नेपाल जल प्रलय: पांच बच्चों के साथ 72 घंटे तक खौफनाक सुरंग में फंसे थे 350 लोग, सेना ने सभी को बचाया; रेस्क्यू
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के दौरान एक ही परिवार के पांच बच्चों समेत 14 लोग 72 घंटे तक खौफनाक सुरंग में फंसे रहे। बताया गया कि सुरंग में करीब 350 लोग फंसे थे। सेना ने रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
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नेपाल जल प्रलय के दौरान रसुआ के सुरंग में 350 सदस्य फंसे रहे। सेना ने 72 घंटे बाद पांच बच्चों समेत 350 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। एक ही परिवार के 14 लोग भी तीन दिन तक सुरंग में फंसे रहे।
खुद को सुरक्षित मानकर सभी सदस्य अचंभित थे और सिर्फ पशुपतिनाथ को याद कर रहे थे। खौफ के 72 घंटे में बच्चों की तबीयत खराब हुई और अन्य सदस्य भी अचेत हो गए। सेना ने सभी का प्राथमिक उपचार कराया। ब्रह्माघाट की रहने वाली सीता घिमिरे ने बताया कि रसुआ में उनका ननिहाल है।
तीनों मामा का परिवार 5 बच्चों समेत 14 लोगों के साथ सुरंग में फंस गया था। जल प्रलय की खबर मिलने के बाद से मन अशांत हो गया। मामा, मामी और उनके बच्चों से बात नहीं हो सकी। मोबाइल नेटवर्क ही खत्म हो गया था।
इस बीच टीवी और सोशल मीडिया पर मिल रही जानकारियां हर समय डरा रही थीं। कंट्रोल नंबर से मामा के परिवार से बात हो सकी। सीता ने बताया कि भतीजा कैलाश मानसरोवर की यात्रा करवाता है। वह जल प्रलय वाले दिन ही शाम को निकलने वाला था लेकिन सुबह तबाही हो गई। सीता ने बताया कि पिता संस्कृत के प्रोफेसर थे।
रास्ते बंद, फोन भी ठप, लगा कि सिर पर मंडरा रही है मौत
रास्ते बंद हो गए थे और मोबाइल फोन भी ठप हो गए थे। घंटों मौत के साए में फंसे रहे। समझ में नहीं आ रहा था कि बचेंगे या नहीं। नेपाल त्रासदी में बचकर लौटे तीर्थयात्रियों ने पीडीडीयू जंक्शन पर ये बातें कहीं। शनिवार को महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्रियों का जत्था पटना-पुणे एक्सप्रेस से नागपुर के लिए रवाना हुआ।
पुणे से तीर्थयात्री पशुपतिनाथ मंदिर में शिव महापुराण की कथा सुनने गए थे। बुधवार को सुबह रसुवा की भोटेकोशी/ त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन प्रभावित हुए। दहशत के बीच लोग रास्ते में घंटों फंसे रहे। रक्सौल बॉर्डर पहुंचे तब सुरक्षित भारत पहुंचने की उम्मीद जगी।