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गुरुग्राम में राम बारात संग राम-सीता विवाह, कई रामलीलाओं में मंचन

गुरुग्राम शहर की रामलीलाओं के दर्शकों को सीता स्वयंवर की सुंदरता, धनुष यज्ञ और परशुराम लक्ष्मण के दिलचस्प संवाद का साक्षी बनने का मौका मिल रहा है। मंच पर प्रेम, उल्लास और खूबसूरती के बीच मानस की मधुर चौपाइयों, राधेश्याम रचित रामायण में सरल गेय संवाद और यशवंत सिंह रचित उर्दू अल्फाज वाले संवाद सुनने को मिल रहे हैं। सोमवार की रात जैकबपुरा की श्री दुर्गा रामलीला और डाकखाने की पुरानी रामलीला में जहां राम बारात, राम-सीता विवाह और सीता की विदाई का दृश्य दर्शाया गया वही दूसरी रामलीलाओं में सीता स्वयंवर धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद के दृश्य दर्शाया गया। सदर बाजार और जैकबपुरा की सड़कों राम बारात में राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न को दुल्हा के वेश में देखकर लोग निहाल हो रहे थे। राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू। देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ.. परशुराम श्री राम से कहते हैं- हे राम, तुम लक्ष्मीपति (विष्णु) का यह धनुष अपने हाथ में लो और इसे खींचकर (चढ़ाकर) मेरा संदेह मिटाओ। परशुराम जैसे ही वह धनुष श्री राम को देने लगे, वह धनुष स्वयं ही श्री राम के पास चला गया, जिसे देखकर परशुराम के मन में बड़ा आश्चर्य (विस्मय) हुआ। धनुष के अपने आप श्री राम के हाथ में चले जाने से परशुराम का अज्ञान और संदेह दूर हो जाता है। वे जान जाते हैं कि श्री राम स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। इसके बाद वे स्तुति करके तपस्या करने के लिए वन को चले जाते हैं।

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