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UP: ससुर के बोए कांटे बहू की राह में बन रहे शूल... सपा ने यहां भाजपा के पूर्व सांसद पर खेला दांव; मुकाबला रोचक
Tue, 28 May 2024 02:04 PM IST
शाहरुख खान
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, रॉबर्ट्सगंज
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, रॉबर्ट्सगंज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 28 May 2024 02:04 PM IST
सार
यूपी की इस सीट पर ससुर के बोए कांटे बहू की राह में शूल बन रहे हैं। सपा ने यहां भाजपा के पूर्व सांसद को उतारकर बड़ा दांव खेला है। बसपा ने भी सबसे अधिक मुश्किलें रिंकी कोल के लिए पैदा की हैं।
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UP Lok Sabha Election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पिछले दो चुनावों में रॉबर्ट्सगंज (सुरक्षित) सीट पर आसानी से जीत दर्ज करने वाले राजग की प्रत्याशी रिंकी कोल (अपना दल-एस) को इस बार कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा रहा है। इसके पीछे दो प्रमुख वजहें हैं। एक तो यह कि मिर्जापुर की तर्ज पर सपा ने इस सीट पर भी भाजपा के पूर्व सांसद छोटेलाल खरवार जैसे कद्दावर प्रत्याशी को उतारकर कड़ी चुनौती पेश की है।
छोटेलाल ने 2014 में इसी सीट से भगवा परचम फहराया था। दूसरी चुनौती रिंकी के ससुर और अपना दल (एस) के मौजूदा सांसद पकौड़ी लाल के उन बयानों से मिल रही है, जो उन्होंने पिछले दिनों सवर्णों के खिलाफ दिए थे। यानी ससुर के बोए कांटे बहू की राह में शूल बनते दिख रहे हैं। बसपा ने भी धनेश्वर गौतम को मैदान उतारकर सबसे अधिक मुश्किलें रिंकी कोल के लिए पैदा की हैं।
बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड की सीमा से सटे सोनभद्र जिले को बालू और पत्थरों की खदानों और अन्य खनिज भंडारों के चलते सोनांचल कहा जाता है। वहीं, पावर हब होने के कारण इस जिले को देश की ऊर्जा राजधानी भी कहते हैं।
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इसके वावजूद हर चुनाव में बड़ा मुद्दा जिले का विकास ही रहता है। विस्थापन, पुनर्वास, पलायन, रोजगार और पिछड़ेपन को लेकर भी खूब सवाल उठते हैं। पर, चुनावी रथ आगे बढ़ते ही इन सबकी गूंज मंद पड़ चुकी है। कड़वा सच तो यह है कि जब चुनाव जातीय समीकरणों पर हो रहे हों, तो मुद्दे गौण हो जाते हैं।
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छोटेलाल ने 2014 में इसी सीट से भगवा परचम फहराया था। दूसरी चुनौती रिंकी के ससुर और अपना दल (एस) के मौजूदा सांसद पकौड़ी लाल के उन बयानों से मिल रही है, जो उन्होंने पिछले दिनों सवर्णों के खिलाफ दिए थे। यानी ससुर के बोए कांटे बहू की राह में शूल बनते दिख रहे हैं। बसपा ने भी धनेश्वर गौतम को मैदान उतारकर सबसे अधिक मुश्किलें रिंकी कोल के लिए पैदा की हैं।
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बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड की सीमा से सटे सोनभद्र जिले को बालू और पत्थरों की खदानों और अन्य खनिज भंडारों के चलते सोनांचल कहा जाता है। वहीं, पावर हब होने के कारण इस जिले को देश की ऊर्जा राजधानी भी कहते हैं।
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इसके वावजूद हर चुनाव में बड़ा मुद्दा जिले का विकास ही रहता है। विस्थापन, पुनर्वास, पलायन, रोजगार और पिछड़ेपन को लेकर भी खूब सवाल उठते हैं। पर, चुनावी रथ आगे बढ़ते ही इन सबकी गूंज मंद पड़ चुकी है। कड़वा सच तो यह है कि जब चुनाव जातीय समीकरणों पर हो रहे हों, तो मुद्दे गौण हो जाते हैं।
