स्वास्थ्य केंद्र पर बंट रही आयुर्वेदिक दवाएं

Jyotiba phule nagar Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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मंडी धनौरा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर यदि चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाओं में आपको अस्पताल की डिस्पेंसरी से कोई बूटी, भस्म या अर्क मिले तो चौंकने की आवश्यकता नहीं है। नगर के सरकारी अस्पताल में आजकल अंग्रेजी दवाओं का टोटा है। चिकित्सक रोगियों के लिए जिले से आई आयुष दवाएं देकर ही काम चला रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बजट की वजह से अंग्रेजी दवाओं की कमी चल रही है। एंटीबायोटिक दवाओं की भी बेहद कमी चल रही है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति तो और भी खराब है। गनीमत यह है कि इमरजेंसी के लिए अस्पताल के पास पर्याप्त दवाएं हैं।
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नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आजकल रोगियों को आयुर्वेदिक दवाएं दी जा रही है। रोगी भी डिस्पेंसरी से गोली कैप्सूल के बजाय बूटी, भस्म आदि मिलने पर चकित हैं। केन्द्र पर रोजाना 400 से अधिक रोगी उपचार के लिए आ रहे हैं। सभी रोगियों को दवा उपलब्ध कराना मुश्किल काम है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर अंग्रेजी दवाएं ही दी जाती हैं। परन्तु पिछले 15 दिन से रोगियों को आयुष दवाएं दी जा रही हैं। हालत यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात चिकित्सकों व फार्मेसिस्टों को भी यह मालूम नहीं है कि जिले से भेजी गई आयुष दवाएं किस रोग में काम आएगी। आयुष दवाओं के पैक पर लिखे निर्देशों के मुताबिक रोगियों को दवा दी जा रही है। एंटीबायोटिक दवाएं लगभग समाप्त है।
हैरत की बात यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आयुष दवाओं की जानकारी रखने वाला एक भी चिकित्सक मौजूद नहीं है। सीएचसी से समबद्ध प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति तो और भी खराब है।
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