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मृतक को ही दोषी बनाने की फिराक में पुलिस!
ब्यूूराे/अमर उजाला अमराेहा
Updated Sat, 06 Feb 2016 12:13 AM IST
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नौगावां सादात थाना क्षेत्र के गांव जीरखी निवासी अंकुर चौहान (20)
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पुत्र सत्यवीर चौहान की लाश दो फरवरी को जटीवन में करीब पांच सौ मीटर अंदर
एक पेड़ पर फांसी के फंदे पर लटकी मिली थी। पुलिस को सिर्फ मृतक की के
पर्स से एक सुसाइड नोट मिला था। सुसाइड नोट की टूटी-फूटी हिंदी और हैंड
राइटिंग को लेकर परिजन शुरू से ही संदेह व्यक्त करते आ रहे हैं।
जबकि, सुसाइड नोट और मृतक के वास्तविक हैंड राइटिंग में काफी अंतर है। कई अक्षरों को वास्तविक लिखने की सिर्फ कोशिश की गई है, लेकिन सुसाइड नोट लिखने वाला आधा नोट लिखने के बाद गच्चा खा गया। उसने मात्राओं पर ध्यान नहीं दिया। मृतक इंटर तक ही पढ़ा था और वह अंग्रेजी में काफी कमजोर था, लेकिन सात बजकर 29 मिनट पर अंकुर के पिता को जो एसएमएस प्राप्त हुआ है। उसकी भाषा सधी हुई है।
मृतक का मोबाइल गायब होना हत्या के संदेह को और ज्यादा पुख्ता कर रहा है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने चार दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। आखिर पुलिस इस प्रकरण में किसे बचाने का प्रयास कर रही है। यह बात मृतक के परिजनों की समझ से परे साबित हो रही है।
कंपनी ने क्यों दर्ज नहीं कराई चोरी की रिपोर्ट
अमरोहा (ब्यूरो)। जीरखी के अंकुर चौहान की मौत मामले में परत-दर- परत रहस्य खुलकर सामने आ रहे हैं। विजय इलेक्ट्रानिक कंपनी मुरादाबाद क्षेत्र में विद्युत लाइन डालने का काम कर रही है। यहां कंपनी का कार्य कांट्रेक्टर काली निवासी मकनपुर थाना हसनपुर और सुभाष निवासी गांव भगवानपुर थाना देहात की देखरेख में चल रहा है।
कांट्रेक्टर काली के अंडर में अंकुर चौहान काम करता था। 18 जनवरी को कंपनी का माल चोरी हुआ था, जिसका जिक्र सुसाइड नोट में किया गया है। लेकिन, इस मामले की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई गई। जबकि मृतक लगातार कांट्रेक्टर के अंडर में काम करता रहा।
एक लाख रुपये में समझौता कराने वाला दरोगा कौन था
अमरोहा। विजय इलेक्ट्रानिक कंपनी के माल चोरी में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं थी। इसके बाद भी 29 जनवरी को मुरादाबाद पुलिस ने नौगावां सादात थाना क्षेत्र की मूढ़ा चौकी पुलिस के साथ मिलकर अंकुर चौहान के घर दबिश दी। इतना हीं नहीं उसके पिता सत्यवीर चौहान को पकड़कर चौकी पर ले आई।
डेढ़ घंटा बाद सत्यवीर को छोड़ दिया गया और हसनपुर कोतवाली बुलाया गया। 31 जनवरी को सत्यवीर अपने पुत्र मनवीर सिंह के साथ हसनपुर कोतवाली पहुंचे और एक दरोगा के आवास पर बैठकर मामला रफादफा करने के लिए एक लाख रुपये में समझौता हुआ। मनवीर सिंह ने तीन फरवरी तक रुपये देने का वादा किया था। लेकिन दो फरवरी को अंकुर चौहान की लाश फांसी के फंदे पर लटकी मिली थी।
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किसे बचा रही नौगावां पुलिस
अमरोहा। अंकुर प्रकरण में काफी झोल नजर आ रहे हैं। मृतक के मोबाइल का गायब होना, फांसी के फंदे की गांठ, सुसाइट नोट में चोरी का जिक्र और इससे पहले बिना वारंट के मृतक के पिता को गिरफ्तार करना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। मृतक जिस कंपनी में काम करता था, वह कांट्रेक्टरों के सहारे चल रही है। ऐसे में माल की चोरी होना भी स्वाभाविक है। आखिर माल किसने चोरी किया और पुलिस किसे बचाना चाहती है, यह बात हजम नहीं हो रही है।
