रिटायर हुए तो घर के सदस्यों को ही कर दिया नियुक्त, संस्कृत विश्वविद्यालय से जुड़े महाविद्यालयों में जांच शुरू
- महाविद्यालयों में नियुक्तियों में हुआ है भाई-भतीजावाद
- जांच कमेटी ने जांच तो की लेकिन नहीं सौंपी अपनी रिपोर्ट
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प्राचार्य रिटायर हुए तो उनका बेटा उसी महाविद्यालय में नियुक्त हो गया। मैनेजमेंट कमेटी ने घर के लोगों की ही नियुक्तियां अपने-अपने महाविद्यालयों में कर दीं। यह शिकायतें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जुड़े संबद्ध महाविद्यालयों की हैं। इन मामलों में जांच कमेटी तो बनी लेकिन उसने रिपोर्ट तक नहीं बनाई।
प्राच्य विद्या के संवर्धन और संपोषण के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में कई सालों से नियुक्तियों में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। जगह-जगह नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद और परिवारवाद का आरोप था।
महाविद्यालयों में होने वाली नियुक्तियों में प्रबंधन की मिलीभगत से मनमाने ढंग से नियुक्तियां की गईं। इसकी शिकायतें राजभवन से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक हुईं। मामले को संज्ञान में लेकर जांच कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने जांच भी की लेकिन रिपोर्ट ही नहीं सौंपी। ऐसे कई मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
शासन ने जब विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों की नियुक्तियों के जांच के आदेश दिए हैं तो नियुक्तियों में हुईं अनियमितताओं के मामले खुलेंगे। वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मऊ, सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही समेत पूर्वांचल के कई जिलों के संस्कृत महाविद्यालयों की गड़बड़ियां सामने आने की संभावना है।