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शहर में कंडम वाहनों की भरमार, सड़कों पर समस्याएं अपार
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वाराणसी। वाहनों के 15 साल की उम्र पूरी करने और उसके बाद पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराने वाले डेढ़ लाख से ज्यादा वाहन वाराणसी की सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
ओवरएज वाहनों के कंडम घोषित नहीं होने से सड़कों पर दुर्घटना से लेकर प्रदूषण तक की समस्या बनी रहती है। शहर की सड़कों पर दौड़ रहे डेढ़ लाख कंडम वाहन भी बनारस का दम घोंट रहे हैं। बात करें आंकड़ों की तो जिले की सड़कों पर दस लाख से अधिक वाहन दौड़ते हैं और हर साल इसमें 20 फीसदी की बढ़ोतरी भी होती जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से प्रस्तावित नई वाहन नीति के बाद बनारस को भी कंडम वाहनों से निजात की उम्मीद है। दरअसल, 15 वर्ष आयु पूरा कर चुके वाहन स्वामियों को समय-समय पर परिवहन विभाग की ओर से वाहनों के फिटनेस के लिए नोटिस जारी किया जाता है। वर्तमान में एक लाख 48 हजार वाहन कंडम होने के कगार पर हैं। इसमें 70 फीसदी वाहनों के पंजीकरण निरस्त हैं। मगर, वाहन स्वामी जुगाड़ से फिटनेस कराकर पांच साल के लिए पंजीकरण का नवीनीकरण करा रहे हैं। यहां बता दें कि नई वाहन नीति में पुराने वाहन को स्क्रैप कर नया वाहन खरीदने पर पंजीकरण शुल्क में 25 फीसदी तक छूट का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके साथ ही एक्स शोरूम कीमत पर भी पांच फीसदी छूट मिलने की उम्मीद है।
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20 साल हैं निजी वाहनों की आयु
निजी वाहनों के पंजीकरण 15 साल के लिए किए जाते हैं और इसके बाद उनके फिटनेस का प्रावधान है। परिवहन विभाग में फिटनेस लेकर पांच साल के लिए इनका पंजीकरण और बढ़ाया जाता है। जबकि व्यावसायिक वाहन 10 साल के लिए पंजीकृत होते हैं और फिटनेस के बाद पांच साल इनकी उम्र और बढ़ने का प्रावधान है। वाराणसी में इस वक्त एक लाख 48 हजार वाहन कंडम घोषित होने के कगार पर हैं। मगर, परिवहन विभाग के नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई लंबित है।
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प्रदूषण का बड़ा कारण ओवरएज वाहन
शहर में वाहनों के प्रदूषण जांच के लिए 52 केंद्र अधिकृत हैं। मगर, कागजी खानापूर्ति और लापरवाही के चलते ज्यादातर वाहनों की प्रदूषण जांच ही नहीं कराई जाती है। जबकि वाहनों से नाइट्रोजन और कार्बन डाई आक्साइड के साथ सड़कों की धूल भी उड़ती है। वाराणसी में औसतन पीएम 2.5 का स्तर 325 से 400 तक पहुंच रहा है। जबकि नाइट्रोजन आक्साइड की अधिकतम मात्रा 27 और ओजोन की 65 तक रही है। इसके पीछे बड़ा कारण सड़कों पर बढ़ते वाहनों की संख्या भी है।
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कंडम वाहनों को नोटिस जारी किया जाता है और उनके पंजीयन को भी निरस्त किया जा रहा है। प्रतिमाह 30 से 50 वाहनों का पंजीयन निरस्त किया जा रहा है। इस कार्रवाई को तेज किया जाएगा।
- सर्वेश कुमार चतुर्वेदी, एआरटीओ प्रशासन
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एक नजर में
वाराणसी में कुल वाहनों की संख्या - 10.50 लाख
कंडम के कगार पर पहुंचे वाहन - 1.48 लाख
