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वाराणसी: उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की धरोहर और रियाज वाले कमरे पर चला हथौड़ा

Wed, 19 Aug 2020 09:15 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 19 Aug 2020 09:15 AM IST
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Ustad Bismillah Khan house heritage riyaz rood hammer in varanasi
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां। - फोटो : अमर उजाला

शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को कौन नहीं जानता। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां केवल वाराणसी के ही नहीं बल्कि देश के लिए एक गौरव थे। लेकिन आज उनकी धरोहर खतरे में दिखाई दे रही है। उनके पैतृक मकान को तोड़ा जा रहा है। जिस कमरे में उस्ताद रियाज किया करते थे, उसे तोड़ दिया गया है।

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वाराणसी के बेनियाबाग की भीखाशाह लेन स्थित उस्ताद का पैतृक मकान है। उनके घर को तोड़कर कमर्शियल अपार्टमेंट बनाने की तैयारी की जा रही है। 


उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पुण्यतिथि इसी माह 22 अगस्त को है। हर साल की तहर इस साल भी उनके चाहने वालों ने इसी कमरे से वर्चुअल कार्यक्रम करने की नीयत बना रखी थी। लेकिन धरोहर पर हथौड़ा चलने से उनके सपने टूट गए।

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Ustad Bismillah Khan house heritage riyaz rood hammer in varanasi

इस मामले में उस्ताद की बेटी सोमा घोष से बात की तो उन्होंने बताया कि उस्ताद ने इसी कमरे में अपनी संगीत की तपस्या की थी और अमेरिका के राष्ट्रपति का अमेरिका बसने का निमंत्रण सिर्फ एक कमरे में रखी चारपाई पर आने वाली सुकून की नींद के लिए ठुकराया था। उस कमरे को तोड़ना कहीं से सही नहीं है।

इस धरोहर के आसपास के हिस्से को हम रेनोवेट करवा सकते हैं पर उस कमरे को तोड़ कर बहुत गलत हुआ है। उन्होंने कहा कि वो जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा से बात करेंगी ताकि इस कमरे को बचाया जा सके।

क्या है मामला
चौक थाना क्षेत्र के दालमंडी के निकट हडहा सराय की भीखशाह गली में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का पैतृक आवास है। उस्ताद इसी मकान के ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में रोज़ सुबह फजर की नमाज के बाद रियाज करते थे। उनका रहना सहना और सोना भी इसी कमरे में हुआ करता था। एक प्रकार से देखा जाए तो भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का ये कमरा धरोहर था। उस्ताद के दुनिया-ए-फानी से रुखसत हो जाने के बाद इस कमरे को देश की धरोहर समझा जाने लगा था।

मुख्य वाणिज्यिक क्षेत्र में होने के कारण इस मकान पर क्षेत्र के बिल्डर्स लगातार नज़र गड़ाए हुए थे। इस दौरान कई बार इस मकान की मरम्मत की बात हुई। मगर हर बार सभी चालें फेल होती गईं। अब इस धरोहर को 12 अगस्त की रात से क्षेत्र का एक बिल्डर कमर्शियल बिल्डिंग बनाने के लिए इसे तुड़वा रहा है।

अगर दावों की बात करें तो इसकी जानकारी उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के छोटे बेटे नाजिम हुसैन को भी नहीं थी। आज जब जानकारी हुई तो मामले में हंगामा जैसा खड़ा हो गया।

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