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कला मेले में कवियों ने सुनाई भावपूर्ण रचनाएं

Mon, 16 Mar 2020 01:33 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 16 Mar 2020 01:33 AM IST
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varanasi kavi
राजातालाब। इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट्स घमहापुर गंगापुर में आयोजित कला मेला एवं कला प्रदर्शनी में रविवार को कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में कवियों ने देश की एकता और समृद्धि के गीत गाए। सिद्धार्थ राय की कविता सब के खातिर सुखद भोर दो रामजी समृद्धि का सुखद दौर दो राम जी खूब सराही गई। दिल्ली के दंगे पर राजवर्धन सिंह सोच की मार्मिक रचना एक दंगा देखा मैंने, सड़कों पर जम्हूरियत को नंगा देखा मैंने पढ़ा।
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गीतकार महेंद्र सिंह नीलम के गीत जब जब तुलसी के चौरे पर तुमने दीप जलाया होगा, तुम्हारे मृदु अधरों पर नाम किसी का आया होगा ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। कवि पीके सिंह ने बसंत बहार का वर्णन हवा चल रही फर फर फर के माध्यम से किया। डॉ. आभा मिश्रा ने सीए और कश्मीर की समस्या पर कविता सुनाई। जबकि सुनील कुमार, संगीत तिवारी, जितेंद्र कुमार भिखारी, अरविंद कुमार अखंड ने भी अपनी रचनाएं पढ़ीं। इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. अवधेश सिंह ने कवि गोष्ठी में उपस्थित श्रोताओं और कवियों तथा छात्र-छात्राओं के प्रति आभार प्रकट किया।
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