-अंकुर ने खुदकुशी की है। परिजनों ने तहरीर देकर हत्या की आशंका व्यक्त की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सुसाइट नोट की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।
-अशोक सोलंकी थाना प्रभारी नौगावां सादात
जबकि, सुसाइड नोट और मृतक के वास्तविक हैंड राइटिंग में काफी अंतर है। कई अक्षरों को वास्तविक लिखने की सिर्फ कोशिश की गई है, लेकिन सुसाइड नोट लिखने वाला आधा नोट लिखने के बाद गच्चा खा गया। उसने मात्राओं पर ध्यान नहीं दिया। मृतक इंटर तक ही पढ़ा था और वह अंग्रेजी में काफी कमजोर था, लेकिन सात बजकर 29 मिनट पर अंकुर के पिता को जो एसएमएस प्राप्त हुआ है। उसकी भाषा सधी हुई है।
मृतक का मोबाइल गायब होना हत्या के संदेह को और ज्यादा पुख्ता कर रहा है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने चार दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। आखिर पुलिस इस प्रकरण में किसे बचाने का प्रयास कर रही है। यह बात मृतक के परिजनों की समझ से परे साबित हो रही है।
कंपनी ने क्यों दर्ज नहीं कराई चोरी की रिपोर्ट
अमरोहा (ब्यूरो)। जीरखी के अंकुर चौहान की मौत मामले में परत-दर- परत रहस्य खुलकर सामने आ रहे हैं। विजय इलेक्ट्रानिक कंपनी मुरादाबाद क्षेत्र में विद्युत लाइन डालने का काम कर रही है। यहां कंपनी का कार्य कांट्रेक्टर काली निवासी मकनपुर थाना हसनपुर और सुभाष निवासी गांव भगवानपुर थाना देहात की देखरेख में चल रहा है।
कांट्रेक्टर काली के अंडर में अंकुर चौहान काम करता था। 18 जनवरी को कंपनी का माल चोरी हुआ था, जिसका जिक्र सुसाइड नोट में किया गया है। लेकिन, इस मामले की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कराई गई। जबकि मृतक लगातार कांट्रेक्टर के अंडर में काम करता रहा।
एक लाख रुपये में समझौता कराने वाला दरोगा कौन था
अमरोहा। विजय इलेक्ट्रानिक कंपनी के माल चोरी में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं थी। इसके बाद भी 29 जनवरी को मुरादाबाद पुलिस ने नौगावां सादात थाना क्षेत्र की मूढ़ा चौकी पुलिस के साथ मिलकर अंकुर चौहान के घर दबिश दी। इतना हीं नहीं उसके पिता सत्यवीर चौहान को पकड़कर चौकी पर ले आई।
डेढ़ घंटा बाद सत्यवीर को छोड़ दिया गया और हसनपुर कोतवाली बुलाया गया। 31 जनवरी को सत्यवीर अपने पुत्र मनवीर सिंह के साथ हसनपुर कोतवाली पहुंचे और एक दरोगा के आवास पर बैठकर मामला रफादफा करने के लिए एक लाख रुपये में समझौता हुआ। मनवीर सिंह ने तीन फरवरी तक रुपये देने का वादा किया था। लेकिन दो फरवरी को अंकुर चौहान की लाश फांसी के फंदे पर लटकी मिली थी।
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किसे बचा रही नौगावां पुलिस
अमरोहा। अंकुर प्रकरण में काफी झोल नजर आ रहे हैं। मृतक के मोबाइल का गायब होना, फांसी के फंदे की गांठ, सुसाइट नोट में चोरी का जिक्र और इससे पहले बिना वारंट के मृतक के पिता को गिरफ्तार करना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। मृतक जिस कंपनी में काम करता था, वह कांट्रेक्टरों के सहारे चल रही है। ऐसे में माल की चोरी होना भी स्वाभाविक है। आखिर माल किसने चोरी किया और पुलिस किसे बचाना चाहती है, यह बात हजम नहीं हो रही है।
-अंकुर ने खुदकुशी की है। परिजनों ने तहरीर देकर हत्या की आशंका व्यक्त की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सुसाइट नोट की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।
-अशोक सोलंकी थाना प्रभारी नौगावां सादात