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कुंडली में कालसर्प दोष से डरने की जरूरत नहीं

राकेश/इंटरनेट डेस्क।

जिनकी कुण्डली में कालसर्प दोष है उन्हें इससे डरने की जरूरत नहीं है। इसे दोष मानने की बजाय योग समझना चाहिए। ऐसे कई उदाहरण हैं जिससे साबित होता है कि कालसर्प दोष नहीं बल्कि राजयोग के समान शुभ फलदायी होता है। धीरू भाई अम्बानी, हृषिकेष मुखर्जी, सचिन तेंदुलकर ये ऐसे नाम हैं जिनकी जन्मपत्री में कालसर्प योग है। इन सभी हस्तियों ने अपने क्षेत्र में सफलता की मिसाल कायम की है।

जिस प्रकार शनि की साढेसाती सभी व्यक्ति को एक समान पीड़ा नही देती है उसी प्रकार कालसर्प योग भी सभी व्यक्ति को एक जैसा परिणाम नहीं देता है। कुण्डली में राहु केतु की स्थिति पर निर्भर करता है कि कालसर्प व्यक्ति के लिए शुभ होगा या कष्टकारी। कालसर्प योग शुभ होने पर राहु केतु की दशा में व्यक्ति को अपने अंदर की कमजोरियों को दूर करने का मौका मिलता है और वह निरंतर आगे बढ़ता रहता है। जो लोग जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबराकर बैठ जाते हैं उनके लिए ही कालसर्प अशुभ होता है।

कालसर्प इनके लिए होता भाग्यशाली
जिस व्यक्ति की कुण्डली में राहु अपनी उच्च राशि वृष या मिथुन में होता है वह राहु की दशा में सफलता की बुलंदियों पर पहुंच जाते हैं। उच्च का अथवा स्वराशि का गुरू भी व्यक्ति के लिए लाभप्रद होता है। कालसर्प योग वाले व्यक्ति की जन्मपत्री में गुरू और चन्द्र एक दूसरे से केन्द्र में हों अथवा साथ बैठें हों तो ऐसा व्यक्ति भी निरंतर उन्नति करता है।

ऐसा राहु होता है कष्टकारी

कुण्डली में तीसरा, छठा और आठवां घर त्रिक भाव कहलाता है। इन भावों में राहु का होना शुभ नहीं होता है। इन भावों में राहु होने पर व्यक्ति को राहु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए उपाय करना चाहिए।
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