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वड़क्कम और हर-हर महादेव के उद्घोष से होगा अभिनंदन

Fri, 18 Nov 2022 08:00 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2022 08:00 AM IST
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Vadakkam and Har-Har Mahadev will be greeted with the announcement
काशी तमिल संगमम में तमिल भाषी और काशी के लोग हर-हर महादेव से एक दूसरे का अभिवादन करेंगे। माह भर तक चलने वाले आयोजन में तीन हजार तमिल भाषी काशी, अयोध्या और प्रयागराज की यात्रा करेंगे। चार दिनों की यात्रा के बाद जब वह अपने-अपने क्षेत्रों में लौटेंगे तो उनके साथ यूपी में हो रहे विकास कार्यों की कहानियां भी होंगी। यह तमिल भाषी एक तरह से यूपी के ब्रांड एंबेसडर की भूमिका भी निभाएंगे।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एंफीथिएटर मैदान पर आयोजित काशी-तमिल संगमम एक भारत श्रेष्ठ भारत की पीएम की परिकल्पना को मूर्त रूप देगा। सांस्कृतिक आदान-प्रदान के तहत कार्यक्रम के दौरान काशीवासी तमिल संस्कृति, खानपान, मंदिर, धरोहर, कला से रूबरू होंगे। तमिलनाडु से आने वाले प्रतिनिधि काशी भ्रमण के दौरान काशी विश्वनाथ धाम, सारनाथ, टीएफसी के साथ ही अयोध्या में बन रहे भगवान राम के मंदिर को भी देखेंगे। वह तीर्थराज प्रयागराज में भी दर्शन पूजन करेंगे।
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काशी में सज गया मिनी तमिलनाडु
बीएचयू के एंफीथिएटर मैदान पर सजने वाले दर्जनों स्टॉल के माध्यम से काशीवासियों को तमिल संस्कृति को बेहद करीब से जानने का अवसर मिलेगा। महीने भर तक काशी वासियों को मिनी तमिलनाडु का एहसास भी होगा। 23 सौ साल पहले से काशी और तमिल का संबंध था जो आज भी है। तमिल समाज के लोकसाहित्य में बाबा विश्वनाथ, मां गंगा और मोक्षदायिका नगरी का उल्लेख मिलता है।
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राजाओं ने तमिलनाडु में बसाई छह काशी
तीर्थ पुरोहित एस मणि ने बताया कि सातवीं सदी में तमिल के लोक साहित्य में काशी का वर्णन मिलता है। काशी की यात्रा जब बाधित हुई तो तमिल राजाओं ने तमिलनाडु के छह शहरों में दक्षिण की काशी बसा दी। पांड्य वंश के राजा जटिल वर्म पराक्रमम ने ताम्रवर्णीय नदी के तट पर काशी का निर्माण किया जो आज तेनकाशी के नाम से जानी जाती है। दक्षिण की इस काशी में राजा जटिल वर्मा ने भव्य विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया था। इसके अलावा कुडलोर में वृद्धाचलम, पुष्पवन काशी, तिरुपुवनम, गंगईकोंड, शैलपुरम तथा तिरवय्यार काशी के नाम से आज भी मौजूद है।
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