UP Weather: श्रीनगर-कारगिल से भी कम रहा काशी का तापमान, 6.9 मिमी बारिश, 300 साल पुराना पेड़ गिरा; ऑरेंज अलर्ट
UP Weather News: वाराणसी में माैसम बदल जाने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। शनिवार को बादलों की आवाजाही के साथ बारिश भी होती रही। आईएमडी की ओर से बनारस को प्रदेश का सबसे ठंडा शहर घोषित कर दिया गया।
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Varanasi Weather: मानसून प्रवेश के दूसरे ही दिन छह मिलीमीटर से ज्यादा की बारिश ने बनारस को श्रीनगर और कारगिल से भी ज्यादा ठंडा शहर बना दिया। शनिवार को बनारस शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से 5.7 डिग्री नीचे 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इससे तीन डिग्री ऊपर श्रीनगर का अधिकतम पारा 34.8 डिग्री और 0.6 डिग्री ज्यादा 31.8 डिग्री सेल्सियस पारा कारगिल में दर्ज किया गया।
इसी के साथ आईएमडी की ओर से भी शनिवार को बनारस को प्रदेश का सबसे ठंडा शहर घोषित कर दिया गया। वहीं मौसम विज्ञान विभाग ने बनारस में अगले तीन से चार दिनों तक आंधी और बारिश होने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इससे तापमान 21 से 27 डिग्र्री तक भी नीचे आ सकता है।
शनिवार को बनारस में 6.9 मिलीमीटर बारिश हुई। औसत 4.4 मिमी के मुकाबले 44 फीसदी ज्यादा थी। पूरे दिन मंडराते काले बादल बड़े वेग से गुजरते हुए जोरदार बारिश की आस जगा रहे थे। कभी-कभी हल्की धूप भी पड़ी तो उमस भरी गर्मी का एहसास हुआ। हवा भी 20-25 किमी प्रति घंटे से भी तेज बह रही थी।
बनारस में लहरतारा, शिवपुर और कैंट की ओर बहुत तेज बारिश हुई। वहीं लंका और बरेका समेत कई इलाकों में बूंदाबांदी ही हुई है। भोजूबीर स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में पीपल का बड़ा पेड़ गिर पड़ा। ये पेड़ तीन बार में गिरा है। मंदिर के व्यवस्थापक राजू गिरी ने बताया कि 300 साल पुराने इस पेड़ के नीचे 32 वैदिक ब्राह्मण अनुष्ठान कर रहे थे, तभी पेड़ गिरने लगा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
दिन-रात से ज्यादा अंतर, सामान्य-वास्तविक तापमान में रहा
बनारस के दिन और रात के तापमान से ज्यादा अंतर, दिन के ही सामान्य और वास्तविक तापमान के बीच दिखाई दिया। शनिवार को बनारस के अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री और न्यूनतम पारा 26.8 डिग्री के बीच सिर्फ पांच डिग्री का ही अंतर रहा। जबकि वास्तविक तापमान सामान्य से 5.7 डिग्री नीचे खिसका गया। हवा में नमी 85 फीसदी से ज्यादा रही।
मानसून की दस्तक से ही अस्पतालों में भर गया पानी, वार्ड तक पहुंचना मुश्किल
मानसून की दस्तक के बाद हल्की बारिश होने पर ही जिले के अस्पतालों में जगह-जगह पानी भरना शुरू हो गया है। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा से लेकर दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों पर बारिश का पानी जमा दिखा।
बरसात का मौसम आते ही मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इधर, अस्पतालों में भी मरीजों, तीमारदारों को इस मौसम में घर के आसपास समुचित जल निकासी, साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा जाता है। अब जिस तरह से अस्पतालों में जल भराव देखने को मिल रहा है, उससे कहीं न कहीं जल निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शनिवार को महिला अस्पताल कबीरचौरा में ओपीडी से वार्ड और अल्ट्रासाउंड की ओर जाने वाले दोनों रास्ते पर पानी भरा रहा। महिला मरीज, तीमारदार भी इसी रास्ते से गुजर रहे थे। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में भी ओपीडी गेट के बाहर टीबी कार्यालय तक जाने वाले रास्ते पर भी पानी जमा रहा।
इमरजेंसी के बाहर से वार्ड की ओर जाने वाले रास्ते पर भी जलभराव की स्थिति रही। मरीजों को इसी रास्ते से आना-जाना पड़ा। इसी तरह की स्थिति दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल की भी है। यहां अस्पताल के मेन गेट के बाहर इतना पानी जमा है कि इधर से गुजरना मुश्किल है। इसी रास्ते से अधिकारी और डॉक्टर भी आते जाते हैं लेकिन तब भी जल निकासी की व्यवस्था नहीं हो पाई।