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VIDEO: फर्जी फर्म बना 1.69 करोड़ की आईटीसी ली, दो पार्टनरों पर प्राथमिकी
आगरा में फर्जी दस्तावेज से जीएसटी पंजीकरण कराने और अस्तित्वहीन फर्मों से खरीद दिखाकर करीब 1.69 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने के आरोप में लोहामंडी थाने में दो पार्टनरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। राज्य कर विभाग के उपायुक्त, खंड-14 राहुल कुमार द्विवेदी की तहरीर पर एमएस कैलाशपति एंटरप्राइजेज के पार्टनर सुमित सिंह, निवासी विवेकानंद पुरम, शास्त्रीपुरम और विपिन सिंह निवासी गणपति स्मार्ट सिटी, सिकंदरा के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। फर्म का पंजीकृत पता फर्स्ट फ्लोर, फ्लैट नंबर एफ-103, कोमल अपार्टमेंट, लोहिया नगर, बल्केश्वर, आगरा बताया गया है। राहुल कुमार ने बताया कि आरोपियों की फर्म ने टेक्सटाइल फैब्रिक्स, बटन, प्रेस-फास्टनर्स आदि की खरीद-बिक्री के लिए 1 सितंबर 2022 को जीएसटी पंजीकरण कराया था। ऑनलाइन आवेदन में सुमित सिंह और विपिन सिंह को फर्म का पार्टनर बताया गया था। विभागीय जांच में 8 फरवरी 2023 को फर्म को बोगस और अस्तित्वहीन पाया गया। जीएसटी प्राधिकरण ने फर्जी तरीके से पंजीकरण हासिल किए जाने, गलत जानकारी देने अथवा तथ्यों को छिपाने के आधार पर फर्म का पंजीकरण 13 सितंबर 2022 से निरस्त कर दिया था। जांच में आरोप लगाया गया कि सितंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच फर्म ने रिटर्न दाखिल कर दूसरी फर्मों को 1.69 करोड़ रुपये से अधिक की आईटीसी पास की। इसमें सीजीएसटी और एसजीएसटी की राशि 84,92 लाख से अधिक रुपये की बताई गई है। तहरीर में रिद्धि सिद्धि एंटरप्राइजेज और हरलीन गारमेंट्स डिस्ट्रीब्यूशन को आईटीसी दिए जाने का उल्लेख है। विभाग के मुताबिक आईटीसी का दावा जिन फर्मों से इनवर्ड सप्लाई दिखाकर किया गया, उनमें मीनल ट्रेडिंग कंपनी, बुधप्रीत कॉटन एलएलपी और पाखी निट फैब कंपनी शामिल हैं। जांच में मीनल ट्रेडिंग कंपनी का पंजीकरण भी फर्जी जानकारी के आधार पर निरस्त होना, जबकि बुधप्रीत कॉटन एलएलपी और पाखी निट फैब कंपनी के पंजीकरण भी बाद में स्वत: निरस्त होना बताया गया है। आरोप है कि वास्तविक माल की आपूर्ति प्राप्त किए बिना केवल दस्तावेजों के आधार पर फर्जी इनवर्ड सप्लाई दिखाई गई और उसके आधार पर आईटीसी हासिल कर आगे पास की गई। इससे सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
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