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UP: सरकारी स्कूलों में क्यों कम हो रहे बच्चे..., समस्या पर हुआ संवाद; अनधिकृत स्कूलों पर कार्रवाई की मांग

Sun, 23 Mar 2025 12:48 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 23 Mar 2025 12:48 PM IST
सार

गली-गली में खुल रहे प्राइवेट स्कूलाें के प्रति लोगों में गुस्सा है। अमर उजाला कार्यालय में आयोजित चर्चा के दाैरान लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी। कहा कि शिक्षा के नाम पर अब सिर्फ व्यवसाए किए जा रहे हैं।

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Why number of children decreasing in government schools  discussion on problem in varanasi
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में गणमान्य लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी स्कूलों में बच्चों की कम होती संख्या के लिए मुख्य रूप से गली-गली में चल रहे अनधिकृत विद्यालय जिम्मेदार हैं। यह समाज के लिए नासूर हैं, यह आने वाली पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं। 

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यह बात निवेदिता शिक्षा सदन की प्रिंसिपल आनंद प्रभा ने शनिवार को चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित चर्चा में कहीं। दूसरे शिक्षकों ने इस पर हामी भरते हुए कहा कि इस ओर बहुत काम होने की जरूरत है। इस तरह के विद्यालयों पर कार्रवाई होना बहुत जरूरी है। सभी ने सरकार के कायाकल्प, प्रोजेक्ट अलंकार समेत अन्य प्रयासों की सराहना की।

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एडेड विद्यालयों की नीतियों पर भी सरकार विचार करें, उन्हें अनुदान दें। शिक्षा समाज की रीढ़ है। जहां प्रबंधन अच्छा है वहां संस्थान अच्छे चल रहे हैं और जहां प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा, वहां व्यवस्थाएं खराब हैं। - आनंद प्रभा, प्रिंसिपल, निवेदिता शिक्षा सदन

संसाधनों की कमी है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौतीपूर्ण है। कोविड के बाद से छात्रावास बंद होने से भी छात्रों की संख्या कम हुई। हर सरकारी विद्यालय के पास  निजी स्कूल खुलना भी इसका एक बड़ा कारण है। - रमेश प्रताप सिंह, प्रिंसिपल, यूपी कॉलेज

खेल में पैसा आ रहा है, लेकिन तरह-तरह की बंदिश भी है कि इस मद में इतना ही खर्च कर सकते हैं, इतना नहीं। इससे संतुलन बिगड़ा है। छात्रों की संख्या कम होने का कारण शिक्षकों का कम होना भी है।  - दीपा, प्रिंसिपल, लोकबंधु राजनारायण राजकीय बालिका इंटर कॉलेज  

कक्षा 9 से 10 तक की फीस 16 रुपये महीने और कक्षा 9 से इंटर तक की फीस 21 रुपये महीने है। यह 2010 में निर्धारित हुई थी। तभी से यह क्रम चल रहा है। इस नीति में बदलाव बहुत ही ज्यादा  जरूरी है। - डॉ. प्रतिभा यादव, प्रिंसिपल, आर्य महिला इंटर कॉलेज

आर्थिक रूप से मजबूत अभिभावक सरकारी विद्यालयों में बच्चों को नहीं भेज रहे हैं। सरकार से निवेदन है कि जिस क्षेत्र में पहले से पुराना स्कूल है उसके आसपास निजी स्कूल खोलने की अनुमति न दी जाए। - गोपाल, शिक्षक, भारत सेवक समाज

केंद्रीय विद्यालय में बजट की कमी नहीं है। इसलिए चुनौतियां कम है। शिक्षकों की भी कमी नहीं है। हर वर्ग का बच्चा पढ़ाई कर रहा है। आरटीई के तहत भी लगातार एडमिशन हो रहे हैं। - डॉ. चंद्रभूषण प्रकाश वर्मा, केंद्रीय विद्यालय, कैंट

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