मनरेगा घोटाले के आरोपी को लेकर योगी के मंत्री और विधायक आमने-सामने
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सोनभद्र में मनरेगा में 300 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) राजेश यादव की जिले में तैनाती को लेकर नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव और भाजपा के तीन विधायक आमने-सामने आ गए हैं।
कहा जा रहा है कि राज्यमंत्री यादव ने राजेश को रिश्तेदार बताते हुए सिफारिश कर तैनाती कराई है, वही तीनों विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर बताया है कि जिस मनरेगा घोटाले की सीबीआई जांच कर रही है और राजेश यादव भी आरोपी है।
इस तैनाती से सरकार की प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देने की मंशा को ठेस पहुंचेगी। विधायकों ने ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेंद्र सिंह को भी पूरे मामले से अवगत कराया है।
नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश यादव ने आजमगढ़ निवासी राजेश यादव को इसी सप्ताह अपना रिश्तेदार बताते हुए जौनपुर जिले में तैनात करने की सिफारिश की थी।
हालांकि अभी तक संभल में तैनात राजेश ने फिलहाल जौनपुर में ज्वाइन नहीं किया है लेकिन उनके चहेते उनके आने से पहले ही सक्रिय हो गए। जब यह जानकारी बदलापुर विधायक रमेश चंद्र मिश्र को हुई तो उन्होंने केराकत विधायक दिनेश चौधरी और जफराबाद विधायक डॉ. हरेंद्र प्रसाद सिंह से बातचीत की।
भाजपा के तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा
इसके बाद तीनों विधायकों ने राजेश की तैनाती पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं। मामले को लेकर बदलापुर विधायक मिश्र ने शुक्रवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की। मिश्र ने मुख्यमंत्री को बताया कि राजेश यादव सोनभद्र में 2007 से 2010 के बीच हुए मनरेगा के 300 करोड़ रुपये घोटाले का आरोपी है।
सीबीआई अभी भी इसकी जांच कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि 2005 में भी राजेश यादव बतौर बीडीओ जिले में तैनात था। उस समय करोड़ों की हेराफेरी की गई थी। मिश्र ने कहा है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी को जिले में तैनात होने का हक नहीं है।
ग्राम्य विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेंद्र सिंह ने कहा कि नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने राजेश यादव को अपना रिश्तेदार बताते हुए सिफारिश की थी। उनकी सिफारिश पर ही पोस्टिंग की गई है। अगर कोई आरोप है तो पुनर्विचार किया जाएगा।
वहीं नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि मैं जनप्रतिनिधि हूं। मेरे पास कोई आएगा तो उसकी मदद के लिए मैं सिफारिशी पत्र ही लिखूंगा। कौन क्या है, ऐसा किसी के चेहरे से तो पता नहीं चलता। राजेश यादव के लिए भी चिट्ठी लिखी होगी। पीठ पर नहीं लिखा है।