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जरा संभलकर ही खाएं मिठाई

Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
Amroha
Amroha Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
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अमरोहा। दीपावली पर मिठाइयों का स्वाद जरा संभल कर चखें। कहीं ऐसा न हो मिठाइयों का स्वाद आपकी सेहत पर भारी पड़ जाए और आपक्रो डाक्टरों के यहां चक्कर लगाने पड़ें। क्योंकि त्योहार पर हजारों किलो नकली मावा खपाने की तैयारी चल रही है। मुनाफाखोर बाजार में नकली मावे से तैयार मिठाइयां खपाने की तैयार कर रहे हैं। कई स्थानों पर खुलेआम मावा बनाने के कारखाने चल रहे हैं। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग (एफडीए) बजाए ऐसे मुनाफाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करने के छुटभैय्ये दुकानदारों को पकड़कर कार्रवाई की खानापूरी कर रहा है। दीपावली पर सबसे अधिक मिठाइयों की डिमांड रहती है। पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन विभाग के मुताबिक करीब 75 हजार किलोग्राम से अधिक मावा प्रतिवर्ष दीवापली त्योहार पर खपाया जाता है। लेकिन इस बार यह खपत अधिक होने की संभावना है। दीपावली आते ही मिलावट का बाजार भी गर्म हो गया है। धंधेबाजों ने त्योहार पर मावे में मिलावट का धंधा तेज कर दिया है। रातों रात नकली मावा बाजार में खपाया जा रहा है। मुनाफाखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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प्रतिदिन सवा पांच लाख लीटर दूध का उत्पादन
जिला दुग्ध उत्पादन अधिकारी एससी वर्मा ने बताया कि प्रतिदिन जिले में करीब सवा पांच लाख से छह लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। जिसमें सवा दो लाख लीटर दूध की जिले में खपत हो जाती है। जबकि तीन लाख लीटर दूध बिक्री के लिए जिले से प्रतिदिन बाहर भेजा जाता है।
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दीपावली पर बनेगा 75 हजार किलो ग्राम मावा
जनपद में दीपावली पर करीब 75 हजार किलोग्राम से भी अधिक मात्रा में मावा तैयार किया जाता है। मावा बनाने के लिए करीब तीन लाख लीटर दूध की आवश्यकता होती है। एक लीटर दूध में 250 ग्राम मावा निकलता है।
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कैसे होती है मावे में मिलावट
मुनाफाखोर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने के लिए मावे में आटा, मैदा की मिलावट करते हैं। इसके अलावा घटिया क्वालिटी का मिल्क पाउडर भी मावे में मिलाया जाता है। अरारोट मिलाते हैं। अन्य हानिकार पदार्थों से भी मावा तैयार होता है। बड़े बर्तन में ये सब आइटम मिलाकर मावा तैयार किया जाता है। मावा खराब न हो इसके लिए केमिकल मिलाए जाते हैं। जो लोगों की सेहत पर बुरा प्रभाव डालते हैं।
ऐसे करें असली व नकली मावे की पहचान
मावा असली है या नकली, इसकी दुकान व घर पर पहंचान की जा सकती है। यदि मावा असली है तो उसे हाथ पर रगड़ने से हथली पर चिकनाई आ जाएगी। साथ ही मावे को सुंधने पर उसमें दूध व मावे जैसी अच्छी सुगंध आएगी। यदि मावे को हाथ में रगड़ने पर चिकनाई महसूस नहीं होती है और दूध व मावा जैसी सुगंध नहीं आती है तो समझो मावा नकली है। हालांकि असली पहचान तो प्रयोगशाला द्वारा की जाती है।
कितने समय में खराब हो सकती हैं मिठाईयां
विशेषज्ञों के अनुसार यदि मिठाइयां फ्रिज में नहीं रखी गई है तो चौबीस घंटे में खराब हो सकती है। फ्रिज में रखी हुईं मिठाइयां एक सप्ताह तक चल सकती हैं। यदि जिस स्थानों पर मिठाइयों को रखा गया है, वहा नमी व गंदगी है तो जल्द मिठाइयां खराब हो सकती है।
चौदह दिन में आती है जांच रिपोर्ट
खाद्य पदार्थ असली हैं या नकली, इसकी जांच प्रयोगशाला द्वारा की जाती है। सैंपल की जांच रिपोर्ट 14 दिन में आने का प्रावधान है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में एक माह का समय लग जाता है।

आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान
यदि खाद्य पदार्थों में रासायनिक व केमिकल युक्त पदार्थ मिलाए गए हैं, ऐसे मिलावटी पदार्थ खाने से यदि किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, और जांच में मिलावट की पुष्टि होती है तो संबधित के खिलाफ आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। सामान्य मिलावट पर जैसे दूध में पानी, मावे में आटा व मैदा की मिलावट की पुष्टि होने पर जुर्माने का प्रावधान है।
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