स्थानीय बनाम बाहरी का भी मुद्दा उछला
रॉबर्ट्सगंज सीट 2019 से राजग में शामिल अपना दल (एस) के खाते में है। चुनाव अंतिम दौर में पहुंचते-पहुंचते मुख्य मुकाबला अपना दल (एस) और सपा के बीच सिमट गया है। बहरहाल छोटेलाल खरवार के मैदान में उतरने से इस बार स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा भी उछाला जा रहा है।
रॉबर्ट्सगंज सीट 2019 से राजग में शामिल अपना दल (एस) के खाते में है। चुनाव अंतिम दौर में पहुंचते-पहुंचते मुख्य मुकाबला अपना दल (एस) और सपा के बीच सिमट गया है। बहरहाल छोटेलाल खरवार के मैदान में उतरने से इस बार स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा भी उछाला जा रहा है।
रॉबर्ट्सगंज सदर विधानसभा क्षेत्र के नई बाजार के रहने वाले राम सजीवन सुशवाहा कहते हैं, रिंकी कोल से मिलने के लिए मिर्जापुर जाना होगा, जबकि छोटे लाल स्थानीय हैं। वहीं, जीऊत खरवार छोटेलाल को सजातीय होने के साथ ही जनता के बीच रहने वाला नेता बताते हैं।
सांसद के व्यवहार को लेकर भी सवाल
अमर उजाला की टीम पन्नूगंज बाजार पहुंची तो यहां चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा चल रही थी। टीम भी उसमें शामिल हो गई। सांसद की ही बिरादरी के भुलेटन कोल कहते हैं, पांच साल हो गए लेकिन आज तक उनको (सांसद) नहीं देखा। बात को बढ़ाते हुए राम दुलारे मौर्य कहते हैं, हमारे गांव तो वे सिर्फ वोट मांगने आए थे, इसके बाद उनके दर्शन नहीं हुए। गांव की सड़क के लिए कई बार उनसे मिलने गए, लेकिन मुलाकात नहीं हुई।
अमर उजाला की टीम पन्नूगंज बाजार पहुंची तो यहां चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा चल रही थी। टीम भी उसमें शामिल हो गई। सांसद की ही बिरादरी के भुलेटन कोल कहते हैं, पांच साल हो गए लेकिन आज तक उनको (सांसद) नहीं देखा। बात को बढ़ाते हुए राम दुलारे मौर्य कहते हैं, हमारे गांव तो वे सिर्फ वोट मांगने आए थे, इसके बाद उनके दर्शन नहीं हुए। गांव की सड़क के लिए कई बार उनसे मिलने गए, लेकिन मुलाकात नहीं हुई।
सवर्णों के खिलाफ बयान भी बिगाड़ रहा खेल
सवर्णों के बारे में रिंकी कोल के ससुर की आपत्तिजनक टिप्पणी वाले ऑडियो को भी विपक्ष हमले के लिए हथियार बना रहा है। घोरावल बाजार में मिले प्रभु दयाल चुनावी माहौल के सवाल पर पकौड़ी लाल कोल का ऑडियो सुनाने लगते हैं। वह कहते हैं, अब यह सब सुनने के बाद भी हम कैसे सांसद के परिवार के बारे में सोचें। पास में बैठे चतुरी तिवारी भी प्रभु दयाल की बातों का समर्थन करते हैं।
सवर्णों के बारे में रिंकी कोल के ससुर की आपत्तिजनक टिप्पणी वाले ऑडियो को भी विपक्ष हमले के लिए हथियार बना रहा है। घोरावल बाजार में मिले प्रभु दयाल चुनावी माहौल के सवाल पर पकौड़ी लाल कोल का ऑडियो सुनाने लगते हैं। वह कहते हैं, अब यह सब सुनने के बाद भी हम कैसे सांसद के परिवार के बारे में सोचें। पास में बैठे चतुरी तिवारी भी प्रभु दयाल की बातों का समर्थन करते हैं।
बेरोजगारी युवाओं में बड़ा सवाल
युवाओं की बात करें तो उनके बीच बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। बीटेक करने वाले अनिरुद्ध प्रसाद कहते हैं कि हमने दो बार प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया, लेकिन दोनों बार पेपर लीक होने से सारा प्रयास बेकार हो गया। ओबरा के रहने वाले विवेक गुप्ता कहते हैं, अभावग्रस्त इलाके में रहने के बावजूद किसी तरह हमने एमए तो कर लिया, पर रोजगार के लिए दर- दर की ठोकरें खा रहा हूं। ऐसे ही कई युवा बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए दिखे।