निजी वाहनों की उम्र - 15 साल और पांच साल की और बढ़ोतरी
व्यावसायिक वाहनों की उम्र - 10 साल और पांच साल की और बढ़ोतरी
प्रदूषण जांच केंद्र - 52
नाइट्रोजन की मात्रा - 27
ओजोन - 65
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ओवरएज वाहनों के कंडम घोषित नहीं होने से सड़कों पर दुर्घटना से लेकर प्रदूषण तक की समस्या बनी रहती है। शहर की सड़कों पर दौड़ रहे डेढ़ लाख कंडम वाहन भी बनारस का दम घोंट रहे हैं। बात करें आंकड़ों की तो जिले की सड़कों पर दस लाख से अधिक वाहन दौड़ते हैं और हर साल इसमें 20 फीसदी की बढ़ोतरी भी होती जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से प्रस्तावित नई वाहन नीति के बाद बनारस को भी कंडम वाहनों से निजात की उम्मीद है। दरअसल, 15 वर्ष आयु पूरा कर चुके वाहन स्वामियों को समय-समय पर परिवहन विभाग की ओर से वाहनों के फिटनेस के लिए नोटिस जारी किया जाता है। वर्तमान में एक लाख 48 हजार वाहन कंडम होने के कगार पर हैं। इसमें 70 फीसदी वाहनों के पंजीकरण निरस्त हैं। मगर, वाहन स्वामी जुगाड़ से फिटनेस कराकर पांच साल के लिए पंजीकरण का नवीनीकरण करा रहे हैं। यहां बता दें कि नई वाहन नीति में पुराने वाहन को स्क्रैप कर नया वाहन खरीदने पर पंजीकरण शुल्क में 25 फीसदी तक छूट का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके साथ ही एक्स शोरूम कीमत पर भी पांच फीसदी छूट मिलने की उम्मीद है।
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20 साल हैं निजी वाहनों की आयु
निजी वाहनों के पंजीकरण 15 साल के लिए किए जाते हैं और इसके बाद उनके फिटनेस का प्रावधान है। परिवहन विभाग में फिटनेस लेकर पांच साल के लिए इनका पंजीकरण और बढ़ाया जाता है। जबकि व्यावसायिक वाहन 10 साल के लिए पंजीकृत होते हैं और फिटनेस के बाद पांच साल इनकी उम्र और बढ़ने का प्रावधान है। वाराणसी में इस वक्त एक लाख 48 हजार वाहन कंडम घोषित होने के कगार पर हैं। मगर, परिवहन विभाग के नोटिस के बाद आगे की कार्रवाई लंबित है।
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प्रदूषण का बड़ा कारण ओवरएज वाहन
शहर में वाहनों के प्रदूषण जांच के लिए 52 केंद्र अधिकृत हैं। मगर, कागजी खानापूर्ति और लापरवाही के चलते ज्यादातर वाहनों की प्रदूषण जांच ही नहीं कराई जाती है। जबकि वाहनों से नाइट्रोजन और कार्बन डाई आक्साइड के साथ सड़कों की धूल भी उड़ती है। वाराणसी में औसतन पीएम 2.5 का स्तर 325 से 400 तक पहुंच रहा है। जबकि नाइट्रोजन आक्साइड की अधिकतम मात्रा 27 और ओजोन की 65 तक रही है। इसके पीछे बड़ा कारण सड़कों पर बढ़ते वाहनों की संख्या भी है।
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कंडम वाहनों को नोटिस जारी किया जाता है और उनके पंजीयन को भी निरस्त किया जा रहा है। प्रतिमाह 30 से 50 वाहनों का पंजीयन निरस्त किया जा रहा है। इस कार्रवाई को तेज किया जाएगा।
- सर्वेश कुमार चतुर्वेदी, एआरटीओ प्रशासन
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एक नजर में
वाराणसी में कुल वाहनों की संख्या - 10.50 लाख
कंडम के कगार पर पहुंचे वाहन - 1.48 लाख
निजी वाहनों की उम्र - 15 साल और पांच साल की और बढ़ोतरी
व्यावसायिक वाहनों की उम्र - 10 साल और पांच साल की और बढ़ोतरी
प्रदूषण जांच केंद्र - 52
नाइट्रोजन की मात्रा - 27
ओजोन - 65