कूल खोलने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। ऐसे में अब सरकार के इस फैसले के खिलाफ निजी स्कूल संचालक लामबंद हो गए हैं। निजी स्कूल संचालक अब राहत के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
शुक्रवार को नेशनल इंडिपेडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने प्रेसवार्ता में अफसरशाही के खिलाफ मोर्चा खोला। शर्मा ने कहा कि गलत नीतियों के कारण हजारों की संख्या में प्राइवेट स्कूल्स और उनसे जुड़े एक लाख अध्यापक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का भविष्य अंधकारमय हो गया है। सरकार कहती है कि वह दो पारियों में स्कूल चला लेंगे। सच्चाई यह है कि अनेक सरकारी स्कूल इस तरह के हैं, जिनमें सिर्फ एक कमरा है। तमाम सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। एक तरफ सरकार कहती है कि वह बंद होने वाले निजी स्कूलों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा लेगी। मेरा मानना है कि यह तानाशाही का रवैया है।
हिसार से एसोसिएशन पदाधिकारी संतोष भार्गव ने कहा कि स्कूल संचालक मान्यता लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन विभाग सुनने को तैयार नहीं है। शर्तें इतनी कड़ी हैं कि उनको पूरा करना आसान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अफसर सरकार को गुमराह कर रहे हैं और इससे न केवल छात्रों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी खराब हो रही है। स्कूल संचालकों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की कि वह इस पूरे मामले में संज्ञान लेकर मामले को हल करने की दिशा में कार्रवाई करें।
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फैसले के खिलाफ संचालकों ने खोला मार्चा, कोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा
चंडीगढ़। प्रदेश के 4500 निजी स्कूलों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। हरियाणा सरकार ने एक अप्रैल से गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। अगर कोई स्कूल खोलने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। ऐसे में अब सरकार के इस फैसले के खिलाफ निजी स्कूल संचालक लामबंद हो गए हैं। निजी स्कूल संचालक अब राहत के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
शुक्रवार को नेशनल इंडिपेडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कुलभूषण शर्मा ने प्रेसवार्ता में अफसरशाही के खिलाफ मोर्चा खोला। शर्मा ने कहा कि गलत नीतियों के कारण हजारों की संख्या में प्राइवेट स्कूल्स और उनसे जुड़े एक लाख अध्यापक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का भविष्य अंधकारमय हो गया है। सरकार कहती है कि वह दो पारियों में स्कूल चला लेंगे। सच्चाई यह है कि अनेक सरकारी स्कूल इस तरह के हैं, जिनमें सिर्फ एक कमरा है। तमाम सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। एक तरफ सरकार कहती है कि वह बंद होने वाले निजी स्कूलों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ा लेगी। मेरा मानना है कि यह तानाशाही का रवैया है।
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हिसार से एसोसिएशन पदाधिकारी संतोष भार्गव ने कहा कि स्कूल संचालक मान्यता लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन विभाग सुनने को तैयार नहीं है। शर्तें इतनी कड़ी हैं कि उनको पूरा करना आसान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के अफसर सरकार को गुमराह कर रहे हैं और इससे न केवल छात्रों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि सरकार की छवि भी खराब हो रही है। स्कूल संचालकों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की कि वह इस पूरे मामले में संज्ञान लेकर मामले को हल करने की दिशा में कार्रवाई करें।
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