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Collector Rakhi Sahay Offers Prayers at Maa Virasini Temple on First Day of Navratri
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उमरिया: मां विरासिनी की आराधना के साथ नवरात्र की शुरुआत, कलेक्टर राखी सहाय ने की घट स्थापना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 10:40 AM IST
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शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन उमरिया जिले में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला। नवरात्र के पावन अवसर पर कलेक्टर राखी सहाय बिरसिंहपुर पाली स्थित प्रसिद्ध माँ विरासिनी मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने विधि-विधान के साथ माँ विरासिनी की पूजा-अर्चना की और घट स्थापना कर देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने जिले की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। नवरात्र के पहले दिन मां के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करने का यह अवसर धार्मिक आस्था और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा रहा।
शारदेय नवरात्र हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नवरात्र की शुरुआत होती है। घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। मां विरासिनी मंदिर में भी नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां देवी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
आस्था और इतिहास का प्रतीक है माँ विरासिनी मंदिर
बिरसिंहपुर पाली स्थित माँ विरासिनी मंदिर उमरिया जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक पहचान और लोकआस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। लंबे समय से श्रद्धालु मां विरासिनी को अपनी आराध्य देवी के रूप में पूजते आ रहे हैं। नवरात्र के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का माहौल रहता है और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर की पहचान स्थानीय धार्मिक परंपराओं और पीढ़ियों से चली आ रही आस्था से जुड़ी है। मां विरासिनी के प्रति श्रद्धालुओं की श्रद्धा इतनी गहरी है कि अनेक भक्त शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले देवी का स्मरण करते हैं और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। हालांकि, मंदिर की स्थापना का सटीक वर्ष और उसके प्रारंभिक इतिहास से जुड़ी प्रमाणित जानकारी उपलब्ध न होने के कारण इसकी प्राचीनता के संबंध में कोई निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा। मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को प्रमाणित अभिलेखों और स्थानीय परंपराओं के आधार पर विस्तार से दर्ज किया जाना महत्वपूर्ण है।
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