वाराणसी: 24 घंटे में 105 मिमी बारिश से बढ़ी परेशानी, सड़कों पर जलभराव से मुसीबत, गंगा का फिर बढ़ने लगा जलस्तर
वाराणसी में दो दिन से लगातार बारिश हो रही है। जिससे सड़कों पर जलभराव हो गया है। साथ ही हवा भी शुद्ध हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तीन दिन और रुक-रुककर बारिश होती रहेगी।
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वाराणसी में बारिश की वजह से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। पिछले 24 घंटे में मौसम विभाग ने 105 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड किया है,जो कि इस मानसूनी बारिश में 24 घंट में रिकार्ड है। बारिश के साथ-साथ तेज हवा चलने से कई जगहों पर पेड़ टूट कर सड़क पर गिर गए, जिसकी वजह से आवागमन भी बाधित रहा।
उधर बीएचयू अस्पताल परिसर सहित शहर में कई जगहों पर जलभराव से भी लोगो को परेशान होना पड़ा। सबसे ज्यादा समस्या बिजली कटौती की है।शहरी और ग्रामीण इलाकों में जगह जगह लोकल फाल्ट,तार टूटकर गिरने की वजह से बिजली आपूर्ति भी बाधित है।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बारिश से जहां अरहर और तिलहन की फसल को फायदा होगा वही सब्जियों की खेती को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में ज्यादा पानी लगने की वजह से बहुत सारी सब्जियां पानी में डूब गई हैं। मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय के मुताबिक अभी दो दिन तक ऐसे ही मौसम बने रहने के आसार है।
पिछले सप्ताह तेज धूप, हवा न चलने से परेशान लोगों को इस सप्ताह के शुरुआत से ही राहत मिल रही है। नम हवाओं के चलने के साथ ही रुक रुककर बारिश भी हो रही है। बुधवार को दिन भर धूप नहीं निकली। तेज हवा के साथ ही बारिश भी होती रही। हालांकि शाम को कुछ देर के लिए बारिश की रफ्तार कम जरूर हुई, लेकिन रात करीब साढ़े आठ बजे झमाझम बारिश फिर शुरू हुई करीब एक घंटे से अधिक समय तक तेज बारिश हुई।
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इस वजह से नदेसर, अंधरापुल, रविंद्रपुरी, सिगरा, लहुराबीर, भेलूपुर, महमूरगंज, गोदौलिया, चेतगंज, भोजुबीर, नरिया सहित कई इलाकों में जलभराव हो गया। इससे नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल गई है।
बीएचयू अस्पताल में जलभराव से मरीजों को सांसत
बुधवार से हो रही बारिश से बीएचयू अस्पताल में भी जलभराव हो गया है, इस वजह से मरीजों को सांसत झेलनी पड़ रही है। इसमें बाले रोग विभाग के पास से लेकर इमरजेंसी तक जाने वाली सड़क पर पानी इतना भर गया है कि उसमें पैदल जाना तो दूर गाड़ियों से भी मरीज, परिजन बड़ी मुश्किल से इमरजेंसी तक पहुंच सके।
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टूटकर गिरी पेड़ की डालियां, होर्डिंग्स से आवागमन बाधित
मंगलवार को रात और बुधवार को दिन में चली तेज हवा की वजह से कई जगहों पर पेड़ों की डालियां टूटकर गिर गई। इस वजह से आवागमन बाधित रहा। इसमें जेएचवी माल के पास और रथयात्रा के पास भी पेड़ की डालिया टूटकर गिर गई। भिखारीपुर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाए गए हेरिटेज लाइट के साथ ही होर्डिंग्स टूटकर सड़क पर गिरा रहा। इस वजह से इधर से आने जाने वाले लोगों को परेशान होना पड़ा। उधर ग्रामीण इलाकों में भी कई जगह पेड़ टूटकर गिर गए। रामेश्वर-जंसा पंचकोशी मार्ग पर पेड़ गिरने से देर शाम यातायात अवरुद्ध हो गया। चौकी प्रभारी रामेश्वर घटना स्थल पर पहुंच कर वन विभाग को सूचना दी। ग्रामीणों ने डाल को काटकर घंटे भर बाद आवागमन शुरू कराया।
टूटे बिजली के तार, लोकल फाल्ट ने किया परेशान
बारिश की वजह से सबसे अधिक परेशानी बिजली कटौती से हुई। बिरदोपुर, महमूरगंज में पोल के पास पेड़ से तार टकराने की वजह से बहुत देर तक आपूर्ति बाधित रही। इसके अलावा जेएचवी माल के पास भी पेड़ की डाली गिरने से तार टूटकर गिर गया। इस वजह से बिजली गुल रही। लोगों ने जब बिजली विभाग को सूचना दी तो मौके पर पहुंचकर बिजली विभाग के कर्मचारियों ने तार को जोड़ा।
हालांकि बारिश की वजह से उन्हें कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
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करीब आधे घंटे के अथक प्रयास के बाद किसी तरह आपूर्ति बहाल कराई। इसके अलावा डीआईजी कालोनी, हुकुलगंज, मंडुवाडीह, लहरतारा, चेतगंज, सिंधुरिया कालोनी आदि इलाकों में भी कटौती से घरों में अंधेरा छाया रहा। बिजली कटौती से घरों में अंधेरा छाया रहा। कहीं तेज हवा संग पेड़ की डाली टूटक र गिरने से तार टूट गया तो कहीं लोकल फाल्ट की वजह से कटौती जारी रही। आपूर्ति बहाल कराने में बिजली विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में बुधवार को तेज हवा और बारिश से बिजली व्यवस्था ध्वस्त रही। इस वजह से पेयजल की समस्या भी हुई।
धान, अरहर के लिए फायदेमंद, सब्जियों को नुकसान
बीते दो दिनों से हो रही तेज हवा के साथ बारिश खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान, अरहर और तिल के लिए फायदेमंद है तो वहीं सब्जी की खेती के नुकसानदायक है। कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र रघुवंशी कहते हैं, धान की फसल दुग्धावस्था में जिसे इस बारिश से भरपूर मात्रा में नाइट्रोजन की उपलब्धता होगी। अरहर और तिल की फसलों पर बारिश ज्यादा प्रभाव नहीं होगा। जबकि सब्जियों के लिए ये बारिश घातक है। जिससे बचाव के लिए किसान अपने खेत से जमा पानी को निकालने की उचित व्यवस्था रखें।