फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Varanasi flyover collapse officers shows carelessness

वाराणसी फ्लाईओवर हादसाः अफसरों में दिखी हद दर्जे की लापरवाही, प्रशासनिक हलके में दशहत

Wed, 16 May 2018 10:48 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 16 May 2018 10:48 AM IST
विज्ञापन
Varanasi flyover collapse officers shows carelessness
संसाधनों की कमी, अफसरों के पास नहीं था कंटीजेंसी प्लान - फोटो : अमर उजाला
किसी भी तरह के  हादसों से निपटने के लिए प्रशासन का कंटीजेंसी प्लान होता है। प्रशासन समय समय पर मॉक ड्रिल भी करता है। मगर बनारस का दुर्भाग्य कि यहां कोई कार्ययोजना नहीं थी। विशालकाय बीम के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए ना तो समय से जेसीबी पहुंची, न अधिकारी और न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम।
विज्ञापन


हृदय विदारक घटना के बाद जब अधिकारी मौके पर पहुंचे भी तो जेसीबी के अलावा किसी तरह का संसाधन नहीं होने से राहत कार्य कामचलाऊ ढंग से ही शुरू हुए। आम लोगों ने ही पूरे ऑपरेशन की कमान संभाली।
विज्ञापन


पढ़ेंः वाराणसी हादसाः चार घंटे, दर्द, चीत्कार और मददगारों के जयकार, तस्वीरों में देखें रेस्क्यू ऑपरेशन
विज्ञापन
विज्ञापन


मौके पर मौजूद भीड़ से लगातार गैस कटर, सहित अन्य संसाधनों की मांग होती रही। अधिकारी केवल फोन पर ही अपडेट दे रहे थे। मौके पर अफसरों में समन्वय का अभाव और हद दर्ज की लापरवाही भी साफ दिखाई दी।

अधिकारियों की फौज के बावजूद घटनास्थल को पूरी तरह से राहत और बचाव कार्य करने वालों के लिए सुविधाजनक तक नहीं किया जा सका। भीड़ पर नियंत्रण करने के बजाय अफसर मूकदर्शक बने रहे।

पढ़ेंः बाबा की नगरी में मौत का तांडव, सबको रुला रहा है घटना स्थल का खौफनाक मंजर

डेढ़ घंटे बाद जेसीबी पहुंची तो उसके लिए जगह ही नहीं मिल रही थी। अधिकारी तय नहीं कर पा रहे थे कि जेसीबी को दोनों तरफ से अंदर तक कैसे पहुंचाया जाए। वहां मौजूद लोगों ने रेलवे की दीवार तोड़कर जेसीबी के लिए जगह बनाई। अधिकारी राहत कार्य से दूर ही रहे। 

प्रशासनिक हलके में दशहत
फ्लाईओवर का काम पूरा करने के लिए अधिकारी लगातार समीक्षा कर रहे थे। मगर, यहां चल रही हद दर्जे की लापरवाही से पूरी तरह अनभिज्ञ बने रहे। हादसे के बाद अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। बीम का काम शुरू होने से पहले इस रूट को डायवर्ट किया जाना था। प्रशासन ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया।

जाम के झाम ने ले ली कई जिंदगी

Varanasi flyover collapse officers shows carelessness
आखिरकार जिसका डर था वही हुआ। जाम के झाम में फंसकर मंगलवार को कई लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी। कैंट पर बन रहे फ्लाईओवर का स्लैब जब गिरा तो उस दौरान सड़क पर जाम लगा हुआ था। गाड़ी भगाना तो दूर लोगों को वाहन से बाहर निकलने तक का मौका नही मिला। इसे लेकर आम जनता में जबरदस्त रोष है।

स्लैब के नीचे दबी गाड़ियों की हालत देखकर उनकी स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। चकनाचूर सिटी बस, ऑटो, बाइक, कारें, सब लगभग एक दूसरे से सटी खड़ी हैं। इसका कारण सड़क पर जाम रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो मंगलवार की शाम भी यहीं हालात थे। जब स्लैब गिरने लगा तो किनारे चल रहे बाइक सवार अपने वाहन छोड़ कूद गए। इसके चलते कई की जान बच गई। वहीं सिटी बस, कारें, ऑटो और बीच में चल फंसी बाइक सवार इसकी चपेट में आ गए।

लोगों ने बताया कि कुछ लोग तो कार का दरवाजा खोल चुके थे पर उनके निकलने से पहले स्लैब आकर गिर पड़ा। एक स्लैब से बचने के चक्कर में कुछ लोग दूसरी स्लैब की चपेट में आ गए।

हर कोई काशी की यातायात व्यवस्था को कोसता रहा। लोगों का कहना था कि अगर जाम न होता तो इतनी मौतें न होतीं। कैंट रेलवे स्टेशन से लेकर लहरतारा ओवरब्रिज तक अक्सर जाम लगा रहता है।

हेल्पलाइन नंबर 
हादसे में मृतकों और घायलों की जानकारी और मदद के लिए रवींद्रपुरी स्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय का लैंडलाइन नंबर 0542-23144000 और मोबाइल नंबर 9450211400 पर संपर्क कर सकते हैं। 

नहीं तो होती ज्यादा मौतें..

