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World Health Day: मशीनें मंगा रहे, इलाज के लिए विशेषज्ञ नहीं; मंडलीय अस्पताल में दो साल से अटका है ये काम

Mon, 07 Apr 2025 03:32 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 07 Apr 2025 03:32 PM IST
सार

स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूकता  के उद्देश्य से हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम स्वस्थ शुरुआत आशापूर्ण भविष्य है।  

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World Health Day Machines being ordered but no experts for treatment
मंडलीय अस्पताल में मरीजों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

World Health Day: स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, खून की जांच के लिए मशीनें तो मंगवा रहा है, लेकिन अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी के कारण जांच की समस्या बनी हुई है। साथ ही मंडलीय अस्पताल में बनने वाले पांच मंजिला सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का काम भी पिछले दो साल से अटका है।

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जिले में जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं होनी चाहिए वैसी नहीं हैं। जिले में बीएचयू को छोड़कर पांच सरकारी अस्पताल (मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, महिला अस्पताल, जिला अस्पताल, शास्त्री अस्पताल रामनगर, एमसीएच विंग जिला अस्पताल) और 64 स्वास्थ्य केंद्र हैं।
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इन स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना 8 हजार से अधिक मरीज आते हैं। इसमें हृदय रोग, किडनी रोग, गैस्ट्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी जैसी गंभीर बीमारी वाले मरीजों को कई बार जांच के अभाव में निराश लौटना पड़ता है। नियमित सेवा देने के लिए यहां रेडियोलॉजिस्ट भी नहीं हैं।
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लिहाजा एक रेडियोलॉजिस्ट को दो-दो अस्पताल में सेवा देनी पड़ रही है। गंभीर समस्या होने पर मरीज बीएचयू अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाते हैं। मंडलीय अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के लिए पांच मंजिला सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनाया जाना है। इसके लिए शासन की ओर से धन स्वीकृत होने के बाद भी दो साल से काम शुरू नहीं हो पाया है।

नहीं हैं प्लास्टिक सर्जन
जिले में गर्मी में आग लगने से झुलसने वालों की संख्या बढ़ जाती है। बर्न केस वाले मरीजों को इलाज के लिए प्लास्टिक सर्जन तक नहीं मिल पाते हैं। दस साल से अधिक समय हो जाने के बाद भी जिले में अब तक किसी प्लास्टिक सर्जन की तैनाती नहीं हुई है।

ऐसे में बिना प्लास्टिक सर्जन के ही बर्न केस वाले मरीजों का उपचार कराया जाता है। मंडलीय अस्पताल और बीएचयू को छोड़कर किसी और दूसरे सरकारी अस्पताल में बर्न यूनिट भी नहीं है। केवल मंडलीय अस्पताल में ही 20 बेड की बर्न यूनिट है। 

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