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World IBD Day: किशोरों और युवाओं में आंतों में अल्सर की समस्या अधिक, लापरवाही से बढ़ सकता है खतरा

Thu, 19 May 2022 01:03 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 19 May 2022 01:03 PM IST
सार

हर साल 19 मई को विश्व आईबीडी दिवस मनाया जाता है। इसके पीछे का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है। सामान्य रूप से इस बीमारी के कारण का पता नहीं चल पाता है। 

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World IBD Day 2022 Intestinal ulcer problem in teenagers and youth is more carelessness can increase risk
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

विस्तार

आईबीडी यानी इंफ्लामेटेरी बॉवेल डिजीज। इसे आंतों में अल्सर की बीमारी कहते हैं। इस बीमारी में शौच में खून आने, पेट दर्द, बार-बार शौच की समस्या अधिक रहती है। पुरुष और महिलाओं पर इसका एक समान प्रभाव होता है। बीएचयू गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देवेश यादव के मुताबिक, 15 से 35 वर्ष तक के उम्र के किशोरों और युवाओं में यह समस्या अधिक मिल रही है। ऐसे में मरीज समय से अस्पताल पहुंचकर इस बीमारी का इलाज कराएं।

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हर साल 19 मई को विश्व आईबीडी दिवस मनाया जाता है। इसके पीछे का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है। सामान्य रूप से इस बीमारी के कारण का पता नहीं चल पाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीमारी व्यक्ति की रोग-प्रतिकार प्रणाली (शरीर की सुरक्षा प्रणाली) की असामान्य गतिविधि के कारण होता है।
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अनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कारण भी होते हैं। अगर कोई मरीज आईबीडी से पीड़ित पाया जाता है, तो उसे घबराना नहीं चाहिए। डॉ. देवेश ने बताया कि कोरोना संक्रमण अभी है, ऐसे में आईबीडी मरीजों में संक्रमित होने के जोखिम और उनके इलाज प्रबंध की चिंता बढ़ी है। 
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बीएचयू में आईबीडी ओपीडी  का संचालन
बीएचयू अस्पताल में जनवरी 2021 से ही ओपीडी कक्ष 305 में हर गुरुवार को आईबीडी ओपीडी क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। हर बार 30-40 मरीज इससे संबंधित आते हैं। मंगलवार को जनरल ओपीडी में भी लगभग 10 मरीज आईबीडी के आते हैं। आईबीडी से मृत्यु दर 5 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन लापरवाही से खतरा बढ़ सकता है। 

ये हैं आईबीडी के लक्षण 

World IBD Day 2022 Intestinal ulcer problem in teenagers and youth is more carelessness can increase risk
डॉ. देवेश यादव - फोटो : अमर उजाला

डॉ. देवेश यादव ने बताया कि दस्त, पेट में एंठन, शौच में रक्त, वजन, घटना, भूख की कमी और बुखार आईबीडी के लक्षण हैं। इससे पीड़ित मरीजों को तुरंत गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए। तनाव और कुछ खाने की चीजें भी इस बीमारी के लक्षणों में हैं। 

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