युवाओं की बात करें तो उनके बीच बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। बीटेक करने वाले अनिरुद्ध प्रसाद कहते हैं कि हमने दो बार प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया, लेकिन दोनों बार पेपर लीक होने से सारा प्रयास बेकार हो गया। ओबरा के रहने वाले विवेक गुप्ता कहते हैं, अभावग्रस्त इलाके में रहने के बावजूद किसी तरह हमने एमए तो कर लिया, पर रोजगार के लिए दर- दर की ठोकरें खा रहा हूं। ऐसे ही कई युवा बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए दिखे।
पांचों विधानसभा सीटों पर है राजग का कब्जा
रॉबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें से चार-रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, दुद्धी और ओबरा सोनभद्र जिले की हैं। वहीं, चकिया विधानसभा क्षेत्र चंदौली जिले का हिस्सा है। इन सभी सीटों पर भाजपा का ही कब्जा है। इसलिए अपना दल (एस) प्रत्याशी को थोड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि सपा प्रत्याशी छोटेलाल चकिया विधानसभा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं और यहां उनकी बिरादरी की बहुलता है
रॉबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें से चार-रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, दुद्धी और ओबरा सोनभद्र जिले की हैं। वहीं, चकिया विधानसभा क्षेत्र चंदौली जिले का हिस्सा है। इन सभी सीटों पर भाजपा का ही कब्जा है। इसलिए अपना दल (एस) प्रत्याशी को थोड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि सपा प्रत्याशी छोटेलाल चकिया विधानसभा क्षेत्र के ही रहने वाले हैं और यहां उनकी बिरादरी की बहुलता है
2.50 लाख दलित भी प्रभावित कर रहे समीकरण
इस सीट पर दलित मतदाताओं की संख्या करीब 2.50 लाख है, जिसे बसपा का कोर वोटबैंक माना जाता है। इनके बूते ही बसपा ने 2004 में जीत हासिल की थी। बसपा को भरोसा है कि यदि अन्य दलित वोटों में सेंध लगा ली जाए, तो चुनाव परिणाम बदला जा सकता है। हालांकि दलित मतदाताओं पर नजर गड़ाए दोनों प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी के मिर्जापुर का निवासी होने का मुद्दा उठाकर लाभ उठाने की कोशिश में जुटे हैं।
इस सीट पर दलित मतदाताओं की संख्या करीब 2.50 लाख है, जिसे बसपा का कोर वोटबैंक माना जाता है। इनके बूते ही बसपा ने 2004 में जीत हासिल की थी। बसपा को भरोसा है कि यदि अन्य दलित वोटों में सेंध लगा ली जाए, तो चुनाव परिणाम बदला जा सकता है। हालांकि दलित मतदाताओं पर नजर गड़ाए दोनों प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी के मिर्जापुर का निवासी होने का मुद्दा उठाकर लाभ उठाने की कोशिश में जुटे हैं।
मोदी-योगी पर भरोसा बनेगा बड़ा संबल
मोदी-योगी पर कायम जनता के भरोसे को अपना दल (एस) की प्रत्याशी के लिए बड़ा संबल माना जा रहा है। खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में। इन क्षेत्रों में मुफ्त राशन, उज्ज्वला, आयुष्मान जैसी योजनाओं के लाभार्थियों में सवालों से ज्यादा योजनाओं की ही चर्चा देखने को मिली।
मोदी-योगी पर कायम जनता के भरोसे को अपना दल (एस) की प्रत्याशी के लिए बड़ा संबल माना जा रहा है। खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में। इन क्षेत्रों में मुफ्त राशन, उज्ज्वला, आयुष्मान जैसी योजनाओं के लाभार्थियों में सवालों से ज्यादा योजनाओं की ही चर्चा देखने को मिली।
2019 का परिणाम
पकौड़ी लाल कोल, अपना दल-एस 4,47,914
भाईलाल काल, सपा 3.93,578
भगवती प्रसाद चौधरी, कांग्रेस 35,269
पकौड़ी लाल कोल, अपना दल-एस 4,47,914
भाईलाल काल, सपा 3.93,578
भगवती प्रसाद चौधरी, कांग्रेस 35,269