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94वें साल में पहली बार नहीं उठेगा अलम का जुलूस
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वाराणसी। लॉकडाउन के कारण कई धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हुईं हैं तो कई परंपराएं टूटीं हैं। इसी क्रम में बीबी फातमा का रौजा तोड़े जाने के विरोध में हर साल आठ शव्वाल को उठने वाला अलम का जुलूस 94 साल में पहली बार नहीं उठाया जाएगा। यह जानकारी देते हुए शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि एक जून को अंजुमन हैदरी के जेरे इंतजाम निकलने वाला अलम का एहतेजाजी जुलूस लॉकडाउन के कारण नहीं निकलेगा। इस दौरान आयोजित मजलिस में केवल पांच लोग ही शामिल होंगे।
बता दें कि यह जुलूस नई सड़क से होकर चौक, मैदागिन, विशेश्वरगंज होते हुए शिया जामा मस्जिद दारानगर जाता था। अंजुमन हैदरी के महासचिव सैय्यद अब्बास रिजवी शफक ने बताया कि अंजुमन द्वारा उठाया जाने वाला जुलूस स्थगित रहेगा। हाजी फरमान हैदर ने बताया कि सऊदी अरब में 1926 में बीबी फातमा समेत कई रौजे ध्वस्त कर दिए गए थे। उसी के विरोध में यह अलम का जुलूस निकाला जाता है। काली महाल स्थित शिया मस्जिद में मात्र पांच लोग ही मजलिस, मातम और नौहाख्वानी के जरिए रवायत को कायम रखते हुए विरोध जताएंगे। लोग घरों में ही मजलिस और मातम करके विरोध जताएंगे। शहर भर के इमामबाड़ों में भी केवल पांच लोग ही रहेंगे।
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बता दें कि यह जुलूस नई सड़क से होकर चौक, मैदागिन, विशेश्वरगंज होते हुए शिया जामा मस्जिद दारानगर जाता था। अंजुमन हैदरी के महासचिव सैय्यद अब्बास रिजवी शफक ने बताया कि अंजुमन द्वारा उठाया जाने वाला जुलूस स्थगित रहेगा। हाजी फरमान हैदर ने बताया कि सऊदी अरब में 1926 में बीबी फातमा समेत कई रौजे ध्वस्त कर दिए गए थे। उसी के विरोध में यह अलम का जुलूस निकाला जाता है। काली महाल स्थित शिया मस्जिद में मात्र पांच लोग ही मजलिस, मातम और नौहाख्वानी के जरिए रवायत को कायम रखते हुए विरोध जताएंगे। लोग घरों में ही मजलिस और मातम करके विरोध जताएंगे। शहर भर के इमामबाड़ों में भी केवल पांच लोग ही रहेंगे।
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