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पूर्वांचल में अलर्ट: जीका वायरस से कमजोर हो सकता है गर्भस्थ शिशु का मस्तिष्क, जानिए- लक्षण और बचाव
Mon, 08 Nov 2021 02:09 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Mon, 08 Nov 2021 02:09 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश में जीका वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकेले कानपुर में 80 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। हालांकि अभी पूर्वांचल में जीका का कोई मरीज नहीं मिला है
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जीका वायरस
- फोटो : iStock
विस्तार
डेंगू-मलेरिया के बीच अब जीका वायरस के बढ़ते प्रकोप ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। डेंगू, मलेरिया में जो लक्षण होते हैं, उसी तरह के लक्षण जीका वायरस के भी है। जीका वायरस भी एडीज मच्छर के काटने से ही फैलता है। यह कहना है, आईएमएस बीएचयू के मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के प्रो. सुनीत कुमार सिंह का, जो जीका वायरस पर शोध भी कर रहे हैं।
उनका कहना है कि इस मच्छर के काटने से बड़ों में तो संक्रमण का खतरा होता ही है सबसे अधिक खतरा गर्भस्थ शिशुओं को हैं। इससे उनके सिर का आकार छोटा हो जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।
प्रदेश में जीका वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकेले कानपुर में 80 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। हालांकि अभी पूर्वांचल में जीका का कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन शासन ने भी अलर्ट जारी करते हुए स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया का सैंपल लेने के साथ ही जीका वायरस की जांच के लिए भी सैंपल लेने को कहा है।
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जीका से मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बढ़ावा
प्रो. सुनीत का कहना है कि एडीज मच्छर से फैलने वाला जीका वायरस मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देने में भी सहायक होता है। इसका एनएस-1 प्रोटीन और भी घातक होता है। जीका वायरस का यह प्रोटीन ब्लड ब्रेन बैरियर को कमजोर कर देता है जो कि शिशु के मस्तिष्क में जीका वायरस के प्रवेश में मददगार सिद्ध होता है। इसके असर से गर्भस्थ और नवजात शिशु के सिर का आकार असामान्य और अविकसित भी हो सकता है। आम तौर पर जीका का लक्षण दिखने में 3 से 14 दिन का समय लग जाता है।
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उनका कहना है कि इस मच्छर के काटने से बड़ों में तो संक्रमण का खतरा होता ही है सबसे अधिक खतरा गर्भस्थ शिशुओं को हैं। इससे उनके सिर का आकार छोटा हो जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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प्रदेश में जीका वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकेले कानपुर में 80 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। हालांकि अभी पूर्वांचल में जीका का कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन शासन ने भी अलर्ट जारी करते हुए स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया का सैंपल लेने के साथ ही जीका वायरस की जांच के लिए भी सैंपल लेने को कहा है।
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जीका से मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बढ़ावा
प्रो. सुनीत का कहना है कि एडीज मच्छर से फैलने वाला जीका वायरस मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देने में भी सहायक होता है। इसका एनएस-1 प्रोटीन और भी घातक होता है। जीका वायरस का यह प्रोटीन ब्लड ब्रेन बैरियर को कमजोर कर देता है जो कि शिशु के मस्तिष्क में जीका वायरस के प्रवेश में मददगार सिद्ध होता है। इसके असर से गर्भस्थ और नवजात शिशु के सिर का आकार असामान्य और अविकसित भी हो सकता है। आम तौर पर जीका का लक्षण दिखने में 3 से 14 दिन का समय लग जाता है।
तीन साल पहले देश में आए थे 157 मामले
जीका वायरस के मामले देश में तीन साल पहले आए थे। प्रो. सुनीत सिंह के अनुसार 2015 में ब्राजील, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण पूर्व एशिया में इसका प्रकोप देखा गया, जबकि भारत में 2018 में इसके 157 मामले भी सामने आए हैं। हालांकि अभी भी वैक्सीन के निर्माण का काम परीक्षण के तौर पर चल रहा है।
जीका वायरस के लक्षण
जीका वायरस
- फोटो : Amar Ujala Digital
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
- थकावट, सिरदर्द, कमजोरी
- बुखार और शरीर पर चकत्ते दिखाई देना
- बेचैनी होना
कैसे फैलता है जीका वायरस
- संक्रमित व्यक्तियों द्वारा असुरक्षित यौन संबंध बनाने से
- संक्रमित व्यक्ति को काटने वाले एडीज मच्छर के काटने से
ऐसे करें बचाव
- बिना मच्छरदानी के न सोएं
- बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें
- स्किन पर चकत्ते दिखें तो अलर्ट हो जाएं
- पूरी बांह का कपड़ा पहनें
- घर में साफ-सफाई पर ध्यान दें