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जब प्रत्याशी होकर भी श्यामलाल यादव को रिक्शे को लगाना पड़ा था धक्का
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आज के समय में जहां प्रत्याशी घोषित होने से पूर्व नेता रुआब दिखाने लगते हैं। वहीं पहले कई ऐसे नेता थे जो अपनी सादगी के लिए चर्चित रहें हैं। इन्हीं में से एक थे श्यामलाल यादव। पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे श्यामलाल के बेटे अरुण यादव बताते हैं कि एक समय बनारस की राजनीति में पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद मेरे पिताजी का बड़ा नाम था। प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी श्यामलाल यादव अपने साथियों को रिक्शे पर बैठाकर धक्का लगाते थे।
एक बार वाराणसी की मुगलसराय सीट से विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी घोषित होने के बाद उनकी सभा मुगलसराय क्षेत्र में लगी थी। वे और उनके दो साथियों ने एक रिक्शा किया जिससे जाकर वहां सभा करते और वापस लौट आते। लेकिन जिस रास्ते से जाना था। वह काफी खराब और पथरीला था। रिक्शे वाले ने मना कर दिया कि रिक्शा नहीं चला पाएंगे। तब पिताजी और उनके साथियों ने तय किया कि रिक्शे पर दो लोग बैठेंगे और एक लोग पीछे से धक्का लगाएंगे। रिक्शा चालक रिक्शा चलाएगा तो उसे परेशानी कम होगी। पिताजी के साथियों ने कहा कि आप प्रत्याशी हैं आप रिक्शे पर बैठे जाइए, हम लोग धक्का लगाते हैं। पिताजी ने कहा कि जो व्यवस्था तय की गई है वहीं लागू होगी। बारी बारी से रिक्शे पर दो लोग बैठते थे और एक व्यक्ति रिक्शे को पीछे से धकेलता था। मेरे पिताजी की बारी आई तो उन्होंने भी अपने दो साथियों को रिक्शे पर बैठाया और उसे धकेला था। जब वे मंत्री बने तो उनके साथी अक्सर उस घटना की चर्चा करते थे। उन्होंने बताया कि पिताजी 1957, 1967 में मुगलसराय विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते थे। प्रदेश सरकार में 1968 से 69 तक कैबिनेट मंत्री थे। कांग्रेस के बाद वे 1967 में बीकेडी में चले गए थे।
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एक बार वाराणसी की मुगलसराय सीट से विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी घोषित होने के बाद उनकी सभा मुगलसराय क्षेत्र में लगी थी। वे और उनके दो साथियों ने एक रिक्शा किया जिससे जाकर वहां सभा करते और वापस लौट आते। लेकिन जिस रास्ते से जाना था। वह काफी खराब और पथरीला था। रिक्शे वाले ने मना कर दिया कि रिक्शा नहीं चला पाएंगे। तब पिताजी और उनके साथियों ने तय किया कि रिक्शे पर दो लोग बैठेंगे और एक लोग पीछे से धक्का लगाएंगे। रिक्शा चालक रिक्शा चलाएगा तो उसे परेशानी कम होगी। पिताजी के साथियों ने कहा कि आप प्रत्याशी हैं आप रिक्शे पर बैठे जाइए, हम लोग धक्का लगाते हैं। पिताजी ने कहा कि जो व्यवस्था तय की गई है वहीं लागू होगी। बारी बारी से रिक्शे पर दो लोग बैठते थे और एक व्यक्ति रिक्शे को पीछे से धकेलता था। मेरे पिताजी की बारी आई तो उन्होंने भी अपने दो साथियों को रिक्शे पर बैठाया और उसे धकेला था। जब वे मंत्री बने तो उनके साथी अक्सर उस घटना की चर्चा करते थे। उन्होंने बताया कि पिताजी 1957, 1967 में मुगलसराय विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते थे। प्रदेश सरकार में 1968 से 69 तक कैबिनेट मंत्री थे। कांग्रेस के बाद वे 1967 में बीकेडी में चले गए थे।
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