Varanasi flyover collapse officers shows carelessness
गनीमत रही कि सिटी बस में ज्यादा यात्री नही थे वरना मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती थी। सिटी बस का दो तिहाई हिस्सा बीम गिरने के चलते बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इसकी चपेट में जो भी आया उसकी मौत हो गई।

बस की ज्यादातर सीटें खाली थी। बस के आगे का हिस्सा सुरक्षित होने के कारण अहिरौरा निवासी चालक अशर्फुद्दीन, परिचालक हेमंत नाथ पांडेय इस घटना में बाल-बाल बच गए। उन्होंने बचे यात्रियों को आगे से खींचकर बाहर निकाला

तमाशबीनों के चलते बार-बार प्रभावित हुआ राहत कार्य
तमाशबीनों के चलते कई बार राहत कार्य प्रभावित हुआ। घटनास्थल पर बार-बार लोग जमा हो जाते और फोटो, वीडियो बनाने लगते। पुलिस उन्हें हटाती तो वह दूसरी तरफ से फिर से वहीं आ जाते। कहीं बचाव कार्य के चलते तमाशबीन घायल न हो जाए इसके चलते कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

जब लोगों को वहां से हटाया गया तो बड़ी संख्या में तमाशबीन रेलवे कॉलोनियों की छत पर चढ़ गए। कॉलोनी के कमरे पुराने होने की वजह से प्रशासन को यह डर सताने लगा कि कहीं दूसरा हादसा न हो जाए। इसके चलते कई बार दिक्कतें आईं।

आम लोगाें के लिए खुला रेलवे के मंडलीय अस्पताल
डीआरएम पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल एसके झा के निर्देश पर रेलवे के मंडलीय अस्पताल आम घायलों के लिए खोल दिया गया। इमरजेंसी में चिकित्सकों और स्टॉफ की संख्या बढ़ा दी गई। यहां सात लोग आए। इनमें से दो को प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया गया। वहीं चार अन्य को मृत घोषित किया गया। एक का ईलाज चल रहा है। मौके पर अशोक कुमार सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
 

सांस चलती देख लगती थी दौड़,  निकाले जा सके मलबे में दबे लोग

Varanasi flyover collapse officers shows carelessness
भयावह हादसा, चार घंटे, मलबे में दबे घायलों का दर्द, चीत्कार, बाहर खड़े लोगों की मशक्कत और जरा सी कामयाबी पर भीड़ का जयकार। यह पूरा मंजर बीम हादसे के बाद घटनास्थल पर रहा। शाम करीब 5.30 बजे लहरतारा पुल के आगे हुए जैसे ही हादसा हुआ तो हादसे तो आसपास के लोग पहले तो कुछ समझ ही नहीं पाए। पुल का बीम गिरने से दबी कार, बस और टेंपों से बाहर दिख रहे चार लोगों को वहां मौजूद लोगों ने अस्पताल पहुंचाया, मगर कुछ लोग अंदर दबे ही मदद की गुहार लग रहे थे।

सूचना पर पुलिस पहुंची तो मूकदर्शक बने रहे। इस बीच स्थानीय लोग, स्वयंसेवी संगठनों ने मोर्चा संभाला और अंदर दबे लोगों को ढांढस बनाने में जुटे रहे। करीब सात बजे एक के बाद एक आठ जेसीबी के साथ अधिकारियों का दल बल मौके पर पहुंचा तो बचाव कार्य शुरू हुआ। इसके बाद मौके पर पहुंची एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाला और इसके बाद तीन घंटे की कड़ी मशक्कत, मलबे में दबे लोगों के दर्द और चीत्कार के बीच एक के बाद एक गाड़ियों को निकाला गया।

इस बीच जैसे ही आठों जेसीबी एक साथ उस भारी भरकम बीम को उठाते तो एनडीआरएफ के जवान और स्थानीय लोग अंदर से गाड़ियों को खींचने में जुट जाते। इस दौरान वहां मौजूद भीड़ जयकारे लगाकर उत्साह बढ़ाती। कड़ी मशक्कत के बाद वाहनों में दबे लोगों को निकाला गया। करीब 50 फीट के बीम के नीचे एक सिटी बस, दो ऑटो, दो बोलेरो, दो कार, एक अप्पे, दो बाइक दबी थी।

इसमें सड़क तक चिपटी कारों से शरीर के हिस्से दिखाई दे रहे थे। सबसे पीछे की कार में चालक के दोनों पैर फंसे थे मगर, वह खुद को बचाने की गुहार लगा रहे थे। उस वक्त पूरा दृश्य ना केवल भयावह था, बल्कि दर्दनाक भी। बेबस लोग केवल फोन कर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को सूचना दे रहे थे। करीब डेढ़ घंटे बाद शुरू हुए बचाव कार्य में पुलिस, प्रशासन, नगर निगम, 39 जीटीसी के जवान और एनडीआरएफ के साथ पब्लिक ने मोर्चा संभाला।

जेसीबी के जरिए बीम को कई जगहों से बांधा गया और उसे एक साथ जेसीबी के जरिए उठाया जाता। जैसे ही बीम उठता तो एनडीआरएफ के जवान अंदर घुसते और उससे गाड़ी या उसमें फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश करते। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस खड़ी थी और जैसे ही अंदर से घायल निकाले जाते तो तत्काल उन्हें कोरिडोर बनाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया।

करीब तीन घंटे तक चली मशक्कत के बाद यह पूरा ऑपरेशन चला। सभी वाहनों के मलबे बाहर निकाले जाने के बाद राहत कार्य में जुटी टीम ने रेस्क्यू करना दोबारा शुरू किया। इस दौरान भारी भीड़ वहां डटी रही और पुलिस उन्हें हटाने में जुटी रही। करीब 10 बजे तक बीम के नीचे दबे वाहनों को निकाल कर प्रथम चरण का राहत कार्य समाप्त हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed