वैशाख पूर्णिमा: घरों पर ही करें स्नान और भगवान विष्णु की आराधना
पूर्णिमा के दिन शिव और सर्वार्थसिद्धि योग के साथ ही अमृत सिद्धि का योग बन रहा है। वैशाख पूर्णिमा के साथ ही वैशाख मास के धार्मिक अनुष्ठान, नियम, संयम का भी समापन होगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सनातन धर्म में वैशाख पूर्णिमा के पर्व का विशेष महत्व है। आज वैशाख पूर्णिमा मनाई जा रही है। इसको बुद्ध पूर्णिमा, सिद्धिविनायक पूर्णिमा एवं सत्य विनायक पूर्णिमा भी कहा जाता है। श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा अर्चना का इस दिन विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि पूर्णिमा के दिन शिव और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। साथ ही अमृत सिद्धि का योग बन रहा है। शिव योग 26 मई की रात 10.52 तक रहेगा।
इसके बाद सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग आरंभ होंगे और अगले दिन सुबह 10.27 तक रहेगा। शिव योग में पूजन अर्चन सुख शांति और मनोकामना की पूर्ति होती है। जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग में धन धान्य पूर्ण करने वाली मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अमृत सिद्धि योग शुभता प्रदान करने वाला योग है। इस योग में जो भी कार्य होते हैं। वो स्थायी रहते हैं। यह चल अचल संपत्ति खरीदने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। वैशाख शुक्ल पत्र की पूर्णिमा तिथि मंगलवार की रात 8:30 बजे से लगी और 26 मई को दिन में 4:44 बजे तक स्नान दान की पूर्णिमा मनाई गई।
वैशाख पूर्णिमा के साथ ही वैशाख मास के धार्मिक अनुष्ठान, नियम, संयम का भी समापन होगा। वैशाख पूर्णिमा पर धर्मराज के व्रत का संकल्प लेकर विधि-विधान से पूजन करें। इससे अकाल मृत्यु के भय का निवारण तथा सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है। कोरोना महामारी के कारण घर पर ही सभी अनुष्ठान करें।
दूर हुई थी सुदामा की दरिद्रता
पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण ने वैशाख पूर्णिमा का महत्व अपने परम मित्र सुदामा को उस समय बताया था जब वे द्वारिका पहुंचे थे। श्री कृष्ण के बताने के अनुसार सुदामा ने व्रत किया, इससे उनकी दरिद्रता और दुख दूर हो गए।
भगवान बुद्ध का हुआ था जन्म
वैशाख पूर्णिमा पर भगवान विष्णु के अवतार भगवान बुद्ध के रूप में हुआ था वैशाख पूर्णिमा को ही परिनिर्वाण दिवस भी मनाया जाता है। बौद्ध धर्मावलंबी अपने परंपरा के अनुसार आज के दिन बौद्ध विहार में विविध धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन भी करते हैं।