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नर्सरी मालिक की हत्या में तीन को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 24 Jan 2016 12:14 AM IST
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विशेष सत्र एवं एससी-एसटी अपर जिला जज बीडी भारती ने नर्सरी मालिक की हत्या में भाइयों समेत तीन को आजीवन कारावास और 90 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषियों ने नर्सरी मालिक को पत्नी-बेटी के सामने तलब से प्रहार कर हत्या कर दी थी।
हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव सैमली निवासी सूरजभान 10 नवंबर 2012 की रात पत्नी सुनीता और बेटी प्राची के साथ अपनी नर्सरी पर सो रहा था। रात करीब ढाई बजे शिव कुमार उर्फ शिव किशोर, उसका भाई अशोक पुत्रगण हेतराम व नरेश पुत्र जबर सिंह निवासी अहरौला तेजवन थाना गजरौला नर्सरी पर पहुंचे और सूरजभान को चारपाई से उठाकर तबल से प्रहार कर मार डाला।
पति को बचाने दौड़ी सुनीता को धक्का देकर गिरा दिया और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। सुनीता की तहरीर पर तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सूरजभान की हत्या अशोक व शिव कुमार ने मां-भाई की हत्या का बदला लेने की नीयत से की थी।
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दोनों भाइयों को शक था कि सूरजभान भी मां-भाई की हत्या में शामिल था। नरेश कुछ समय बाद जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आ गया, जबकि दोनों भाइयों को जमानत नहीं मिल सकी।
शनिवार को विशेष सत्र एवं एससी-एसटी न्यायालय में अभियोजन अधिकारी आरबी सिंह, शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र सैनी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के बीच जोरदार बहस हुई। न्यायाधीश बीडी भारती ने तीनों पर हत्या का दोष सिद्ध करते हुए आजीवन कारावास और तीस-तीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया।
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हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव सैमली निवासी सूरजभान 10 नवंबर 2012 की रात पत्नी सुनीता और बेटी प्राची के साथ अपनी नर्सरी पर सो रहा था। रात करीब ढाई बजे शिव कुमार उर्फ शिव किशोर, उसका भाई अशोक पुत्रगण हेतराम व नरेश पुत्र जबर सिंह निवासी अहरौला तेजवन थाना गजरौला नर्सरी पर पहुंचे और सूरजभान को चारपाई से उठाकर तबल से प्रहार कर मार डाला।
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पति को बचाने दौड़ी सुनीता को धक्का देकर गिरा दिया और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। सुनीता की तहरीर पर तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सूरजभान की हत्या अशोक व शिव कुमार ने मां-भाई की हत्या का बदला लेने की नीयत से की थी।
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दोनों भाइयों को शक था कि सूरजभान भी मां-भाई की हत्या में शामिल था। नरेश कुछ समय बाद जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आ गया, जबकि दोनों भाइयों को जमानत नहीं मिल सकी।
शनिवार को विशेष सत्र एवं एससी-एसटी न्यायालय में अभियोजन अधिकारी आरबी सिंह, शासकीय अधिवक्ता नरेंद्र सैनी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के बीच जोरदार बहस हुई। न्यायाधीश बीडी भारती ने तीनों पर हत्या का दोष सिद्ध करते हुए आजीवन कारावास और तीस-तीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया।