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Varanasi News : मिशन शक्ति के तहत ‘सजा कराओ अभियान’ में वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस यूपी में अव्वल
Sun, 26 Jun 2022 01:34 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 26 Jun 2022 01:34 PM IST
सार
पाक्सो एक्ट से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण में 25 मार्च से 20 जून के बीच शासन की समीक्षा में कमिश्नरेट पुलिस पहले स्थान पर आया। पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश के अनुसार वाराणसी कमिश्नरेट में कुल 49 पाक्सो एक्ट के प्रकरण आए, जिनमें से 39 प्रकरणों में न्यायालय के जरिए अभियुक्तों को सजा कराई गई।
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आईपीएस ए. सतीश गणेश
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
वाराणसी मिशन शक्ति के तहत ‘सजा कराओ अभियान’ में कमिश्नरेट पुलिस को प्रदेश में पहला स्थान मिला है। पाक्सो एक्ट से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण में 25 मार्च से 20 जून के बीच शासन की समीक्षा में कमिश्नरेट पुलिस पहले स्थान पर आया। जबकि बरेली दूसरे पायदान पर है।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश के अनुसार वाराणसी कमिश्नरेट में कुल 49 पाक्सो एक्ट के प्रकरण आए, जिनमें से 39 प्रकरणों में न्यायालय के जरिए अभियुक्तों को सजा कराई गई। सजा कराये जाने का प्रतिशत 80 हैं। कम समय में कमिश्नरेट पुलिस ने प्रभावी पैरवी करते हुए दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाई।
वहीं, दूसरा स्थान बरेली ने प्राप्त किया, जिनका सजा कराने का प्रतिशत 39 है। पुलिस आयुक्त के अनुसार महिला अपराधों में कमी आई है और पाक्सो एक्ट में प्रभावी कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर निरंतर कराई जा रही है। यह कमिश्नरेट के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के अथक प्रयास से ही संभव हो पाया।
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पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश के अनुसार वाराणसी कमिश्नरेट में कुल 49 पाक्सो एक्ट के प्रकरण आए, जिनमें से 39 प्रकरणों में न्यायालय के जरिए अभियुक्तों को सजा कराई गई। सजा कराये जाने का प्रतिशत 80 हैं। कम समय में कमिश्नरेट पुलिस ने प्रभावी पैरवी करते हुए दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाई।
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वहीं, दूसरा स्थान बरेली ने प्राप्त किया, जिनका सजा कराने का प्रतिशत 39 है। पुलिस आयुक्त के अनुसार महिला अपराधों में कमी आई है और पाक्सो एक्ट में प्रभावी कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर निरंतर कराई जा रही है। यह कमिश्नरेट के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के अथक प्रयास से ही संभव हो पाया।
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उन्होंने चेताया कि संभल जाएं, ऐसे अपराधी, जो महिलाओं और युवतियों के आबरू से खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। कमिश्नरेट पुलिस की नजर से उनका बच पाना मुश्किल है। ऐसी प्रभावी कार्रवाई होगी कि कानून के हाथ से उनका निकल पाना मुश्किल। यानी अदालत से सजा तय है।