लेखक नितिन गोखले बोले: पिछली सरकार ने खुफिया एजेंसियों को किया शक्तिहीन, इसलिए 2004 से 14 तक हुए देश में बम ब्लास्ट
विजय दिवस की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में लेखक नितिन गोखले ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में जो बम ब्लास्ट हुए वह इस बात का प्रमाण है कि तत्कालीन सरकार ने रॉ सहित देश की खुफिया एजेंसियों को शक्तिहीन कर दिया था।
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विजय दिवस की 50वीं वर्षगांठ पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में काशी मंथन की ओर से विशेष व्याख्यान में बांग्लादेश की स्वतंत्रता में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के योगदान और चीन की भूमिका पर चर्चा की गई। बतौर मुख्य वक्ता लेखक नितिन अनंत गोखले ने कहा कि गुप्तचर सेवाएं कृतघ्न सेवा है।
इसमें काम करने वाले लोगों को सेना या अन्य सुरक्षाकर्मियों की तरह अपने शौर्य के लिए तारीफ नहीं मिलती। वह अकसर गुमनाम रहते हैं। जरूरत है कि चीन के बारे में अध्ययन करने के लिए युवा आगे आएं। बीएचयू के कामधेनु सभागार में गोखले ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच देश में जो बम ब्लास्ट हुए वह इस बात का प्रमाण है कि तत्कालीन सरकार ने रॉ सहित देश की खुफिया एजेंसियों को शक्तिहीन कर दिया था।
हमारी चुनौती पाकिस्तान नहीं चीन
आज देश के सभी खुफिया एवं गुप्तचर विभाग तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। जिसके फलस्वरूप हम आज सुरक्षित हैं। गोखले ने कहा कि हम पाकिस्तान पर ज्यादा समय एवं संसाधन जाया कर रहे हैं। हमारी चुनौती पाकिस्तान नहीं चीन है। चीन की भाषा, शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक आचरण योजना पर ज्यादा से ज्यादा अध्ययन एवं शोध करना चाहिए।
कोरोना एक बायोलॉजिकल वार
कहा कि कोरोना एक बायोलॉजिकल वार है। भारत ने वैक्सीन खोज कर इसे नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है। चीन के बायोलॉजिकल या इंफॉर्मेशन वारफेयर के लिए अपने सुरक्षा तंत्र सहित गुप्तचर सेवाओं को बढ़ाने की आवश्यकता है।
अध्यक्षता छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह ने किया। इस दौरान प्रो. डीसी राय, डॉ. बाला लखेंद्र, डॉ. धीरेंद्र राय, डॉ. सत्येंद्र तिवारी, डॉ. मयंक नारायण सिंह, डॉ. पंकज सिंह, डॉ. सुमिल, हर्षित श्याम के साथ ही 39 जीटीसी के ब्रिगेडियर राजीव नाग्याल मौजूद रहे।