इंजीनियर बनते-बनते समाज का विलेन बन गया विनय; परिजन बोले- राजनीति का शिकार हो रहा बेटा
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मुंबई के बांद्रा में भीड़ जुटाने के आरोपी विनय दुबे के पिता ने कहा कि उनका बेटा राजनीति का शिकार हो रहा है। परिजनों का कहना है कि बांद्रा में जुटी भीड़ से उसका कोई लेना-देना नहीं है। अमर उजाला ने मुंबई में विनय के पिता जटाशंकर से संपर्क साधा तो उन्होंने फोन अपने दूसरे बेटे निर्भय को दे दिया।
निर्भय ने कहा कि हमारे भाई को राजनीति का शिकार बना दिया गया है। उन्होंने जो पोस्ट की थी, उसमें 18 अप्रैल को पैदल निकलने की बात कही थी, जबकि यह भीड़ 15 को ही एकत्र हो गई। इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। बाद की पोस्ट को भी अगर देखा जाए तो वह पोस्ट शाम के चार बजे की गई है, जबकि बांद्रा में भीड़ सुबह 10 बजे से ही लगनी शुरू हो गई थी। उनके साथ राजनीति हो रही है।
भदोही जिले के औराई क्षेत्र के हरिनारायणपुर गांव निवासी जटाशंकर दुबे मुंबई में ऑटो चलाते हैं। विनय दूबे अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा है। विनय की पैदाइश और पढ़ाई मुंबई में ही हुई है। चार भाइयों में सबसे बड़ा विनय मुंबई से बीई कर रहा था, लेकिन प्रथम वर्ष में फेल होने के कारण पढ़ाई छोड़कर समाजसेवा की ओर मुड़ गया। तीन छोटे भाई निर्भय, अभय और अजय माता-पिता के साथ मुंबई में ही रहते हैं और पढ़-लिखकर विभिन्न कंपनियों में जॉब करते हैं। ताऊ रविशंकर कहते हैं कि एक बार उसे समझाया था कि वह राजनीति वगैरह के चक्कर में न पड़े, लेकिन नहीं माना।
विनय के पिता ने कहा कि उनका बेटा कुछ समाज के लिए करना चाहता था। 2012 में वाराणसी शहर उत्तरी से विधानसभा का चुनाव एनसीपी के टिकट पर लड़ा था।
सफलता नहीं मिली तो पार्टी छोड़कर महाराष्ट्र में उत्तर भारतीय महापंचायत नाम से स्वयंसेवी संगठन बनाकर समाजसेवा में जुट गया। लेकिन, राजनीतिक से मोहभंग अब भी नहीं हुआ था। पिछले लोकसभा चुनाव में मुंबई के कल्याण सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गया, मगर फिर हार का सामना करना पड़ा।
इस बीच मुंबई में उत्तर भारतीयों की अगुवाई करने की हसरत को लॉकडाउन में मुफीद मौका मिल गया और वह सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप आदि के जरिए लंबे-चौड़े पोस्ट कर मुंबई में उत्तर भारतीयों की नुमाइंदगी करने की राह पर चल पड़ा। इस बीच उसके एक पोस्ट ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा कर रख दी। आरोप है कि उसकी पोस्ट के कारण ही बड़ी तादाद में उत्तर भारतीय लोग बांद्रा में एकत्र हुए और लॉकडाउन तार-तार हो गया।