मथुरा के नंदगांव में सावन की फुहारों, मल्हारों और भक्ति की रसमयी छटा के बीच नंदबाबा की नगरी नंदगांव में चल रहा भगवान श्रीकृष्ण-बलराम का हिंडोला उत्सव रक्षाबंधन के साथ पूर्ण हो गया। गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ यह अनूठा उत्सव पूरे 30 दिन तक अनवरत चला। अंतिम दिन मंदिर में ठाकुरजी को फूलों से सजे भव्य हिंडोले में विराजमान कर श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर दर्शन किए। नंदीश्वर पर्वत पर स्थित नंदबाबा के प्राचीन मंदिर में सावन के पूरे महीने शाम ढलते ही भक्ति का अलग ही रंग दिखाई देता रहा। भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के विग्रहों को सोने-चांदी से निर्मित आकर्षक हिंडोले में विराजमान कराया जाता और आकर्षक पोशाकों एवं श्रृंगार से सजाया जाता। इसके बाद ब्रज की गोपियां सावन की मल्हारों से ठाकुरजी को रिझातीं, तो सेवायत पुजारी मंद-मंद गति से हिंडोले को झोटा देकर झुलाते। रक्षाबंधन पर हिंडोला उत्सव के अंतिम दिन मंदिर परिसर में सावन की विदाई का अहसास भी नजर आया। मल्हारों और पदों की स्वर लहरियों के बीच जब ठाकुरजी अंतिम बार हिंडोले में झूले तो श्रद्धालु इस मनोहारी दृश्य को अपने हृदय में संजोते नजर आए। हिंडोला उत्सव के दौरान नंदगांव के सेवायत गोस्वामी समाज गायन की प्राचीन परंपरा का भी निर्वहन करते हैं। शास्त्रीय संगीत पर आधारित समाज गायन में सावन के गीत, मल्हार और पदों की रसमयी प्रस्तुति वातावरण को भक्तिमय बना देती है। नंदबाबा मंदिर के सेवायत श्याम बिहारी गोस्वामी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा से रक्षाबंधन तक चले इस उत्सव में दूर-दराज से श्रद्धालु नंदबाबा की नगरी पहुंचे। अब हिंडोले का झोटा थम गया है, लेकिन सावन की मल्हारों और ठाकुरजी के झूलने की स्मृतियां श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक बनी रहेंगी।