{"_id":"5f70f0b48ebc3e9baf5cdc8e","slug":"varanasi-ramleel-in-ramnagar-city-news-vns5497397164","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामनगर किले में ही होंगे लीला के सांकेतिक आयोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामनगर किले में ही होंगे लीला के सांकेतिक आयोजन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में इस पर लीला तो नहीं होगी, लेकिन परंपरानुसार पूजन और आरती संपन्न की जाएगी। किला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि रामलीला के जो भी आयोजन होंगे वह पूरी तरह से निजी होंगे।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भी कुंवर अनंत नारायण सिंह को पत्र भेजा गया है और उसमें संभावनाओं के बारे में जानकारी मांगी गई है। हालांकि अभी तक ना तो स्वरूपों का चयन हुआ और ना ही गणेश पूजन। कोरोना संक्रमण से उबरने केबाद कुंवर अनंत नारायण सिंह भी लौट आए हैं लेकिन उन्होंने भी अभी तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया है। फिलहाल जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक जो भी आयोजन होगा वह एकदम निजी होगा। अगर किसी दबाव में बदलाव नहीं हुआ तो तय है कि मुकुट पूजा और नियमित आरती रामनगर किले में या रामबाग में होगी। इसमें किसी बाहरी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केवल रामलीला से जुड़े लोग ही इस दौरान उपस्थित रहेंगे। रामायणियों द्वारा मानस का पाठ किया जाएगा। इस बार जब रासलीला स्थगित हुई थी तो दुर्गा मंदिर पर अनंत नारायण सिंह ने कृष्ण झूले का पूजन और एक ब्राह्मण को भोज कराया था। ऐसा ही कुछ रामलीला के स्थगन के बाद होने जा रहा है।
रामलीला प्रेमी रामलीला न होने से खासे निराश हैं लेकिन वे भी परंपराओं के पालन के लिए तैयार हैं। अधिकांश लीला नेमियों का कहना है कि रामलीला हो न हो वे महीने भर रामनगर जरूर जाएंगे। जिस दिन जहां की लीला का प्रसंग होगा उस दिन वहीं पर प्रभु की भक्ति करेंगे और आरती कर वापस आएंगे। जब से रामलीला शुरू हुई है उसके बाद इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि महामारी के चलते रामलीला रद्द हुई है। बता दें 30 सितंबर से रामनगर में विश्वप्रसिद्ध श्रीराम लीला शुरू होनी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार की तरफ से भी कुंवर अनंत नारायण सिंह को पत्र भेजा गया है और उसमें संभावनाओं के बारे में जानकारी मांगी गई है। हालांकि अभी तक ना तो स्वरूपों का चयन हुआ और ना ही गणेश पूजन। कोरोना संक्रमण से उबरने केबाद कुंवर अनंत नारायण सिंह भी लौट आए हैं लेकिन उन्होंने भी अभी तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया है। फिलहाल जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक जो भी आयोजन होगा वह एकदम निजी होगा। अगर किसी दबाव में बदलाव नहीं हुआ तो तय है कि मुकुट पूजा और नियमित आरती रामनगर किले में या रामबाग में होगी। इसमें किसी बाहरी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केवल रामलीला से जुड़े लोग ही इस दौरान उपस्थित रहेंगे। रामायणियों द्वारा मानस का पाठ किया जाएगा। इस बार जब रासलीला स्थगित हुई थी तो दुर्गा मंदिर पर अनंत नारायण सिंह ने कृष्ण झूले का पूजन और एक ब्राह्मण को भोज कराया था। ऐसा ही कुछ रामलीला के स्थगन के बाद होने जा रहा है।
विज्ञापन
रामलीला प्रेमी रामलीला न होने से खासे निराश हैं लेकिन वे भी परंपराओं के पालन के लिए तैयार हैं। अधिकांश लीला नेमियों का कहना है कि रामलीला हो न हो वे महीने भर रामनगर जरूर जाएंगे। जिस दिन जहां की लीला का प्रसंग होगा उस दिन वहीं पर प्रभु की भक्ति करेंगे और आरती कर वापस आएंगे। जब से रामलीला शुरू हुई है उसके बाद इतिहास में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि महामारी के चलते रामलीला रद्द हुई है। बता दें 30 सितंबर से रामनगर में विश्वप्रसिद्ध श्रीराम लीला शुरू होनी थी।
विज्ञापन