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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Worship of Mashan Nath with 11 khappar liquor for Tantric Siddhis, sadhana continued all night long

नरमुंडों के साथ साधना: तांत्रिक सिद्धियों के लिए 11 खप्पर शराब के साथ मशान नाथ की उपासना, रातभर चली पूजा

Tue, 14 Nov 2023 10:49 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Tue, 14 Nov 2023 10:49 AM IST
सार

मणिकर्णिका घाट स्थित मशान नाथ मंदिर में मध्यरात्रि विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। बाबा की साधना में तामसी भोग के साथ 11 खप्परों को कारन (शराब) से भरा गया और जलती चिताओं के बीच पूजन संपन्न हुआ। वहीं हरिश्चंद्र घाट पर बाबा मशान नाथ के मंदिर में साधकों ने अनुष्ठान किए।

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Worship of Mashan Nath with 11 khappar liquor for Tantric Siddhis, sadhana continued all night long
कालरात्रि में महानिशा पूजन - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अमावस की काली रात...। महाश्मशान मणिकर्णिका पर जलती चिताओं के बीच साधक मशान को जगा रहे थे। तांत्रिक सिद्धियों की कामना से साधकों ने अनुष्ठान आरंभ किए। चिताओं की आग आसमान छूने को बेकल थी और दीयों की लौ भी झिलमिला रही थी। यहां भी बलि दी गई, लेकिन नींबू की। कुछ ऐसा ही नजारा गंगा पार रेती और हरिश्चंद्र घाट के आसपास भी नजर आया।

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सोमवार को जहां गृहस्थ महालक्ष्मी का स्वागत कर रहे थे, वहीं तांत्रिक सिद्धियों के लिए देवी काली और बाबा भैरव के साथ ही बाबा मशान नाथ की उपासना कर रहे थे। मणिकर्णिका घाट स्थित मशान नाथ मंदिर में मध्यरात्रि विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। बाबा की साधना में तामसी भोग के साथ 11 खप्परों को कारन (शराब) से भरा गया और जलती चिताओं के बीच पूजन संपन्न हुआ। वहीं हरिश्चंद्र घाट पर बाबा मशान नाथ के मंदिर में साधकों ने अनुष्ठान किए।

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दूसरी ओर सिद्धियों की प्राप्ति के लिए तांत्रिक पूरी रात बाबा मशान नाथ के मंदिर से लेकर जलती चिताओं तक तंत्र क्रियाओं को सिद्ध करते रहे। महाश्मशान पर तांत्रिक सिद्धि कर रहे कापालिक बाबा ने बताया कि अमावस की यह रात तंत्र सिद्धि के लिए सर्वोत्तम होती है। जलती चिताओं के बीच शव साधना में महाकाली और शक्ति का आह्वान किया जाता है। तांत्रिक शंकर बाबा ने बताया कि महाश्मशान पर नरमुंडों के साथ शव साधना की जा रही है। तामसिक क्रिया करने के लिए नरमुंडो में खप्पर भरकर 40 मिनट तक आरती उतारी गई। इसके साथ ही नारियल और नींबू की बलि दी गई।

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